Import Duty On Raw Cotton : देश के कपड़ा उद्योग (Textile Industry) के लिए एक बड़ी और अच्छी खबर आ रही है. सरकार कच्चे कपास (Raw Cotton) के आयात पर लगने वाले 11 प्रतिशत सीमा शुल्क (Import Duty) को पूरी तरह से हटाने की मांग पर गंभीरता से विचार कर रही है.
एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, इस फैसले को लेकर अलग-अलग मंत्रालयों के बीच बातचीत आखिरी दौर में पहुंच चुकी है और जल्द ही इस पर अंतिम मुहर लग सकती है. घरेलू कपड़ा उद्योग काफी समय से इस टैक्स को हटाने की मांग कर रहा था, ताकि बाजार में कपास की बढ़ती कीमतों और उत्पादन लागत (Production Cost) के बोझ को कम किया जा सके.
मंत्रालयों के बीच बातचीत अंतिम दौर में
इस फैसले को हरी झंडी देने के लिए वित्त मंत्रालय (Finance Ministry), कपड़ा मंत्रालय (Textile Ministry) और कृषि मंत्रालय (Agriculture Ministry) आपस में मिलकर लगातार चर्चा कर रहे हैं. अधिकारी ने बताया, “हम वित्त और कृषि दोनों मंत्रालयों के साथ लगातार संपर्क में हैं.
विचार-विमर्श की प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी है और उम्मीद है कि बहुत जल्द इस पर आखिरी फैसला आ जाएगा.” हाल ही में कपड़ा उद्योग और निर्यातकों (Exporters) के एक ग्रुप ने उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन और कई केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात कर इस मांग को पुरजोर तरीके से उठाया था.
क्यों पड़ी आयात शुल्क हटाने की जरूरत ?
कपड़ा उद्योग के सामने इस समय कच्चे माल (कपास) की भारी कमी और बढ़ती कीमतों का संकट खड़ा हो गया है. आंकड़ों के जरिए समझिए कि समस्या कितनी बड़ी है. चालू वर्ष में देश के कपड़ा उद्योग को लगभग 337 लाख गांठ कपास की जरूरत होने का अनुमान है (बता दें कि कपास की एक गांठ 170 किलोग्राम की होती है). इसके मुकाबले साल 2025-26 के सीजन में देश में सिर्फ 292.15 लाख गांठ कपास आने की ही संभावना है. इस तरह मांग और सप्लाई के बीच करीब 45 लाख गांठ का बड़ा अंतर (कमी) पैदा हो रहा है.
स्पिनिंग मिलों और कपड़ा निर्माताओं पर बढ़ा दबाव
कपास की इस कमी के कारण धागा बनाने वाली स्पिनिंग मिलों और कपड़ा निर्माताओं पर भारी दबाव है. बाजार में अच्छी क्वालिटी वाले कच्चे माल की कमी हो गई है, जिससे फैक्ट्रियों की उत्पादन लागत (लागत खर्च) लगातार बढ़ रही है. यदि सरकार 11% का आयात शुल्क हटा देती है, तो विदेशों से अच्छी क्वालिटी का कच्चा कपास सस्ते दामों पर भारत आ सकेगा. इससे न सिर्फ कपड़ा मिलों को राहत मिलेगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय कपड़ों का दबदबा और निर्यात (Export) भी बढ़ेगा.
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