केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के एक्सपोर्ट पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स (Windfall Tax) में बढ़ोतरी कर दी है. सरकार ने यह फैसला ऐसे समय लिया है जब इंटरनेशनल मार्केट में फ्यूल के एक्सपोर्ट से होने वाली कमाई बेहतर बनी हुई है. हालांकि राहत की बात यह है कि घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं किया गया है. यानी फिलहाल आम उपभोक्ताओं को पेट्रोल-डीजल के दाम पर इसका सीधा असर नहीं दिखेगा.
कितना बढ़ा टैक्स?
सरकार की ओर से जारी अधिसूचना (notification) के मुताबिक तीनों प्रमुख पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ाया गया है.
| फ्यूल | पहले एक्सपोर्ट ड्यूटी | नई एक्सपोर्ट ड्यूटी |
| पेट्रोल | ₹2.5 प्रति लीटर | ₹3.5 प्रति लीटर |
| डीजल | ₹15.5 प्रति लीटर | ₹24 प्रति लीटर |
| ATF | ₹14.5 प्रति लीटर | ₹22 प्रति लीटर |
ये नई दरें केंद्र सरकार की अधिसूचना में तय तारीख से लागू होंगी.
सरकार ने यह फैसला क्यों लिया?
सरकार समय-समय पर वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और रिफाइनिंग से होने वाले मुनाफे की समीक्षा करती है. अगर इंटरनेशनल मार्केट में फ्यूल एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियों को ज्यादा कमाई होने की संभावना रहती है, तो सरकार विंडफॉल टैक्स बढ़ाकर उस अतिरिक्त मुनाफे का एक हिस्सा सरकारी खजाने में लाने की कोशिश करती है. यानी जब विदेशी बाजार में हालात कंपनियों के लिए ज्यादा फायदेमंद होते हैं, तब सरकार इस तरह का टैक्स बढ़ाने का फैसला ले सकती है.
क्या पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ेंगी?
फिलहाल ऐसा नहीं माना जा रहा है. सरकार ने साफ किया है कि यह बदलाव केवल एक्सपोर्ट पर लागू किया गया है. घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी पहले जैसी ही रहेगी. इसलिए इस फैसले का आम ग्राहकों द्वारा पेट्रोल पंप पर चुकाई जाने वाली कीमतों पर कोई सीधा असर नहीं पड़ने की उम्मीद है.
Windfall Tax क्या होता है?
विंडफॉल टैक्स ऐसा टैक्स है जिसे सरकार तब लगाती या संशोधित करती है, जब किसी सेक्टर या कंपनियों को बाजार की अनुकूल परिस्थितियों की वजह से सामान्य से ज्यादा मुनाफा होने लगता है. सरकार वैश्विक कच्चे तेल की कीमत, पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के अंतरराष्ट्रीय दाम और रिफाइनिंग मार्जिन जैसे पहलुओं की नियमित समीक्षा करती है. इन्हीं के आधार पर विंडफॉल टैक्स में समय-समय पर बदलाव किया जाता है. इस बार टैक्स बढ़ाने का संकेत भी यही है कि सरकार को एक्सपोर्ट से होने वाली कमाई मजबूत रहने की उम्मीद दिख रही है.
