Coal India OFS: भारत सरकार सरकारी कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) में अपनी 2% तक हिस्सेदारी बेचने जा रही है. यह बिक्री ‘ऑफर फॉर सेल’ (OFS) के जरिए होगी. इस कदम से सरकार का मुख्य लक्ष्य बाजार में कंपनी के शेयर्स की संख्या (पब्लिक फ्लोट) बढ़ाना और अपने राजकोष के लिए करीब 5,000 करोड़ रुपये जुटाना है.
क्या है सरकार का पूरा प्लान?
सरकार ने यह कदम वित्तीय वर्ष 2026-27 के अपने डिसइन्वेस्टमेंट प्रोग्राम के तहत उठाया है. इस ऑफर के तहत कोयला मंत्रालय के माध्यम से राष्ट्रपति कुल 6,16,27,283 इक्विटी शेयर बेचेंगे, जो कंपनी की कुल चुकता पूंजी का 1.00% है. इसे ‘बेस ऑफर’ का नाम दिया गया है. अगर बाजार में इस ऑफर को अच्छा रिस्पॉन्स मिलता है और मांग बढ़ती है, तो सरकार के पास इतने ही शेयर (1.00%) अतिरिक्त बेचने का ऑप्शन भी खुला रहेगा, जिसे ‘ग्रीन शू ऑप्शन’ कहते हैं. दोनों को मिलाकर सरकार कुल 12,32,54,566 शेयर यानी 2.00% हिस्सेदारी बाजार में बेच सकती है.
किस कीमत पर और कितना मिलेगा डिस्काउंट?
सरकार ने इस बिक्री के लिए फ्लोर प्राइस यानी न्यूनतम कीमत 412 रुपये प्रति शेयर तय की है. गौर करने वाली बात यह है कि 26 मई 2026 को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर कोल इंडिया का शेयर 458.15 रुपये पर बंद हुआ था. इस लिहाज से इन्वेस्टर्स को यह शेयर आखिरी बंद कीमत से लगभग 10.1% की भारी छूट (डिस्काउंट) पर मिल रहा है. इस तय कीमत के आधार पर केवल बेस ऑफर की वैल्यू 2,539 करोड़ रुपये है, जबकि ग्रीन शू ऑप्शन समेत कुल ऑफर साइज 5,078 करोड़ रुपये बैठती है. इसके अलावा, कंपनी के कर्मचारियों के लिए भी 25,000 शेयर रिजर्व्ड रखे गए हैं.
पैसा लगाने के लिए कब खुलेगी विंडो?
यह ऑफर दो अलग-अलग तारीखों पर खुलेगा. नॉन-रिटेल यानी बड़े संस्थागत इन्वेस्टर्स के लिए यह विंडो आज, यानी 27 मई 2026 को खुल रही है. वहीं, आम जनता यानी रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए इसमें पैसे लगाने का मौका 29 मई 2026 को खुलेगा. आम रिटेल इन्वेस्टर्स को शेयर का अलॉटमेंट उसी कट-ऑफ प्राइस पर किया जाएगा, जो नॉन-रिटेल कैटगरी के तहत मिलने वाली बोलियों के आधार पर तय होगी. दीपम (DIPAM) सचिव ने बताया कि दुनिया की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी कोल इंडिया लगातार मजबूत मुनाफा कमा रही है और शानदार डिविडेंड दे रही है, जिससे यह लंबी अवधि के लिए एक बेहतरीन इनवेस्टमेंट का मौका है.
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