Corona crisis से निपटने के लिए आर्थिक पैकेज की जल्द घोषणा करेगी सरकार

देश में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण का अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव

नयी दिल्ली : देश में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण और उसका अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव के बीच सरकार ने इस महामारी से निपटने, लॉकडाउन के दौरान स्टे होम (Stay Home) के दौरान लोगों को सहूलियत देने और सहूलियत देने में अपना योगदान देने वाली कंपनियों, वित्तीय संस्थानों को सहयोग देने के लिए सरकार जल्द ही आर्थिक पैकेज की घोषणा करेगी. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि कोरोना वायरस लॉकडाउन के मद्देनजर विभिन्न क्षेत्रों की मदद के लिए सरकार जल्द ही आर्थिक पैकेज की घोषणा करेगी. उन्होंने कहा कि देरी नहीं होगी, पैकेज की घोषणा जल्द ही की जाएगी.

सीतारमण ने कर और नियामकीय शर्तों के अनुपालन की समयसीमा बढ़ाने तथा कुछ और छूट देने की घोषणाएं भी कीं. सीतारमण ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये संवाददाताओं से बातचीत करते हुए आयकर रिटर्न, जीएसटी रिटर्न दाखिल करने और सीमा शुल्क एवं केन्द्रीय उत्पाद शुल्क संबंधी अनुपालनों के संबंध में ढील देने की घोषणा की.

उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के खतरे की रोकथाम के लिए आवागमन पर पाबंदी के बीच अनुपालनों आदि के लिए (वित्त वर्ष की अंतिम तिथि) 31 मार्च की अंतिम तिथि नजदीक आ गयी है. आने-जाने की पाबंदियों के कारण उद्योग और व्यवसाय जगत को काफी परेशानी हो रही है, इसलिए अनुपालन की समयसीमा बढ़ाने का फैसला किया गया है.

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Author: KumarVishwat Sen

Published by: Prabhat Khabar

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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