वही कार्ड, वही खर्च फिर फायदे क्यों हो गए आधे? जानिए पूरा खेल

Credit Card Devaluation: अगर आपके क्रेडिट कार्ड से मिलने वाले कैशबैक और रिवॉर्ड्स पहले से कम हो गए हैं, तो जानिए Credit Card Devaluation क्या है और इसका आप पर क्या असर पड़ सकता है.

Credit Card Devaluation: आजकल क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल लगभग हर मिडिल क्लास परिवार में आम हो गया है. लेकिन क्या आपने गौर किया है कि जो कार्ड दो साल पहले आपको जबरदस्त रिवॉर्ड्स और कैशबैक देता था, आज वही कार्ड कम फायदे दे रहा है? इसी को फाइनेंस की भाषा में ‘क्रेडिट कार्ड डीवैल्यूएशन’ (Credit Card Devaluation) कहते हैं. सरल शब्दों में, बैंक चुपके से आपके कार्ड की वैल्यू कम कर देते हैं, जबकि आप खर्च उतना ही कर रहे होते हैं.

क्या है क्रेडिट कार्ड डिवैल्यूएशन?

क्रेडिट कार्ड डिवैल्यूएशन का मतलब है कि कार्ड पर मिलने वाले फायदे धीरे-धीरे कम कर दिए जाएं, जबकि आपका खर्च पहले जैसा ही बना रहे.

इसमें बैंक कई तरह के बदलाव कर सकते हैं, जैसे:

  • कैशबैक की सीमा कम करना
  • एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस पर रोक लगाना
  • रिवॉर्ड पॉइंट्स की वैल्यू घटाना
  • नई फीस या शर्तें जोड़ना

यानी वही कार्ड, लेकिन पहले के मुकाबले कम फायदा.

हाल में किन कार्ड्स में हुए बदलाव?

हाल के महीनों में कई लोकप्रिय क्रेडिट कार्ड्स के नियम बदले गए हैं.

कार्डपहले क्या मिलता थाअब क्या बदला
SBI कैशबैक कार्डअधिक कैशबैक की सुविधाकैशबैक की अधिकतम सीमा 4,000 रुपये प्रति स्टेटमेंट साइकिल
HDFC इन्फिनियाकुछ प्रीमियम फायदे आसानी से मिलते थेअब कई लाभों के लिए तय खर्च या बैंक संबंध जरूरी

इसके अलावा कुछ खर्च श्रेणियों (एक्सपेंस कैटेगरीज) जैसे बिल भुगतान और सरकारी लेन-देन पर भी रिवॉर्ड या कैशबैक सीमित किया गया है. 

बैंक ऐसा क्यों कर रहे हैं?

क्रेडिट कार्ड कंपनियां और बैंक अपने खर्च को कंट्रोल करने और मुनाफा बढ़ाने के लिए ऐसे कदम उठाते हैं.

एक्स्पर्ट्स के मुताबिक:

  • रिवॉर्ड प्रोग्राम चलाने की लागत बढ़ रही है. 
  • सभी ग्राहकों को एक जैसी सुविधाएं देना महंगा पड़ता है.  
  • बैंक अब ज्यादा खर्च करने वाले ग्राहकों पर फोकस कर रहे हैं.

यही वजह है कि कई सुविधाएं अब केवल तय खर्च पूरा करने वाले ग्राहकों तक सीमित की जा रही हैं.

कार्डहोल्डर्स को क्या करना चाहिए?

अगर आप अपने क्रेडिट कार्ड से पूरा फायदा लेना चाहते हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें:

  • साल में कम से कम एक बार कार्ड के फायदे और फीस की समीक्षा करें.
  • जमा हुए रिवॉर्ड पॉइंट्स को समय-समय पर इस्तेमाल करें.
  • बैंक से आने वाले ईमेल और एसएमएस ध्यान से पढ़ें.
  • केवल ब्रांड या नाम देखकर कार्ड न रखें, बल्कि उसके वास्तविक फायदे देखें.

क्या कार्ड बंद कर देना चाहिए?

जरूरी नहीं है. अगर बदलाव के बाद भी कार्ड आपकी जरूरतों के हिसाब से फायदा दे रहा है, तो उसे जारी रखा जा सकता है. लेकिन यदि एनुअल फीस ज्यादा है और सुविधाएं लगातार घट रही हैं, तो दूसरे ऑप्शंस पर विचार करना समझदारी होगी.

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लेखक के बारे में

Published by: Soumya Shahdeo

सौम्या शाहदेव ने बैचलर ऑफ़ आर्ट्स इन इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन किया है और वह इस समय प्रभात खबर डिजिटल के बिजनेस सेक्शन में कॉन्टेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह ज़्यादातर पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी खबरें लिखती हैं, जैसे बचत, निवेश, बैंकिंग, लोन और आम लोगों से जुड़े पैसे के फैसलों के बारे में. इसके अलावा, वह बुक रिव्यू भी करती हैं और नई किताबों व लेखकों को पढ़ना-समझना पसंद करती हैं. खाली समय में उन्हें नोवेल्स पढ़ना और ऐसी कहानियाँ पसंद हैं जो लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं.

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