FPI Selling in India: भारतीय शेयर बाजार के लिए यह हफ्ता काफी उथल-पुथल भरा रहा है. विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारतीय बाजार से अपने हाथ खींचने जारी रखे हैं. नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के आंकड़ों के मुताबिक, इस हफ्ते विदेशी निवेशकों ने कुल 35,475 करोड़ रुपये की बिकवाली की है. यह गिरावट मुख्य रूप से मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और वैश्विक अनिश्चितता के कारण देखी जा रही है.
विदेशी निवेशकों ने कब और कितना पैसा निकाला?
ANI की रिपोर्ट के अनुसार, इस हफ्ते की शुरुआत से ही बिकवाली का दबाव बना रहा है. सोमवार को सबसे ज्यादा 10,827 करोड़ रुपये बाजार से बाहर निकले. मंगलवार को 9,406.78 करोड़ और बुधवार को 4,376.02 करोड़ रुपये की निकासी हुई. गुरुवार को गुड़ी पड़वा की छुट्टी के बाद जब शुक्रवार को बाजार खुला, तो निवेशकों ने फिर से 10,965.74 करोड़ रुपये के शेयर बेच डाले. मार्च 2026 में अब तक कुल निकासी 88,180 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, जो इस साल का सबसे बड़ा आंकड़ा है.
बाजार गिरने के पीछे की असली वजह क्या है?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य संघर्ष और कच्चे तेल (Crude Oil) की आसमान छूती कीमतों ने निवेशकों को डरा दिया है. जब तेल महंगा होता है, तो महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है, जिससे अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ता है. जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख विनोद नायर के कहा कि “हालांकि बीच में थोड़ी रिकवरी दिखी थी, लेकिन नए हमलों की खबर ने बाजार का मूड फिर खराब कर दिया.”
क्या होता है FPI और इसे ‘हॉट मनी’ क्यों कहते हैं?
FPI का मतलब है जब विदेशी लोग या कंपनियां भारत के शेयर, बॉन्ड या म्यूचुअल फंड में पैसा लगाते हैं. इन्हें ‘हॉट मनी’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि ये निवेशक बहुत कम समय में मुनाफा कमाकर पैसा निकाल लेते हैं. ये किसी कंपनी को चलाने में दिलचस्पी नहीं रखते, बल्कि बाजार की स्थिति देखकर तुरंत अपना पैसा एक देश से दूसरे देश ले जाते हैं. भारत में इन पर सेबी (SEBI) की नजर रहती है.
अब आगे क्या होने वाला है?
फिलहाल विदेशी निवेशक वेट एंड वॉच की नीति अपना रहे हैं. आने वाले दिनों में भारतीय बाजार की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि मिडिल ईस्ट का तनाव कम होता है या नहीं और कच्चे तेल की कीमतें कहां जाकर रुकती हैं.
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