Crude Oil Price: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के खत्म होने की उम्मीद से ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से गिरी हैं. दोनों देशों के बीच एक संभावित शांति समझौते की खबरों के बाद ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 5% से ज्यादा टूटकर 100 डॉलर के साइकोलॉजिकल लेवल से नीचे आ गया है. रविवार शाम को यह 98 डॉलर के इंट्राडे लो तक पहुंच गया, जबकि शुक्रवार को यह 101 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बंद हुआ था. सोमवार सुबह एशियाई बाजारों में ब्रेंट क्रूड 99.27 डॉलर और अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 92.30 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था.
कच्चे तेल के दाम अचानक क्यों गिरे?
इस गिरावट की मुख्य वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह बयान है, जिसमें उन्होंने ईरान के साथ बातचीत में प्रगति होने की बात कही है. हालांकि, ट्रंप ने सोशल मीडिया (ट्रुथ सोशल) पर यह भी साफ किया कि वे जल्दबाजी में कोई डील नहीं करेंगे क्योंकि समझौता अभी पूरी तरह तय नहीं हुआ है. इसके बावजूद बाजार में पाजिटिव संदेश गया है कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज का रास्ता जल्द ही पूरी तरह खुल सकता है, जिससे दुनिया भर में तेल की सप्लाई फिर से सामान्य हो जाएगी.
क्या हॉर्मुज स्ट्रेट से पाबंदियां हट गईं?
फिलहाल अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज की नाकेबंदी नहीं हटाई है और फॉर्मल समझौते तक पाबंदियां जारी रहेंगी. लेकिन जहाजों की आवाजाही में ढील दिखने लगी है. शिप-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, चीन जा रहा एक इराकी कच्चे तेल का टैंकर और भारत आ रहा एक एलएनजी (LNG) टैंकर इस रास्ते से सुरक्षित निकले हैं. ईरान की तस्नीम न्यूज एजेंसी का दावा है कि उनके रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की अनुमति से 33 जहाजों ने इस वॉटरवेज को पार किया है.
इस गिरावट का दुनिया पर क्या असर होगा?
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से दुनिया का लगभग 20% तेल और एलएनजी गुजरता है. इस रास्ते के खुलने से चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे एशियाई देशों को सबसे बड़ी राहत मिलेगी, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए मिडल ईस्ट पर निर्भर हैं. डोनाल्ड ट्रंप के मुख्य आर्थिक सलाहकार केविन हैसेट के अनुसार, डील होते ही तेल की कीमतें और नीचे आ सकती हैं, जिससे ग्लोबल लेवल पर महंगाई कम होगी और अमेरिकी फेडरल रिजर्व को ब्याज दरों में कटौती करने का मौका मिलेगा.
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