दुनियाभर में कच्चे तेल की कीमतें फिर चर्चा में हैं. शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया, जबकि WTI (वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट) 84 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखा. जुलाई में ब्रेंट क्रूड अब तक 23% से ज्यादा चढ़ चुका है, जो मार्च के बाद इसकी सबसे बड़ी मासिक बढ़त मानी जा रही है. इस तेजी की वजह अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ता सैन्य तनाव है, जिसने ग्लोबल ऑयल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है.
90 डॉलर के करीब क्यों पहुंच गया ब्रेंट क्रूड?
तेल बाजार में तेजी की वजह अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ता संघर्ष है. गुरुवार को दोनों देशों ने एक-दूसरे पर नए हमले किए, जिससे मिडिल ईस्ट में हालात और तनावपूर्ण हो गए. हालांकि दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से टैंकरों की आवाजाही पहले के मुकाबले बेहतर हुई है, लेकिन निवेशकों की चिंता अभी भी बनी हुई है. अगर इस रास्ते पर कोई रुकावट आती है तो दुनिया भर में तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है.
इस महीने तेल में इतनी तेजी क्यों आई?
जुलाई का महीना तेल बाजार के लिए काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा. सिर्फ इस हफ्ते ही ब्रेंट क्रूड करीब 11 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में ऊपर-नीचे हुआ. हर नई सैन्य कार्रवाई और सप्लाई से जुड़ी खबर के साथ कीमतों में तेज बदलाव देखने को मिला. तेल बाजार को यह डर भी सता रहा है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ा तो सप्लाई चेन पर सीधा असर पड़ सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देगा.
सऊदी अरब और ब्लैक सी से क्यों बढ़ी चिंता?
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब ने लाल सागर और आसपास के समुद्री रास्तों की सुरक्षा मजबूत करने के लिए 43 देशों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत शुरू की है. यह कदम तब उठाया गया जब ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने पिछले सप्ताह सऊदी अरब के खिलाफ नाकाबंदी लागू की थी. वहीं हूती नेता अब्दुलमलिक अल-हूती ने चेतावनी दी है कि अगर सऊदी अरब सैन्य कार्रवाई बढ़ाता है तो उसका और कड़ा जवाब दिया जाएगा. उधर ब्लैक सी में भी हालात सामान्य नहीं हैं. टैंकरों पर लगातार हमलों की वजह से कैस्पियन पाइपलाइन कंसोर्टियम टर्मिनल से कजाकिस्तान के कच्चे तेल की लोडिंग रुक गई है. इससे वैश्विक सप्लाई को लेकर चिंता और बढ़ गई है.
अब बाजार की नजर किन बातों पर है?
अमेरिका में कच्चे तेल का भंडार घटने से बाजार को संकेत मिला है कि सप्लाई पहले के मुकाबले और सख्त हो सकती है. अब निवेशकों की नजर अमेरिकी तेल कंपनियों Chevron और ExxonMobil के तिमाही नतीजों पर है. इन नतीजों से मांग और उत्पादन की तस्वीर साफ हो सकती है. वहीं Shell ने इस सप्ताह अपना रिकॉर्ड के करीब दूसरा सबसे बड़ा तिमाही मुनाफा दर्ज किया, जिससे साफ है कि तेल बाजार में बढ़ी अस्थिरता का फायदा बड़ी ऊर्जा कंपनियों को भी मिल रहा है.
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