परिवार में किसी की मृत्यु के बाद तुरंत निपटाएं ये 10 जरूरी काम, वरना फंस सकते हैं आपके पैसे

Financial Nominee Rules : परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु के बाद उनके वित्तीय और कानूनी दस्तावेजों को संभालना एक बड़ी जिम्मेदारी होती है. मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त करने के बाद बैंक खातों, पैन कार्ड, बीमा पॉलिसियों और अन्य निवेशों को सही समय पर अपडेट या बंद करवाना क्यों जरूरी है और इसकी क्या प्रक्रिया है, आइए विस्तार से जानते हैं.

Financial Nominee Rules : घर के किसी सदस्य के निधन के बाद दुख के साथ कई जरूरी काम भी करने पड़ते हैं. बैंक खाते, पैन कार्ड, बीमा पॉलिसी और निवेश से जुड़े रिकॉर्ड समय पर अपडेट या बंद कराना जरूरी है. ऐसा करने से भविष्य में किसी तरह की धोखाधड़ी या कानूनी परेशानी से बचा जा सकता है. आइए विस्तार से जानते हैं 10 जरूरी काम .

  1. सबसे पहला और अनिवार्य दस्तावेज: मृत्यु प्रमाण पत्र

किसी भी कानूनी या वित्तीय प्रक्रिया को शुरू करने के लिए ‘मृत्यु प्रमाण पत्र’ (Death Certificate) सबसे बुनियादी और महत्वपूर्ण दस्तावेज है. परिवार के सदस्य की मृत्यु के तुरंत बाद स्थानीय नगर निगम, ग्राम पंचायत या संबंधित सरकारी प्राधिकरण से इसे प्राप्त करना आपकी सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए. इसके बिना आगे की कोई भी प्रक्रिया संभव नहीं है.

  1. पहचान पत्र और डिजिटल रिकॉर्ड (जैसे आधार कार्ड)

आज के समय में आधार कार्ड लगभग हर सरकारी योजना, बैंक खाते और पहचान से जुड़ा हुआ है. यूआईडीएआई (UIDAI) भी समय-समय पर यह सलाह देता है कि मृत व्यक्ति के आधार नंबर का दुरुपयोग रोकने के लिए उचित कदम उठाए जाने चाहिए. अगर यह पहचान पत्र एक्टिव रहता है, तो इसके डेटा के गलत इस्तेमाल या फ्रॉड की आशंका हमेशा बनी रहती है.

  1. पैन कार्ड (PAN Card) और टैक्स रिकॉर्ड

यदि मृत व्यक्ति के नाम पर कोई बैंक खाता, निवेश या इनकम टैक्स रिकॉर्ड मौजूद है, तो उनके पैन कार्ड से जुड़े मामलों को जल्द से जल्द सुलझाना चाहिए. कानूनी उत्तराधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आयकर विभाग (Income Tax Department) में मृत व्यक्ति का कोई टैक्स बकाया न हो. सभी पेंडिंग रिटर्न दाखिल करने के बाद पैन कार्ड को सरेंडर करने की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है.

  1. बैंक खाते, एफडी और आरडी का निपटान

मृत व्यक्ति के सभी बैंक खातों, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और रेकरिंग डिपॉजिट (RD) की जानकारी जुटाना बेहद आवश्यक है. संबंधित बैंक शाखा में मृत्यु प्रमाण पत्र और नॉमिनी के दस्तावेज जमा करके खाते को बंद करने या बची हुई रकम को नॉमिनी/कानूनी उत्तराधिकारी के खाते में ट्रांसफर करने की प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए.

  1. बीमा पॉलिसी (Insurance Claim)

अगर उस व्यक्ति के नाम पर कोई जीवन बीमा (Life Insurance), स्वास्थ्य बीमा (Health Insurance) या दुर्घटना बीमा पॉलिसी थी, तो परिवार को बिना देरी किए बीमा कंपनी से संपर्क करना चाहिए. याद रखें कि कई कंपनियों में क्लेम (Claim) दर्ज करने की एक निश्चित समय-सीमा होती है, इसलिए इस काम में देरी करने से आपका क्लेम खारिज भी हो सकता है.

  1. निवेश और डीमैट खाते (Investments & Demat Accounts)

शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड, बॉन्ड, पीपीएफ (PPF) और एनपीएस (NPS) जैसे निवेशों की जानकारी एकत्र करें. यदि खातों में नॉमिनी का नाम दर्ज है, तो आवश्यक दस्तावेज जमा करके इन निवेशों को उत्तराधिकारी के नाम पर आसानी से ट्रांसफर कराया जा सकता है.

  1. मोबाइल नंबर और ईमेल अकाउंट (Digital Security)

आजकल लगभग सभी वित्तीय ट्रांजैक्शन और बैंकिंग सेवाएं मोबाइल नंबर और ईमेल से जुड़ी होती हैं. ओटीपी (OTP) आधारित किसी भी धोखाधड़ी से बचने के लिए मृत व्यक्ति के मोबाइल कनेक्शन को सुरक्षित तरीके से बंद कराएं या उसे अपने नियंत्रण में लें. इसी तरह उनके ईमेल अकाउंट्स को भी सुरक्षित रूप से प्रबंधित या निष्क्रिय करना जरूरी है.

  1. वाहन रिकॉर्ड और ड्राइविंग लाइसेंस

यदि मृत व्यक्ति के नाम पर कोई दोपहिया या चारपहिया वाहन रजिस्टर्ड है, तो क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) के नियमों के अनुसार वाहन का मालिकाना हक (Ownership) उत्तराधिकारी के नाम ट्रांसफर करवाना चाहिए. इसके साथ ही उनके ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़े रिकॉर्ड को भी अपडेट कराना आवश्यक है.

  1. घरेलू उपयोगिता सेवाएं (गैस, बिजली, पानी)

एलपीजी गैस कनेक्शन, बिजली का मीटर, पानी का कनेक्शन और अन्य घरेलू उपयोगिता सेवाओं को भी समय रहते परिवार के जीवित सदस्य या उत्तराधिकारी के नाम पर ट्रांसफर करवा लेना चाहिए. ऐसा करने से भविष्य में बिल भुगतान या मालिकाना हक को लेकर कोई विवाद नहीं होता है.

  1. संपत्ति और अन्य कानूनी दस्तावेज (Property & Will)

यदि मृत व्यक्ति के नाम पर कोई मकान, दुकान, जमीन या अन्य अचल संपत्ति है, तो उत्तराधिकार प्रमाण पत्र (Succession Certificate) या वसीयत (यदि उपलब्ध हो) की मदद से स्वामित्व परिवर्तन यानी म्यूटेशन (Mutation) की कानूनी प्रक्रिया जल्द से जल्द शुरू कर देनी चाहिए ताकि भविष्य में संपत्ति से जुड़े दावों में कोई दिक्कत न आए.

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Published by: Abhishek Pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।

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