आधी आबादी नहीं जानती कहां से आया मैक्सी ड्रेस? सोशल मीडिया पर शुभ्रा झा का रील वायरल

Maxi Paglu: अधिकांश महिलाएं नहीं जानतीं कि मैक्सी ड्रेस भारत की देन नहीं, बल्कि विदेशी परिधान है. इसी बीच शुभ्रा झा का मैक्सी ड्रेस में इंस्टाग्राम रील वायरल हो गया है, जिसने इस ड्रेस को लेकर सोशल मीडिया पर नई चर्चा शुरू कर दी है.

Maxi Paglu: पिछले कुछ दिनों से एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें वह अलग-अलग रंग की मैक्सी ड्रेस पहनकर नजर आती हैं. इस इन्फ्लुएंसर का नाम शुभ्रा झा है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शुभ्रा बिहार से हैं और काम के सिलसिले में चेन्नई में रहती हैं.

मैक्सी ड्रेस में शुभ्रा का वीडियो वायरल होना लाजिमी था. उनकी एक मैक्सी रील करोड़ों व्यूज के साथ वायरल हुई, जिसके बाद लोगों ने उनसे ऐसे ही और कंटेंट की डिमांड करनी शुरू कर दी. शुभ्रा भी अपनी मैक्सी कलेक्शन दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं.

इंस्टाग्राम पर तमाम मीम्स वायरल हो रहे हैं, जिनमें कहा जा रहा है कि जहां एक ओर लड़कियां छोटे-छोटे कपड़े पहनकर फॉलोअर्स बटोरने की कोशिश करती हैं, वहीं ‘मैक्सी पगलू’ के नाम से मशहूर शुभ्रा ने यह साबित कर दिया है कि लड़कों को दीवाना बनाने के लिए स्किन शो की जरूरत नहीं है. शुभ्रा ने मैक्सी को नए स्तर पर पहुंचा दिया है. सिर्फ मैक्सी के दम पर. आईए जानते है क्या मैक्सी ड्रेस का इतिहासं और भारत में कैसे इतना पॉपुलर हुआ?

मैक्सी ड्रेस का इतिहास

मैक्सी ड्रेस की जड़ें 1960 के दशक के “फ्री-स्पिरिट” फैशन आंदोलन में हैं. जब डिजाइनरों ने लंबे फालों और बोहेमियन सिल्हुएट के साथ प्रयोग किया. प्रसिद्ध फैशन डिजाइनर ऑस्कर डी ला रेंटा ने 1960 के दशक में महिलाओं के लिए आरामदायक मैक्सी ड्रेस डिजाइन की, जिसे 1968 में खूब सराहा गया. शुरुआत में यह हिप्पी मूवमेंट का हिस्सा थी और इसे कई अंतरराष्ट्रीय फैशन आइकॉन्स ने अपनाया. तब से मैक्सी ड्रेस को आरामदायक और स्टाइलिश दोनों के रूप में स्वीकार किया गया है.

भारत में मैक्सी ड्रेस (Maxi Paglu)

ब्रिटिश राज के दौरान भारत में पश्चिमी परिधानों का चलन हुआ, जिसमें मैक्सी ड्रेस भी शामिल थी. इसका अर्थ यह है कि मैक्सी ड्रेस की उत्पत्ति भारत की नहीं है, बल्कि यह पश्चिमी फैशन की देन है. भारत में अब मैक्सी ड्रेस का खुद का एक स्थिर बाजार बन चुका है. कई फैशन ब्रांड और कपड़ा निर्माता मैक्सी ड्रेस का निर्माण कर रहे हैं. देशभर के प्रमुख शहरों जैसे मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, जयपुर, चेन्नई और बेंगलुरु में इसके विक्रेता सक्रिय हैं. कई “Made in India” ब्रांड्स की मैक्सी ड्रेस भी बाजार में उपलब्ध हैं, जो यह दर्शाती है कि भारत में इसका उत्पादन और व्यापार दोनों सक्रिय रूप से हो रहा है.

मैक्सी ड्रेस की खासियत

मैक्सी ड्रेस की प्रमुख पहचान इसकी लंबी लंबाई है, जो टखनों तक या जमीन तक भी पहुंच सकती है. यह ड्रेस ढीली और बेहद आरामदायक होती है. गर्मियों में इसे कॉटन या लिनेन जैसे हल्के कपड़ों से और सर्दियों में वेलवेट जैसे गर्म कपड़ों से तैयार किया जाता है. फैशन इंडस्ट्री में यह ड्रेस एक महत्वपूर्ण स्टाइल स्टेटमेंट बन चुकी है. कई बॉलीवुड अभिनेत्रियाँ भी इसे अपनाकर इसकी लोकप्रियता में इजाफा कर चुकी हैं.

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By Abhishek pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले तीन वर्षों से प्रभात खबर में डिजिटल जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं। वे बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं। शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, MSME, कृषि और इंडस्ट्री जैसे विषयों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे रिसर्च के साथ ऐसी खबरें और एक्सप्लेनर तैयार करते हैं, जिन्हें आम लोग भी आसानी से समझ सकें। इसके अलावा यूटिलिटी न्यूज और सक्सेस स्टोरीज लिखने में भी उनकी खास रुचि है।

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अभिषेक ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से की है, जिसे पत्रकारिता की दुनिया में 'दादा माखनलाल की बगिया' भी कहा जाता है।

करियर की शुरुआत उन्होंने राजस्थान पत्रिका के साथ की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा। इसके बाद वे प्रभात खबर से जुड़े और पिछले तीन वर्षों से डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में काम कर रहे हैं।

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अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।

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