Delhi Govt Yamuna Boats: यमुना की सफाई दिल्ली की राजनीति का हमेशा से एक बड़ा मुद्दा रही है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और दिल्ली सरकार ने इसे अपने चुनावी वादों में भी प्रमुखता से शामिल किया था. अब खबर आ रही है कि इस सफाई अभियान की निगरानी को हाई-टेक और आरामदायक बनाने के लिए सरकार 6 करोड़ 20 लाख रुपये की लागत से दो बेहद आधुनिक और एयरकंडीशंड (AC) नावें खरीदने की तैयारी में है.
क्या है पूरा मामला ?
हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली सरकार के ‘सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग’ (I&FC) ने 12 मार्च को इन नावों के लिए टेंडर जारी किया है. इन नावों का मुख्य उद्देश्य VIP और VVIP मेहमानों द्वारा यमुना की सफाई की निगरानी करना बताया जा रहा है.
- कुल बजट: ₹6.20 करोड़ (एक नाव की कीमत करीब ₹3.10 करोड़).
- टेंडर की तारीख: 19 मार्च तक प्रक्रिया चलेगी.
- समय सीमा: टेंडर फाइनल होने के बाद नावों को आने में लगभग 5 महीने लगेंगे.
चलती-फिरती ‘लग्जरी’ होंगी ये नावें
ये नावें केवल निगरानी के लिए नहीं, बल्कि सुख-सुविधाओं से भी लैस होंगी. टेंडर डॉक्यूमेंट के मुताबिक इनकी खासियतें कुछ इस प्रकार हैं.
- क्षमता और आकार: एक नाव में 16 से 20 लोग बैठ सकेंगे. इसकी लंबाई 13 मीटर और चौड़ाई 4.3 मीटर होगी.
- बिजनेस क्लास का अहसास: केबिन के अंदर ‘बिजनेस क्लास’ जैसी आरामदायक पुश-बैक सीटें होंगी.
- सुविधाएं: पूरी तरह एयरकंडीशंड केबिन, खाना सर्व करने के लिए एक अलग पेंट्री (रसोई), आधुनिक वॉशरूम और 400 लीटर ताजे पानी के स्टोरेज की व्यवस्था.
- ओपन डेक: नाव के पिछले हिस्से में एक खुला डेक होगा, जहाँ सोफे लगे होंगे ताकि वीआईपी खुले आसमान के नीचे बैठकर निरीक्षण कर सकें.
- दमदार इंजन: इसमें 300 HP के शक्तिशाली इंजन और बिजली के लिए अलग से डीजल जेनरेटर होगा. इसकी रफ़्तार 25 समुद्री मील (Nautical Miles) तक हो सकती है.
सरकार का तर्क: निगरानी और रेस्क्यू में आएगी तेजी
वर्तमान में सिंचाई विभाग को जब भी निरीक्षण, मानसून की निगरानी या छठ पूजा जैसे त्योहारों पर सर्वे करना होता है, तो वे किराए पर नावें लेते हैं. विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सरकार यमुना की सफाई को लेकर बेहद गंभीर है और मंत्री व अन्य बड़े अधिकारी लगातार दौरा करते रहते हैं.
अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि इन नावों का इस्तेमाल सिर्फ दौरों के लिए ही नहीं, बल्कि आपातकालीन स्थिति में रेस्क्यू ऑपरेशन (बचाव कार्य) के लिए भी किया जा सकेगा. पिछले महीने जारी हुई विभाग की वार्षिक रिपोर्ट में बताया गया था कि उपराज्यपाल (LG) के निरीक्षण दौरों के लिए भी किराए की नौकाओं का ही इस्तेमाल किया गया था. अब अपनी खुद की ‘VVIP’ नावें होने से विभाग को किराए की निर्भरता से मुक्ति मिलेगी, हालांकि 6 करोड़ से ज्यादा का यह खर्च अब चर्चा का विषय बन गया है.
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