जीएसटी काउंसिल की बैठक आज, इन मुद्दों पर हो सकती है बात

GST Council: जीएसटी काउंसिल की 43 वीं बैठक आज होगी. काउंसिल की इस बैठक में राज्यों के क्षतिपूर्ति के मुद्दे पर चर्चा की जायेगी. सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार क्षतिपूर्ति को लेकर आम सहमति बनाने के लिए एक मंत्रिस्तरीय समिति गठित करने के गैर-भाजपा शासित राज्यों के सुझाव पर गौर किया जा सकता है. कोरोना वायरस महमारी को देखने हुए देश में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए और उन्हें मदद करने के लिए सरकार कुछ सिलेक्टेड सेक्टर्स के लिए जीएसटी भुगतान को स्सपेंड करने पर विचार सकती है.

जीएसटी काउंसिल की 43 वीं बैठक आज होगी. काउंसिल की इस बैठक में राज्यों के क्षतिपूर्ति के मुद्दे पर चर्चा की जायेगी. सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार क्षतिपूर्ति को लेकर आम सहमति बनाने के लिए एक मंत्रिस्तरीय समिति गठित करने के गैर-भाजपा शासित राज्यों के सुझाव पर गौर किया जा सकता है. कोरोना वायरस महमारी को देखने हुए देश में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए और उन्हें मदद करने के लिए सरकार कुछ सिलेक्टेड सेक्टर्स के लिए जीएसटी भुगतान को स्सपेंड करने पर विचार सकती है.

वहीं भाजपा शासित राज्य कर्ज लेने के दिये गये विकल्प पर पहले ही केंद्र से सहमत हो चुके हैं. इनका मानना है कि उन्हें अब कर्ज लेने की दिशा में आगे बढ़ने की मंजूरी दी जानी चाहिए, ताकि उन्हें शीघ्र धन उपलब्ध हो सके. कि जीएसटी परिषद की 43वीं बैठक का एकसूत्रीय एजेंडा क्षतिपूर्ति के मुद्दे पर आगे का रास्ता निकालना है. परिषद ने पिछले सप्ताह हुई आखिरी बैठक में यह निर्णय लिया था कि कार, तंबाकू आदि जैसे विलासिता या अहितकर उत्पादों पर जून 2022 के बाद भी उपकर लगाया जाएगा. हालांकि इस बैठक में क्षतिपूर्ति के मुद्दे पर आम सहमति नहीं बन पायी थी.

चालू वित्त वर्ष में जीएसटी क्षतिपूर्ति राजस्व में 2.35 लाख करोड़ रुपये की कमी रहने का अनुमान है. केंद्र सरकार ने अगस्त में राज्यों को दो विकल्प दिया है. पहले विकल्प के तहत रिजर्व बैंक के द्वारा 97 हजार करोड़ रुपये के कर्ज के लिए विशेष सुविधा दिये जाने तथा दूसरे विकल्प के तहत पूरे 2.35 लाख करोड़ रुपये बाजार से जुटाने का प्रस्ताव है.

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केंद्र सरकार का कहना है कि जीएसटी क्षतिपूर्ति राजस्व में अनुमानित कमी में महज 97 हजार करोड़ रुपये के लिए जीएसटी क्रियान्वयन जिम्मेदार है, जबकि शेष कमी का कारण कोरोना वायरस महामारी है. कुछ राज्यों की मांग के बाद पहले विकल्प के तहत उधार की विशेष ऋण व्यवस्था को 97 हजार करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1.10 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है.

Posted By: Pawan Singh

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