Diesel and ATF Windfall Tax: केंद्र सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के एक्सपोर्ट पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में बढ़ोतरी कर दी है, जबकि पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर टैक्स घटा दिया गया है. सरकार के नए टैक्स 16 जुलाई से लागू होंगे. यह फैसला ऐसे समय आया है, जब जुलाई में कच्चे तेल की कीमतों में फिर से तेज उछाल देखने को मिला है.
कितना बदला टैक्स?
मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस की नोटिफिकेशन के अनुसार डीजल और ATF पर टैक्स बढ़ाया गया है, जबकि पेट्रोल पर राहत दी गई है.
| फ्यूल | पहले कितना टैक्स था? | अब कितना टैक्स होगा? |
| डीजल | ₹8.5 प्रति लीटर | ₹15.5 प्रति लीटर |
| ATF | ₹7.5 प्रति लीटर | ₹14.5 प्रति लीटर |
| पेट्रोल | ₹4 प्रति लीटर | ₹2.5 प्रति लीटर |
सरकार ने अचानक टैक्स क्यों बदला?
इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी है.
- जुलाई में ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 17% बढ़ चुकी है.
- इससे पहले अप्रैल, मई और जून लगातार तीन महीनों तक इसमें गिरावट रही थी.
- जून में ब्रेंट क्रूड ने कोविड-19 महामारी के बाद सबसे बड़ी मासिक गिरावट दर्ज की थी.
- लेकिन जुलाई में कीमतों में तेज रिकवरी होने के बाद सरकार ने विंडफॉल टैक्स की समीक्षा कर नए रेट लागू कर दिए.
आखिर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं क्यों?
बुधवार को ब्रेंट क्रूड करीब 2% चढ़कर 84.73 डॉलर प्रति बैरल के एक महीने के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया.
इसके पीछे कई बड़ी वजहें रहीं—
- अमेरिका ने ईरान के खिलाफ फिर से नौसैनिक नाकेबंदी (Naval Blockade) शुरू कर दी.
- इससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई. संघर्ष शुरू होने से पहले दुनिया के करीब 20% कच्चे तेल की आवाजाही इसी समुद्री रास्ते से होती थी.
- तेल टैंकरों पर हमलों और बढ़े भू-राजनीतिक तनाव ने भी कीमतों को ऊपर धकेला.
- रूस से डीजल की सप्लाई कम होने के कारण डीजल रिफाइनिंग मार्जिन बढ़ा, जिससे फ्यूल मार्केट पर दबाव और बढ़ गया.
हालांकि, महंगाई बढ़ने की चिंता और वैश्विक मांग में सुस्ती ने कच्चे तेल की कीमतों में और बड़ी तेजी को सीमित रखा.
क्या पहले ATF सस्ता हुआ था?
हां, 1 जुलाई को सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने ATF की कीमत में करीब ₹5 प्रति लीटर की कटौती की थी. उस समय पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से इंटरनेशनल मार्केट में कच्चा तेल सस्ता हुआ था.
