Delhi: दिल्ली के लोग अपनी छत पर सोलर पैनल लगवाकर बिजली का बिल जीरो कर सकते हैं और कमाई भी कर सकते हैं. घर के मालिक और ग्रुप हाउसिंग सोसायटी वाले रूफटॉप सोलर लगवाने करके हर माह 300 रुपये से लेकर 81,247 रुपये तक कमा सकते हैं. सोचिए, दिल्ली के घर के मालिक अपने छत पर सोलर लगाकर न सिर्फ बिजली बिल को शून्य कर सकते हैं, बल्कि हर महीने ₹300 से लेकर ₹81,247 तक की कमाई भी कर सकते हैं. छोटी छतों वाले घर के मालिक लगभग 300 रुपये प्रति माह कमा सकते हैं, जबकि बड़ी ग्रुप हाउसिंग सोसायटी या व्यवसायिक प्रतिष्ठान 81,247 रुपये प्रति माह तक कमा सकते हैं, यह बिजली उत्पादन और खपत पर निर्भर करता है. यह सब संभव है सरकार की नई रूफटॉप सोलर योजना के तहत. 3 किलोवॉट तक के सोलर लगवाने पर 5 साल तक सरकार उनका रखरखाव मुफ्त में करेगी.
सरकार का बड़ा ऐलान: 2.30 लाख घरों पर लगेगा सोलर
सरकार की इसी योजना के तहत, बड़े पैमाने पर सोलर पावर उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है. CM रेखा गुप्ता ने कहा कि 31 मार्च 2027 तक हमारा लक्ष्य 500 मेगावॉट अतिरिक्त बिजली बनाना है. इस दौरान कुल 2.30 लाख घरों की छतों पर सोलर लगाया जाएगा, जिसका पूरा खर्च सरकार उठाएगी. शुरुआती लागत के कारण लोग इसमें रुचि नहीं दिखा रहे थे. इसलिए सरकार ने केंद्र सरकार के 78 हजार की सब्सिडी के अलावा दिल्ली सरकार ने बिजली बनाने पर मिलने वाले इनाम को पांच साल तक पहले देने का फैसला किया है, जिससे 78 हजार रुपये की सब्सिडी अब दिल्ली सरकार भी देगी.
₹6.50 प्रति यूनिट इंसेंटिव: अतिरिक्त बिजली बनाने पर पाएं बंपर कमाई
CM ने बताया कि अब रूफटॉप सोलर लगाने के बाद अगर कोई अतिरिक्त बिजली बनाता है तो उसे 6.5 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से इंसेंटिव मिलेगा. इसके अलावा बिजली बचाने पर कुल इंसेंटिव का 50 फीसदी अतिरिक्त इंसेंटिव दिया जाएगा. उदाहरण के लिए कोई अगर 100 यूनिट अतिरिक्त बिजली बनाता है तो उसे 6.50 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से 650 रुपये का बिजली बनाने पर मिलने वाला इनाम मिलेगा. उसपर भी 50 फीसदी अतिरिक्त यानी 300 अतिरिक्त और मिलेंगे. अगर 3 किलोवॉट का कनेक्शन है तो कुल 950 रुपये की कमाई कर सकते हैं.
बिजली सब्सिडी रहेगी जारी
CM रेखा गुप्ता ने कहा कि सोलर पॉलिसी में संशोधन का असर बिजली सब्सिडी पर नहीं पड़ेगा. ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि सबसे अच्छी बात यह है कि इस योजना के तहत, आपकी छत पर रूफटॉप सोलर बिना किसी शुरुआती लागत के लगाया जाएगा. सरकार आपकी जेब से एक भी रुपया खर्च किए बिना यह सुविधा प्रदान कर रही है. इस योजना में कुल 2000 करोड़ रुपये के खर्च का अनुमान है लेकिन हम चार साल में उत्पादन से इस लागत को वसूल लेंगे.
