तेल कंपनियां ₹11 प्रति लीटर तक मुनाफा कमा रहीं, फिर भी जनता को सस्ता पेट्रोल क्यों नहीं?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है, लेकिन पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों में कोई कटौती नहीं हुई है. तेल कंपनियां ₹11 प्रति लीटर तक का मुनाफा कमा रही हैं. जानिए इसके पीछे क्या कारण हैं और कब मिल सकती है राहत.

Petrol- Diesel Price : अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है. अमेरिका-ईरान तनाव के दौरान रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने वाला इंडियन बास्केट क्रूड अब करीब 68.69 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है.

यह युद्ध के दौरान बने लगभग 157 डॉलर प्रति बैरल के उच्च स्तर से करीब 56% कम है. आमतौर पर माना जाता है कि जब कच्चा तेल सस्ता होता है तो पेट्रोल और डीजल की कीमतें भी कम होनी चाहिए. लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ. सरकारी तेल कंपनियों ने खुदरा कीमतों में कोई कटौती नहीं की है, जिससे आम उपभोक्ताओं के मन में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर राहत क्यों नहीं मिल रही.

कच्चा तेल सस्ता होने के बाद भी पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं हुआ सस्ता?

पेट्रोल और डीजल की कीमत केवल कच्चे तेल पर निर्भर नहीं करती. इसमें कई अन्य लागतें भी शामिल होती हैं.

  • कच्चे तेल की खरीद कीमत.
  • रिफाइनिंग की लागत.
  • माल ढुलाई. केंद्रीय उत्पाद शुल्क.
  • राज्य सरकारों का वैट.
  • डीलर कमीशन.
  • तेल कंपनियों का मार्जिन.

यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड सस्ता होने के बावजूद खुदरा कीमतों में तुरंत बदलाव नहीं होता.

तेल कंपनियां कितना मार्जिन कमा रही हैं?

मार्केट रिसर्च फर्म DAM Capital के अनुसार. पेट्रोल पर लगभग 10.5 रुपये प्रति लीटर तक का मार्जिन. डीजल पर लगभग 11 रुपये प्रति लीटर तक का मार्जिन. बताया जा रहा है कि जब इंडियन बास्केट क्रूड लगभग 87 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहता है, तब तेल कंपनियां ब्रेक-ईवन स्थिति में रहती हैं. मौजूदा कीमत इससे काफी नीचे होने के कारण कंपनियों की लाभप्रदता बेहतर बनी हुई है.

पिछले कुछ वर्षों में पेट्रोल और क्रूड का गणित

वर्षकच्चा तेल (डॉलर/बैरल)दिल्ली में पेट्रोल (रु./लीटर)
201880.0872.15
202043.4168.20
2022119.0096.72
202375.00कीमतों में बड़ी राहत नहीं

यह आंकड़े दिखाते हैं कि कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर हमेशा समान अनुपात में पेट्रोल-डीजल पर नहीं पड़ता.

क्या तेल कंपनियां मुनाफे में हैं?

हालिया वित्तीय नतीजों के अनुसार प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों का प्रदर्शन मजबूत रहा.

कंपनी2025-26 चौथी तिमाही (करोड़ रु.)2024-25 चौथी तिमाही (करोड़ रु.)वृद्धि
IOCL15,1768,39880.7%
BPCL3,2142,50928.1%
HPCL6,0603,41377.6%

इन तीनों कंपनियों का कुल मुनाफा पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 71% अधिक रहा.

निजी कंपनी ने कीमत घटाई, सरकारी कंपनियों ने क्यों नहीं?

1 जुलाई को निजी क्षेत्र की कंपनी Nayara Energy ने पेट्रोल 5 रुपये प्रति लीटर सस्ता किया.

  • डीजल 3 रुपये प्रति लीटर सस्ता किया.

लेकिन सरकारी कंपनियों.

  • Indian Oil (IOC)
  • Bharat Petroleum (BPCL)
  • Hindustan Petroleum (HPCL)

ने अपनी खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया.

यह अंतर बताता है कि अलग-अलग कंपनियां अपनी व्यावसायिक रणनीति और लागत के आधार पर अलग निर्णय ले सकती हैं.

मई में कीमतें क्यों बढ़ाई गई थीं?

मई 2026 में सरकारी तेल कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की महंगाई का हवाला देते हुए पेट्रोल और डीजल की कीमतों में चरणबद्ध तरीके से लगभग 7.50 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी.

अब जबकि कच्चा तेल काफी सस्ता हो चुका है, उपभोक्ताओं की उम्मीद है कि खुदरा कीमतों में भी कमी आए.

आगे पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की संभावना है?

यह कई कारकों पर निर्भर करेगा.

  • अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत.
  • डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति.
  • सरकार की टैक्स नीति.
  • तेल कंपनियों की मूल्य निर्धारण रणनीति.
  • पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति.

यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक नीचे बनी रहती हैं और अन्य लागतों में बड़ा बदलाव नहीं होता, तो भविष्य में खुदरा कीमतों में राहत मिलने की संभावना बढ़ सकती है. हालांकि इसकी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है.

आम लोगों पर इसका क्या असर पड़ रहा है?

पेट्रोल और डीजल महंगे रहने से.

  • परिवहन लागत अधिक रहती है.
  • माल ढुलाई महंगी होती है.
  • खाद्य वस्तुओं और रोजमर्रा के सामान की कीमतों पर दबाव बना रहता है.
  • महंगाई कम होने की रफ्तार प्रभावित हो सकती है.

यानी ईंधन की कीमतें केवल वाहन चालकों को ही नहीं, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती हैं.

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By Abhishek Pandey

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