Economic Survey: सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी घटाने के लिए कानून बदलने की सिफारिश

Economic Survey: आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, सरकार ‘सरकारी कंपनी’ की परिभाषा बदलकर न्यूनतम हिस्सेदारी 51% से घटाकर 26% कर सकती है. इससे सरकार को विशेष अधिकार रखते हुए शेयर बेचकर फंड जुटाने में मदद मिलेगी. इस पैसे का उपयोग भविष्य की नई तकनीकों और रणनीतिक क्षेत्रों में निवेश के लिए किया जाएगा.

Economic Survey: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा 29 जनवरी को आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पेश किया गया , इस सर्वे का मुख्य जोर इस बात पर है कि सरकार को अब अपनी कंपनियों में सिर्फ “मालिक” बनकर रहने के बजाय एक “रणनीतिक निवेशक” की भूमिका निभानी चाहिए. आज के बदलते दौर में, सरकार अपनी संपत्तियों का सही मूल्य निकालने (Monetisation) और उस पैसे को भविष्य की नई तकनीकों में लगाने की योजना बना रही है. इसके लिए कानून में बदलाव से लेकर कंपनियों को ज्यादा आजादी देने तक के कई साहसी सुझाव दिए गए हैं, ताकि देश की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार मिल सके.

क्यों पड़ी इसकी जरूरत?

अभी सरकार के सामने एक बड़ी दिक्कत है. लगभग 30% लिस्टेड सरकारी कंपनियों (CPSEs) में सरकार का हिस्सा पहले से ही 60% से नीचे आ चुका है. अगर सरकार 51% वाला नियम मानती है, तो वह अब और ज्यादा शेयर नहीं बेच सकती. इस नियम को बदलने से सरकार को शेयर बाजार के जरिए और पैसा (Equity Monetisation) जुटाने में मदद मिलेगी.

कंट्रोल भी रहेगा और कमाई भी होगी

सर्वे में कही गई है कि “कंपनी चलाने के लिए मालिक होना जरूरी है, पर 51% शेयर होना जरूरी नहीं.”
अगर सरकार के पास 26% हिस्सा भी रहता है, तो भी वह कंपनी के बड़े फैसलों को कंट्रोल कर सकती है. इससे सरकार का रणनीतिक कंट्रोल (Strategic Control) भी बना रहेगा और वह अपनी हिस्सेदारी बेचकर फंड भी बढ़ा सकेगी.

निजीकरण (Privatization) का दूसरा रास्ता

अगर सरकार का मकसद कंपनी को पूरी तरह प्राइवेट करना है, तो उसे कानून बदलने की जरूरत नहीं है. सर्वे कहता है कि सरकार धीरे-धीरे अपने शेयर बेचकर कंपनी से पूरी तरह बाहर निकल सकती है. इससे वह कंपनी एक प्रोफेशनल तरीके से चलने वाली प्राइवेट संस्था बन जाएगी, जिसका मैनेजमेंट और काम करने का तरीका पारदर्शी होगा.

कमाए हुए पैसे का क्या होगा?

सर्वे में यह भी सुझाव दिया गया है कि सरकारी कंपनियों को बेचकर जो पैसा आएगा, उसे भविष्य की तकनीकों में लगाया जाए. इस पैसे को National Investment and Infrastructure Fund (NIIF) जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए नई टेक्नोलॉजी और इनोवेशन वाली कंपनियों में निवेश किया जा सकता है. इसे ‘कैपिटल रिसाइक्लिंग’ कहा जा रहा है, यानी पुरानी जगह से पैसा निकालकर भविष्य के सेक्टर्स में लगाना.

साल 2016 से अब तक 36 सरकारी कंपनियों के विनिवेश (Disinvestment) को मंजूरी मिली है, जिनमें से 13 का काम पूरा हो चुका है. सरकार ने अब सरकारी कंपनियों के बोर्ड को भी ज्यादा ताकत दे दी है ताकि वे खुद अपनी छोटी कंपनियों (Subsidiaries) को बंद करने या बेचने का फैसला ले सकें.

Also Read: अमेरिका के साथ ट्रेड डील फाइनल होने के करीब!इकोनॉमिक सर्वे में भारत की ग्लोबल प्लानिंग का खुलासा

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Abhishek pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले तीन वर्षों से प्रभात खबर में डिजिटल जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं। वे बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं। शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, MSME, कृषि और इंडस्ट्री जैसे विषयों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे रिसर्च के साथ ऐसी खबरें और एक्सप्लेनर तैयार करते हैं, जिन्हें आम लोग भी आसानी से समझ सकें। इसके अलावा यूटिलिटी न्यूज और सक्सेस स्टोरीज लिखने में भी उनकी खास रुचि है।

पत्रकारिता अनुभव

अभिषेक ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से की है, जिसे पत्रकारिता की दुनिया में 'दादा माखनलाल की बगिया' भी कहा जाता है।

करियर की शुरुआत उन्होंने राजस्थान पत्रिका के साथ की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा। इसके बाद वे प्रभात खबर से जुड़े और पिछले तीन वर्षों से डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में काम कर रहे हैं।

इस दौरान उन्होंने बिजनेस, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, कृषि, MSME और अर्थव्यवस्था से जुड़े कई अहम विषयों पर रिपोर्टिंग और रिसर्च आधारित लेख लिखे हैं। इसके अलावा वे वीडियो स्क्रिप्टिंग, एक्सप्लेनर स्टोरी, डेटा स्टोरी और डिजिटल कंटेंट पर भी लगातार काम करते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि जटिल आर्थिक और वित्तीय विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों और दर्शकों तक पहुंचाया जाए।

शिक्षा

अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >