ATF Price Hike: हवाई यात्रा करने वालों और एयरलाइंस कंपनियों के लिए एक अहम खबर है. विमान ईंधन, जिसे एटीएफ (ATF) कहा जाता है, उसकी कीमतों में करीब 10 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी हुई है. इस अचानक आई तेजी के बाद सरकार ने एयरलाइंस के लिए एक नई ‘मूल्य स्थिरीकरण योजना’ (Price Stabilization Scheme) शुरू की है. आइए जानते हैं कि इसका आपकी जेब और उड़ानों पर क्या असर पड़ेगा.
क्या एयरलाइंस के लिए बदल गया है फ्यूल का खर्च?
PTI की रिपोर्ट के अनुसार, एटीएफ की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद, अब घरेलू एयरलाइंस के लिए फ्यूल की दर 104.927 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 115 रुपये प्रति लीटर हो गई है. इसका सीधा असर एयरलाइंस के बजट पर पड़ता है, क्योंकि उनके कुल खर्चे का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ फ्यूल में जाता है. जब इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल के दाम बढ़ते हैं, तो यह खर्च 60 प्रतिशत तक भी पहुंच सकता है. मई में तो कीमतें 142 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई थीं, जिससे हवाई टिकटों के दाम बढ़ने का खतरा पैदा हो गया था.
आखिर क्या है सरकार की यह नई योजना?
सरकार ने एयरलाइंस को फ्यूल की अस्थिर कीमतों से बचाने के लिए 10,000 करोड़ रुपये की एक नई योजना को मंजूरी दी है. इसके तहत एयरलाइंस के पास दो ऑप्शंस हैं:
- स्थिर दर का ऑप्शन: जो एयरलाइंस इस योजना का हिस्सा बनेंगी, उन्हें 86.32 रुपये के आधार मूल्य पर फ्यूल मिलेगा. दिल्ली में इसकी प्रभावी कीमत 115 रुपये, मुंबई में 114.5 रुपये और चेन्नई में 139 रुपये प्रति लीटर तय की गई है.
- बाजार आधारित ऑप्शन: जो एयरलाइंस इस योजना में शामिल नहीं होंगी, उन्हें बाजार भाव पर फ्यूल खरीदना होगा, जो फिलहाल लगभग 142 रुपये प्रति लीटर चल रहा है.
यह योजना कैसे काम करेगी?
यह कोई सब्सिडी नहीं है, बल्कि एक अस्थायी संतुलन बनाने का तरीका है. यदि इंटरनेशनल मार्केट में तेल की कीमतें तय आधार दर से ऊपर जाती हैं, तो सरकार तेल कंपनियों को ब्याज-मुक्त पैसा देगी ताकि एयरलाइंस को घाटा न हो. वहीं, जब बाजार में कीमतें गिरेंगी, तो तेल कंपनियों को यह पैसा सरकार को वापस लौटाना होगा, जिसे भारत की संचित निधि में जमा किया जाएगा.
यात्रियों पर इसका क्या होगा असर?
सरकार का मुख्य उद्देश्य यह है कि फ्यूल की कीमतों में होने वाले बड़े उतार-चढ़ाव का सीधा बोझ यात्रियों पर न पड़े. इस योजना से एयरलाइंस को लागत की स्थिरता मिलेगी, जिससे उम्मीद की जा रही है कि वे टिकटों के दामों को बेवजह बढ़ाने से बचेंगी और हवाई सफर पहले की तरह ही सुगम बना रहेगा.
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