कच्चे तेल की कीमतों में बुधवार को एक बार फिर तेज उछाल देखने को मिला. शुरुआती कारोबार में ब्रेंट क्रूड 3.2% बढ़कर 86.80 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड 3.4% चढ़कर 81.95 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा. मंगलवार को आई गिरावट के बाद यह तेजी ऐसे समय आई है जब अमेरिका में कच्चे तेल का भंडार घटा है और OPEC+ की उत्पादन नीति को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है.
तेल की कीमतें अचानक क्यों बढ़ीं?
बाजार में तेजी की वजह अमेरिका के कच्चे तेल के स्टॉक में आई गिरावट रही. अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट (API) के आंकड़ों के मुताबिक, 24 जुलाई को खत्म हुए सप्ताह में अमेरिकी क्रूड स्टॉक करीब 33 लाख बैरल कम हुआ.
हालांकि दूसरी तरफ,
- गैसोलीन का स्टॉक 9.18 लाख बैरल बढ़ा
- डिस्टिलेट (डीजल समेत अन्य ईंधन) का स्टॉक 3.55 लाख बैरल बढ़ा
अब निवेशकों की नजर बुधवार को आने वाले अमेरिकी Energy Information Administration (EIA) के आधिकारिक आंकड़ों पर रहेगी.
OPEC+ का फैसला क्यों बना बाजार का बड़ा फैक्टर?
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, OPEC+ अक्टूबर से तीन महीने तक तेल उत्पादन बढ़ाने की योजना रोक सकता है. अगर ऐसा होता है तो बाजार में सप्लाई बढ़ने की रफ्तार धीमी पड़ सकती है, जिससे कीमतों को सहारा मिल सकता है. फिलहाल OPEC+ उन देशों के पहले से अपनी मर्जी से कम किए गए तेल उत्पादन को धीरे-धीरे वापस बढ़ा रहा है.
ईरान-US तनाव का क्या असर पड़ रहा है?
पिछले कुछ हफ्तों से तेल बाजार में सबसे बड़ा असर अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव का देखने को मिला है. इस संघर्ष की वजह से दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में शामिल Strait of Hormuz से कच्चे तेल की आवाजाही प्रभावित हुई. मंगलवार को युद्ध में कुछ समय के लिए तनाव कम होने की उम्मीद से तेल करीब 5% टूटकर दो हफ्ते के निचले स्तर पर आ गया था. लेकिन अब फिर बाजार में अनिश्चितता बढ़ने से कीमतों में रिकवरी देखने को मिली है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ अच्छी बातचीत हुई है, लेकिन बातचीत विफल होने पर आगे कार्रवाई की चेतावनी भी दी. वहीं ईरान ने अमेरिका के साथ दोबारा बातचीत शुरू करने की बात से इनकार किया है.
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर क्या नई कोशिश हुई है?
रॉयटर्स के मुताबिक, ओमान ने ईरान के सामने एक प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों के लिए स्वैच्छिक शुल्क व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया गया है. खाड़ी देशों के समर्थन वाले इस प्रस्ताव का मकसद इस अहम समुद्री रास्ते से व्यापार में आई रुकावट को कम करना है.
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