Economic Survey 2025-26: पार्लियामेंट में पेश हुई ताजा इकोनॉमिक सर्वे रिपोर्ट ने साफ कर दिया है कि अब खेती सिर्फ हल चलाने तक सीमित नहीं रह गई है. फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने बताया कि कैसे अलग-अलग राज्यों ने अपनी स्मार्ट सोच और नई टेक्नोलॉजी से किसानी का चेहरा बदल दिया है. यह बदलाव केवल कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन पर दिख रहा है, जहां ड्रोन से लेकर ऐप्स तक का बोलबाला है.
क्या ड्रोन और GIS से मिटेगी जमीन की खींचतान?
आंध्र प्रदेश ने अपनी ‘पुनः समीक्षा योजना-2021’ के जरिए दिखा दिया कि ड्रोन और जीआईएस (GIS) तकनीक से जमीनी विवाद सुलझाना कितना आसान है. 2025 तक उन्होंने करीब 6901 गांवों की जमीन का हिसाब डिजिटल कर दिया, जिससे 86 हजार बाड़ विवाद खत्म हो गए. वहीं बिहार ने भी अपनी ‘चौड़ विकास योजना’ से कमाल कर दिया है. वहां बेकार पड़ी जलमग्न भूमि (चौड़) पर अब मछली पालन हो रहा है, जिससे 22 जिलों की 1933 हेक्टेयर जमीन का अब बेस्ट इस्तेमाल हो रहा है.
क्या सोलर पंप से खेतों में आई हरियाली की नई लहर?
मध्य प्रदेश ने ‘सौदा पत्रक’ पहल से किसानों को सीधा एमएसपी का फायदा दिया है, जिससे मंडियों के चक्कर और हेराफेरी कम हुई है. दिसंबर 2025 तक इसके जरिए 1 लाख 3 हजार से ज्यादा डील्स हुईं है. पानी की बात करें तो असम ने सोलर पंप और नई सिंचाई योजनाओं से सिंचित जमीन को 24.28% तक बढ़ा दिया है. उत्तर प्रदेश ने भी अपने सख्त भू-जल नियमों से गिरते वाटर लेवल को संभालने में सफलता पाई है.
क्या खेती अब ऐप्स और डेटा से होगी?
जी बिल्कुल, कर्नाटक का ‘FRUITS’ प्लेटफॉर्म इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जहां 55 लाख किसानों का डेटा एक ही जगह है. झारखंड भी अब जीआईएस बेस्ड ‘क्लाइमेट स्मार्ट खेती’ कर रहा है, ताकि मौसम की मार से बचा जा सके. बिहार का चौथा ‘कृषि रोडमैप’ भी दूध और मछली के प्रोडक्शन में नए रिकॉर्ड बना रहा है. साफ है कि अब यंग इंडिया के लिए खेती घाटे का सौदा नहीं, बल्कि एक हाई-टेक बिजनेस बनने की राह पर है.
