BPCL और Akasa Air की नई पहल, अब विमानों में बढ़ेगा Sustainable Fuel का इस्तेमाल

Sustainable Aviation Fuel: भारत में अब विमानों में इस्तेमाल होने वाले फ्यूल को ज्यादा पर्यावरण अनुकूल बनाने की तैयारी तेज हो गई है. इसके लिए भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) और Akasa Air ने Sustainable Aviation Fuel (SAF) के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए एक समझौता (MoU) किया है.

Sustainable Aviation Fuel: इस समझौते के तहत दोनों कंपनियां भारत के कुछ चुनिंदा एयरपोर्ट पर SAF की उपलब्धता बढ़ाने और इसकी सप्लाई को मजबूत करने पर काम करेंगी. साथ ही, भविष्य में लंबे समय तक SAF की सप्लाई कैसे सुनिश्चित की जाए, इस पर भी योजना बनाई जाएगी.

क्या है SAF और क्यों बढ़ रहा है इसका इस्तेमाल?

आज के समय में दुनिया भर में प्रदूषण कम करने और कार्बन उत्सर्जन (Emission)घटाने पर जोर दिया जा रहा है. हवाई यात्रा में इस्तेमाल होने वाला फ्यूल भी इसका एक बड़ा हिस्सा है. Sustainable Aviation Fuel (SAF) ऐसा फ्यूल है, जिसे पारंपरिक विमान ईंधन (ATF) के साथ मिलाकर इस्तेमाल किया जा सकता है. इसका उद्देश्य विमानन क्षेत्र से होने वाले पर्यावरणीय असर को कम करना और कच्चे तेल (Crude Oil) पर भारत की निर्भरता घटाना है. पहले एयरलाइंस ज्यादातर शुद्ध जेट फ्यूल का इस्तेमाल करती थीं, जिसमें किसी तरह का मिश्रण नहीं होता था. लेकिन SAF की कीमत सामान्य ATF से ज्यादा होने के कारण इसका इस्तेमाल सीमित रहा है. 

BPCL और Akasa Air की साझेदारी में क्या होगा?

BPCL और Akasa Air का यह समझौता सिर्फ फ्यूल की सप्लाई तक सीमित नहीं है. दोनों कंपनियां मिलकर SAF को धीरे-धीरे ज्यादा इस्तेमाल में लाने की तैयारी करेंगी. 

इसमें शामिल हैं:

  • चुनिंदा भारतीय एयरपोर्ट पर SAF की उपलब्धता बढ़ाना.
  • SAF की लंबे समय तक सप्लाई बनाए रखने की तैयारी करना.
  • विमान ईंधन में SAF मिलाने की मात्रा को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाना.
  • भारत में SAF के लिए मजबूत घरेलू नेटवर्क तैयार करना.

सरकार ने SAF को लेकर क्या फैसला लिया?

केंद्र सरकार ने अप्रैल 2026 में Aviation Turbine Fuel (Regulation of Marketing) Order, 2001 में बदलाव किया था. इस बदलाव के बाद SAF मिले हुए Aviation Turbine Fuel (ATF) के इस्तेमाल को मंजूरी मिली. 

इसके साथ ही सरकार ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए SAF ब्लेंडिंग के शुरुआती लक्ष्य भी तय किए हैं.

सालATF में SAF मिलाने का लक्ष्य
20271%
20282%
20305%

ये लक्ष्य International Civil Aviation Organization (ICAO) के तय किए गए दिशा-निर्देशों के अनुरूप हैं.

SAF अपनाने में सबसे बड़ी चुनौती क्या है?

SAF को बड़े स्तर पर इस्तेमाल करने में सबसे बड़ी परेशानी इसकी कीमत है. सामान्य विमान ईंधन यानी ATF की तुलना में SAF महंगा होता है. इसी वजह से एयरलाइंस को इसे अपनाने में लागत का दबाव झेलना पड़ सकता है. SAF Association India के रोहित कुमार के मुताबिक, SAF को धीरे-धीरे अपनाने से एयरलाइंस और फ्यूल कंपनियों को अपनी क्षमता बढ़ाने का मौका मिलेगा. इससे भारत में SAF का पूरा सिस्टम तैयार करने में मदद मिलेगी.

BPCL और Akasa Air की यह पहल भारत के एविएशन सेक्टर को ज्यादा साफ और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक अहम कदम है. आने वाले वर्षों में SAF का इस्तेमाल बढ़ने से हवाई यात्रा के तरीके में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है.

ये भी पढ़ें: चिप के लिए दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रहेगा भारत! ₹1.27 लाख करोड़ से शुरू हुआ Semicon 2.0



प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Soumya Shahdeo

सौम्या शाहदेव ने बैचलर ऑफ़ आर्ट्स इन इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन किया है और वह इस समय प्रभात खबर डिजिटल के बिजनेस सेक्शन में कॉन्टेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह ज़्यादातर पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी खबरें लिखती हैं, जैसे बचत, निवेश, बैंकिंग, लोन और आम लोगों से जुड़े पैसे के फैसलों के बारे में. इसके अलावा, वह बुक रिव्यू भी करती हैं और नई किताबों व लेखकों को पढ़ना-समझना पसंद करती हैं. खाली समय में उन्हें नोवेल्स पढ़ना और ऐसी कहानियाँ पसंद हैं जो लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं.

और पढ़ें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >