अगर पति-पत्नी दोनों केंद्र सरकार के कर्मचारी हैं और एक ही शहर में पोस्टेड हैं, तो उनके लिए House Rent Allowance (HRA) को लेकर सरकार ने स्थिति साफ कर दी है. सरकार ने कहा है कि अगर दोनों में से किसी एक को सरकारी आवास मिला हुआ है, तो दूसरे कर्मचारी को भी HRA नहीं मिलेगा. सरकार का मानना है कि ऐसे मामले में परिवार को रहने के लिए सरकारी घर मिल चुका है, इसलिए किराए का अलग खर्च नहीं होता.
यह जानकारी 4 अगस्त को राज्यसभा में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने एक लिखित जवाब में दी.
क्या है HRA को लेकर सरकार का नियम?
सरकार के मुताबिक, HRA उन केंद्रीय कर्मचारियों को दिया जाता है जिन्हें सरकारी आवास नहीं मिलता और जिन्हें रहने के लिए किराए पर घर लेना पड़ता है.
लेकिन अगर:
- पति और पत्नी दोनों केंद्र सरकार के कर्मचारी हों,
- दोनों की पोस्टिंग एक ही स्टेशन (शहर) में हो,
- और दोनों में से किसी एक को सरकारी आवास मिल गया हो,
तो परिवार को पहले से ही सरकारी आवास उपलब्ध माना जाएगा. ऐसे में दूसरे कर्मचारी को HRA नहीं मिलेगा, क्योंकि सरकार के अनुसार उस पर अलग से घर किराए पर लेने का खर्च नहीं आता.
सांसद ने सरकार से क्या पूछा था?
राज्यसभा सांसद सुमित्रा बाल्मिक ने सरकार से चार अहम सवाल पूछे थे. इनमें मुख्य तौर पर यह जानना चाहा गया कि:
- दोनों सरकारी कर्मचारी पति-पत्नी होने पर HRA क्यों नहीं दिया जाता?
- क्या कर्मचारियों या उनके संगठनों ने इस नियम में बदलाव की मांग की है?
- क्या सरकार इस नीति की समीक्षा करने पर विचार कर रही है?
- अगर हां, तो उसकी क्या योजना है?
क्या सरकार नियम बदलने पर विचार कर रही है?
इस सवाल के जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने साफ कहा कि सरकार को इस नीति में बदलाव की मांग को लेकर कोई प्रतिनिधित्व (Representation) नहीं मिला है.
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल सरकार इस नियम की समीक्षा करने या इसमें कोई बदलाव करने का प्रस्ताव नहीं रखती.
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