अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत सोमवार, 24 अगस्त को 1 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा गिर गई. निवेशकों ने अमेरिका की ओर से ईरान पर नए प्रतिबंधों के संभावित ऐलान से पहले मुनाफावसूली की. हालांकि कीमतों में आई इस गिरावट के बावजूद तेल बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है. इसका असर आगे चलकर भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों पर भी पड़ सकता है.
कच्चे तेल की कीमत में कितनी गिरावट आई?
सोमवार को ब्रेंट क्रूड 1.22 डॉलर यानी 1.29% गिरकर 93.17 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. वहीं अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड 1.20 डॉलर यानी 1.38% टूटकर 85.86 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. दिलचस्प बात यह है कि पिछले हफ्ते दोनों बेंचमार्क तेल कीमतों में 5% से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई थी. इसकी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का अटकना और सप्लाई को लेकर बढ़ी चिंता थी.
अमेरिका और ईरान के बीच क्या चल रहा है?
अमेरिका ईरान पर नए प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहा है. अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि ईरान पर अब तक के सबसे सख्त प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं. वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों को भी चेतावनी दी है. दूसरी तरफ ईरान ने इन योजनाओं का विरोध किया है. ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने बातचीत के जरिए समाधान की बात कही है, लेकिन तनाव अभी भी बना हुआ है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज इतना अहम क्यों है?
तेल बाजार की सबसे बड़ी चिंता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर है. यह दुनिया के सबसे अहम तेल रास्तों में से एक है. दुनिया की करीब पांचवीं तेल सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती रही है. ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने नए प्रतिबंध लागू किए तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और फारस की खाड़ी से तेल निर्यात रोकने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं. हालांकि ईरान ने इराक के कुछ तेल टैंकरों को इस रास्ते से गुजरने की अनुमति भी दी है.
आम लोगों और कारोबारियों के लिए इसका क्या मतलब है?
अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता है तो तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है. इससे कच्चे तेल की कीमत फिर चढ़ सकती है.
इसका असर कई क्षेत्रों पर पड़ सकता है.
- ट्रांसपोर्ट का खर्च बढ़ सकता है.
- कंपनियों की लागत बढ़ सकती है.
- कई सामान महंगे हो सकते हैं.
- पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव बन सकता है.
फिलहाल बाजार की नजर अमेरिका के संभावित प्रतिबंधों और ईरान की अगली प्रतिक्रिया पर है. आने वाले दिनों में यही तय करेगा कि कच्चे तेल की कीमतें नीचे रहती हैं या फिर एक बार फिर तेजी पकड़ती हैं.
