सैलरी आते ही हो जाती है छूमंतर? अपनाएं ये ‘जादुई फॉर्मूला’, EMI और खर्चों की टेंशन होगी खत्म!

Financial Planning : क्या महीने के आखिर में आपकी जेब भी खाली हो जाती है? जानें 50-30-20 का वो जादुई फॉर्मूला, जो आपकी सैलरी को मैनेज कर आपको अमीर बनाने की राह पर ले जाएगा.

Financial Planning : अक्सर महीने की 1 तारीख को जब मोबाइल पर ‘Salary Credited’ का मैसेज आता है, तो चेहरे पर मुस्कान होती है. लेकिन 10 तारीख आते-आते किराया, बिजली बिल, बच्चों की स्कूल फीस और पुरानी EMI उस मुस्कान को चिंता में बदल देती हैं.

अगर आपके साथ भी ऐसा होता है कि ‘पैसा आता तो है, पर जाता कहां है पता नहीं चलता’, तो यकीन मानिए आप अकेले नहीं हैं. फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स एक बहुत ही आसान तरीका बताते हैं जिसे 50-30-20 का फॉर्मूला कहते हैं. यह कोई रॉकेट साइंस नहीं है, बल्कि आपकी जेब को खुश रखने का एक देसी नुस्खा है. आइए समझते हैं इसे आसान भाषा में.

क्या है यह 50-30-20 का गणित ?

अपनी कुल इन-हैंड सैलरी (टैक्स कटने के बाद जो हाथ में आए) को तीन लिफाफों में बांट लीजिए:

  • 50% ‘मजबूरी’ (Needs): आपकी सैलरी का आधा हिस्सा उन चीजों पर जाना चाहिए जिनके बिना गुजारा मुमकिन नहीं है. जैसे- घर का राशन, किराया, पानी-बिजली का बिल और जरूरी EMI.
  • 30% ‘मस्ती’ (Wants): यह हिस्सा आपके शौक के लिए है. बाहर डिनर पर जाना, नेटफ्लिक्स का सब्सक्रिप्शन, नई शर्ट या वेकेशन. जीना भी तो जरूरी है!
  • 20% मजबूती’ (Savings & Investment): यह आपके भविष्य की तिजोरी है. इसमें से पैसा SIP, पीपीएफ या इमरजेंसी फंड में जाना चाहिए.

किराए और EMI का ‘लोचा’ कैसे सुलझाएं ?

सबसे ज्यादा सिरदर्द किराया और बैंक की किस्तें (EMI) ही देती हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि

  • किराया: आपकी सैलरी के 25-30% से ज्यादा नहीं होना चाहिए. अगर आप 50,000 कमाते हैं, तो 15,000 से ऊपर का घर आपकी बचत को ‘खा’ जाएगा.
  • EMI: सभी लोन की किस्तें मिलाकर आपकी आय का 30-40% पार नहीं करनी चाहिए. अगर इससे ज्यादा जा रहा है, तो समझ लीजिए आप कर्ज के जाल में फंस रहे हैं.

SIP: छोटे निवेश का बड़ा धमाका

आजकल लोग SIP (Systematic Investment Plan) की बात बहुत करते हैं, और क्यों न करें? अगर आप 25 साल की उम्र से सिर्फ 5,000 रुपये महीना बचाकर सही जगह निवेश करते हैं, तो रिटायरमेंट तक आप करोड़ों के मालिक हो सकते हैं. यह कंपाउंडिंग की ताकत है. यानी आपके पैसे पर मिलने वाले ब्याज पर भी ब्याज.

मुश्किल वक्त के लिए इमरजेंसी फंड

जैसे बारिश से बचने के लिए छतरी चाहिए, वैसे ही लाइफ की अनहोनी के लिए हेल्थ इंश्योरेंस और टर्म इंश्योरेंस जरूरी है. साथ ही, अपने पास कम से कम 6 महीने के खर्च के बराबर पैसा अलग से रखें (इमरजेंसी फंड), ताकि नौकरी जाने या किसी इमरजेंसी में आपको किसी के आगे हाथ न फैलाना पड़े.

Also Read : सरकारी कर्मचारियों और मजदूरों की बढ़ी न्यूनतम मजदूरी, जानें अब हर दिन कितने रुपये मिलेंगे

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Abhishek pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले तीन वर्षों से प्रभात खबर में डिजिटल जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं। वे बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं। शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, MSME, कृषि और इंडस्ट्री जैसे विषयों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे रिसर्च के साथ ऐसी खबरें और एक्सप्लेनर तैयार करते हैं, जिन्हें आम लोग भी आसानी से समझ सकें। इसके अलावा यूटिलिटी न्यूज और सक्सेस स्टोरीज लिखने में भी उनकी खास रुचि है।

पत्रकारिता अनुभव

अभिषेक ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से की है, जिसे पत्रकारिता की दुनिया में 'दादा माखनलाल की बगिया' भी कहा जाता है।

करियर की शुरुआत उन्होंने राजस्थान पत्रिका के साथ की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा। इसके बाद वे प्रभात खबर से जुड़े और पिछले तीन वर्षों से डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में काम कर रहे हैं।

इस दौरान उन्होंने बिजनेस, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, कृषि, MSME और अर्थव्यवस्था से जुड़े कई अहम विषयों पर रिपोर्टिंग और रिसर्च आधारित लेख लिखे हैं। इसके अलावा वे वीडियो स्क्रिप्टिंग, एक्सप्लेनर स्टोरी, डेटा स्टोरी और डिजिटल कंटेंट पर भी लगातार काम करते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि जटिल आर्थिक और वित्तीय विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों और दर्शकों तक पहुंचाया जाए।

शिक्षा

अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >