कच्चे तेल की कीमतों में गुरुवार को गिरावट देखने को मिली. कमजोर वैश्विक मांग के अनुमान और अमेरिका में बढ़ते कच्चे तेल के भंडार ने कीमतों पर दबाव बनाया. हालांकि, मिडिल ईस्ट में अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच सप्लाई को लेकर चिंता और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के दोबारा खुलने को लेकर अनिश्चितता ने गिरावट को सीमित रखा.
ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 1.4% गिरकर 87.73 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड की कीमत 1.53% घटकर 82 डॉलर प्रति बैरल रही.
तेल की कीमतों पर क्यों पड़ा दबाव?
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट की सबसे बड़ी वजह कमजोर वैश्विक मांग का अनुमान है. तेल उत्पादक देशों के संगठन OPEC ने 2026 के लिए दुनिया में तेल की मांग बढ़ने का अनुमान घटाकर रोजाना 5.80 लाख बैरल कर दिया है. इसके अलावा, अमेरिका में कच्चे तेल का भंडार बढ़ने से भी बाजार पर दबाव बना. जब मांग कमजोर रहने की आशंका हो और सप्लाई उपलब्ध हो, तो तेल की कीमतों पर असर पड़ना स्वाभाविक है.
OPEC ने मांग का अनुमान क्यों घटाया?
OPEC के ताजा अनुमान से संकेत मिलता है कि 2026 में दुनिया में तेल की खपत पहले लगाए गए अनुमान के मुकाबले कम रफ्तार से बढ़ सकती है. मांग में कमजोरी की आशंका बाजार के लिए अहम है, क्योंकि इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ता है. यानी अभी तेल बाजार में एक तरफ कमजोर मांग का दबाव है, तो दूसरी तरफ मिडिल ईस्ट से सप्लाई को लेकर चिंता बनी हुई है.
ये भी पढ़ें: महंगाई ने फिर बढ़ाई टेंशन, जुलाई में CPI 4.45%, 19 महीने के हाई पर महंगाई
अमेरिका-ईरान बातचीत का क्या असर है?
अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता में फिलहाल कोई खास प्रगति नहीं हुई है. एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने Reuters को बताया कि जून में हुए अंतरिम समझौते को फिर से लागू करने और उसे अमल में लाने की समयसीमा तय करने को लेकर बातचीत आगे नहीं बढ़ी है. इस गतिरोध ने बाजार की चिंता बढ़ाई है. अगर बातचीत में प्रगति नहीं होती है, तो मिडिल ईस्ट से कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बनी रह सकती है.
होर्मुज और बाब-अल-मंदेब क्यों अहम हैं?
मंगलवार को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट में जहाजों पर हुए हमलों ने भी तेल सप्लाई से जुड़े खतरे को सामने रखा है. इन घटनाओं के कारण बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता बनी हुई है. यही वजह है कि कमजोर मांग और बढ़ते अमेरिकी भंडार के बावजूद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ज्यादा तेज नहीं हुई.
क्रूड की कीमतों का सीधा असर क्यों मायने रखता है?
कच्चा तेल भारत के लिए अहम है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों में लगातार बदलाव का असर आगे चलकर फ्यूल की कीमतों और आम लोगों के खर्च पर पड़ सकता है. फिलहाल बाजार की नजर OPEC के मांग अनुमान, अमेरिका-ईरान बातचीत और मिडिल ईस्ट में सप्लाई की स्थिति पर बनी हुई है.
ये भी पढ़ें: लोन लेने वालों के लिए RBI का नया फरमान, ब्याज दर से लेकर EMI तक बदल सकता है पूरा हिसाब
