पेट्रोल-डीजल की ₹3 की बढ़त बढ़ाएगी आफत! दूध, सब्जी से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग तक… अब सब कुछ होगा महंगा

Fuel Price Hike Impact: पेट्रोल-डीजल के दाम ₹3 बढ़ने से सिर्फ गाड़ियां चलाना ही महंगा नहीं हुआ है, बल्कि अब दूध, सब्जी, राशन से लेकर ऑनलाइन डिलीवरी तक सब कुछ महंगा होने जा रहा है. जानिए कहां -कहां जेब होगी ढीली.

Fuel Price Hike Impact: अगर आप सोच रहे हैं कि पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने का असर सिर्फ आपकी गाड़ी के माइलेज या जेब पर पड़ेगा, तो आप बिल्कुल गलत हैं. दरअसल, डीजल के दाम बढ़ने का सीधा मतलब है देश में माल ढुलाई (Freight/Logistics charges) का महंगा होना. चूंकि भारत में सुई से लेकर भारी मशीनों तक, सब कुछ ट्रकों के जरिए एक से दूसरी जगह पहुंचता है, इसलिए ईंधन की महंगाई बहुत जल्द आपके घर के बजट, किराने के बिल और रोजमर्रा की सेवाओं पर दिखने वाली है.

विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले दिनों में इन 7 प्रमुख सेक्टर्स में महंगाई का झटका लग सकता है.

  1. पैकेटबंद फूड और ड्रिंक्स (बिस्कुट, नूडल्स, स्नैक्स) एफएमसीजी (FMCG) : कंपनियों के ऑपरेशनल कॉस्ट (कामकाजी खर्च) का लगभग 6 से 10 फीसदी हिस्सा सिर्फ लॉजिस्टिक्स यानी माल को देश भर में सप्लाई करने में खर्च होता है. बिस्कुट, चिप्स, स्नैक्स, इंस्टेंट नूडल्स और कोल्ड ड्रिंक्स जैसी चीजें बनाने वाली बड़ी कंपनियों ने पहले ही लागत बढ़ने पर चिंता जताई है. मुनाफे को बचाए रखने के लिए कंपनियां जल्द ही पैकेटबंद सामानों के दाम बढ़ा सकती हैं या पैकेट का साइज छोटा कर सकती हैं.
  2. दूध और डेयरी प्रोडक्ट्स (दही, पनीर, चीज, आइसक्रीम): दूध की कीमतों में पहले से ही तेजी का रुख है. हाल ही में अमूल और मदर डेयरी जैसी बड़ी कंपनियों ने परिवहन खर्च बढ़ने का हवाला देकर दूध के दाम 2 रुपये प्रति लीटर बढ़ाए थे. अब डीजल और महंगा होने से दूध से बनने वाले अन्य प्रोडक्ट्स जैसे दही, मक्खन, पनीर, चीज और आइसक्रीम की कीमतों में भी बड़ी बढ़ोतरी होने के पूरे आसार हैं.
  3. फल, सब्जियां और राशन (किराने का बिल) : भारत की खाद्य आपूर्ति श्रृंखला (Food Supply Chain) पूरी तरह से सड़क परिवहन पर निर्भर करती है. खेतों से मंडियों तक और मंडियों से आपके नजदीकी किराना स्टोर तक फल, सब्जियां, अनाज और दालें लाने का ट्रक भाड़ा बढ़ गया है. अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यदि फ्यूल की कीमतें लंबे समय तक इसी ऊंचे स्तर पर रहीं, तो रसोई का बजट काफी ज्यादा बढ़ जाएगा.
  4. खेती की लागत में इजाफा (ग्रामीण इलाकों पर दोहरी मार) : देश के किसान आज भी ट्रैक्टर, सिंचाई पंप, कटाई की मशीनें (Harvesters) और फसल को मंडी तक पहुंचाने वाले वाहनों के लिए डीजल पर ही निर्भर हैं. डीजल महंगा होने से खेती का खर्च (Agricultural Operation Cost) बढ़ जाएगा. इसका सीधा नुकसान ग्रामीण परिवारों को होगा और आगे चलकर अनाज के दाम भी बढ़ेंगे.
  5. ऑनलाइन डिलीवरी और ई-कॉमर्स सर्विस : फ्लिपकार्ट, एमेजॉन जैसी ई-कॉमर्स कंपनियां, जोमैटो-स्वीगी जैसे फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म और कूरियर कंपनियां पूरी तरह लॉजिस्टिक नेटवर्क पर चलती हैं. ईंधन महंगा होने से आखिरी मील की डिलीवरी (Last Mile Delivery) का खर्च बढ़ जाता है. ऐसे में कंपनियां ग्राहकों से ज्यादा डिलीवरी चार्ज वसूल सकती हैं, मुफ्त डिलीवरी के लिए ‘मिनिमम ऑर्डर वैल्यू’ बढ़ा सकती हैं या डिस्काउंट्स कम कर सकती हैं.
  6. पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स (साबुन, शैम्पू, डिटर्जेंट) : आपके नहाने के साबुन, शैम्पू, हैंडवॉश और कपड़े धोने के डिटर्जेंट जैसी चीजें भी महंगी हो सकती हैं. एफएमसीजी कंपनियां अक्सर अचानक दाम बढ़ाने के बजाय संतुलित रणनीति अपनाती हैं, लेकिन लगातार बढ़ते दबाव के कारण वे भी कीमतें बढ़ाने को मजबूर हो सकती हैं.
  7. यात्रा और परिवहन (Travel Cost) : इसका सबसे सीधा असर आपके सफर पर दिखेगा. आने वाले दिनों में ऑटो-टैक्सी का किराया, प्राइवेट बसों का टिकट, कूरियर सेवाएं और खुदरा सामानों की होम डिलीवरी काफी महंगी हो सकती है.

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लेखक के बारे में

By Abhishek pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले तीन वर्षों से प्रभात खबर में डिजिटल जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं। वे बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं। शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, MSME, कृषि और इंडस्ट्री जैसे विषयों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे रिसर्च के साथ ऐसी खबरें और एक्सप्लेनर तैयार करते हैं, जिन्हें आम लोग भी आसानी से समझ सकें। इसके अलावा यूटिलिटी न्यूज और सक्सेस स्टोरीज लिखने में भी उनकी खास रुचि है।

पत्रकारिता अनुभव

अभिषेक ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से की है, जिसे पत्रकारिता की दुनिया में 'दादा माखनलाल की बगिया' भी कहा जाता है।

करियर की शुरुआत उन्होंने राजस्थान पत्रिका के साथ की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा। इसके बाद वे प्रभात खबर से जुड़े और पिछले तीन वर्षों से डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में काम कर रहे हैं।

इस दौरान उन्होंने बिजनेस, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, कृषि, MSME और अर्थव्यवस्था से जुड़े कई अहम विषयों पर रिपोर्टिंग और रिसर्च आधारित लेख लिखे हैं। इसके अलावा वे वीडियो स्क्रिप्टिंग, एक्सप्लेनर स्टोरी, डेटा स्टोरी और डिजिटल कंटेंट पर भी लगातार काम करते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि जटिल आर्थिक और वित्तीय विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों और दर्शकों तक पहुंचाया जाए।

शिक्षा

अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।

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