देश में एलपीजी की बढ़ती कीमतों और मिडिल ईस्ट संकट के कारण प्रभावित हुई सप्लाई चेन ने बड़े भोजनालयों के लिए चुनौती खड़ी कर दी है. ऐसे समय में हरियाणा में अन्नमृत का पीएनजी (PNG) आधारित किचन मॉडल न केवल लागत कम कर रहा है, बल्कि भोजन की निरंतरता को भी बनाए हुए है. यह मॉडल दिखाता है कि कैसे आधुनिक तकनीक और आध्यात्मिक मूल्यों का संगम एक बड़ी सामाजिक समस्या का समाधान कर सकता है.
हरियाणा की सबसे बड़ी रसोई
अन्नमृत की भोजन व्यवस्था प्रदेश की सबसे संगठित प्रणालियों में से एक है. वर्तमान में यह सेवा
- छात्र: प्रतिदिन लगभग 2,87,173 छात्रों तक पहुंच रही है.
- स्कूल: हरियाणा के 1,956 सरकारी स्कूलों में पौष्टिक भोजन पहुंचाया जा रहा है.
- राष्ट्रीय स्तर: देश भर में यह संख्या 12 लाख से अधिक दैनिक भोजन तक पहुंचती है.
एलपीजी से पीएनजी की ओर
बढ़ती गैस कीमतों के बीच अन्नमृत ने पारंपरिक एलपीजी सिलेंडरों पर निर्भरता कम कर दी है.
- निरंतर सप्लाई: पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) के उपयोग से सिलेंडर बदलने या खत्म होने का डर नहीं रहता.
- रियल-टाइम मॉनिटरिंग: गैस की खपत की सटीक निगरानी की जाती है, जिससे ऊर्जा की बर्बादी न्यूनतम होती है.
- आधुनिक उपकरण: स्वचालित चपाती मशीनें और नियंत्रित ताप प्रणालियां इस प्रकार डिजाइन की गई हैं कि कम ईंधन में अधिक भोजन तैयार हो सके.
- पर्यावरण सुरक्षा: विशेषज्ञों के अनुसार, पीएनजी का उपयोग एलपीजी की तुलना में कार्बन उत्सर्जन को कम करता है, जिससे यह एक ‘ग्रीन किचन’ मॉडल बनता है.
भोजन से शिक्षा की मजबूती
नियमित और संतुलित भोजन का सीधा संबंध बच्चों की स्कूल में उपस्थिति और सीखने की क्षमता से है. जब ऊर्जा-दक्ष तकनीकों के कारण भोजन की लागत घटती है, तो उस बचत का उपयोग भोजन की गुणवत्ता और पौष्टिकता बढ़ाने में किया जा सकता है. यह पहल केवल पेट भरने तक सीमित नहीं है, बल्कि हरियाणा के बच्चों के भविष्य को भी सशक्त कर रही है.
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