Air India हादसा पीड़ितों के परिजनों को फटाफट मिलेगा इंश्योरेंस का पैसा, डेथ सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं

Air India Plane Crash: एयर इंडिया हादसे के बाद एलआईसी और बजाज आलियांज ने बीमा दावों की प्रक्रिया तेज कर दी है. एलआईसी ने मृत्यु प्रमाण पत्र की अनिवार्यता में ढील देते हुए सरकारी रिकॉर्ड या मुआवजे को मान्य माना है. वहीं, बजाज आलियांज ने विशेष दावा डेस्क स्थापित कर न्यूनतम दस्तावेजों के साथ प्रक्रिया को सरल बनाया है. दोनों कंपनियों ने पीड़ितों के परिजनों को शीघ्र वित्तीय सहायता देने का आश्वासन दिया है, जिससे राहत मिलने की उम्मीद है.

Air India Plane Crash: एयर इंडिया विमान हादसे के बाद भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) ने पीड़ितों और उनके परिजनों के लिए बीमा दावा निपटान प्रक्रिया को सरल और तेज करने की घोषणा की है. एलआईसी ने कहा है कि वह दुर्घटना से प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए प्रतिबद्ध है और दावा निपटान में हर संभव राहत दी जाएगी.

एलआईसी ने विशेष छूट के तहत यह भी स्पष्ट किया है कि अगर किसी पॉलिसीधारक की मृत्यु विमान हादसे में हुई है, तो डेथ सर्टिफिकेट की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया है. इसके स्थान पर केंद्र और राज्य सरकार या एयरलाइन की ओर से दिया गया मुआवजा या कोई भी सरकारी रिकॉर्ड, जिसमें मौत की पुष्टि होती हो, को भी पर्याप्त माना जाएगा.

प्रभावित परिवारों से खुद संपर्क करेगा एलआईसी

एलआईसी ने कहा है कि वह प्रभावित परिवारों तक स्वयं संपर्क करेगा और दावा निपटान को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा. दावेदारों को उनकी नजदीकी एलआईसी शाखा में जाकर संपर्क करने की सलाह दी गई है. इसके साथ ही, निगम ने एक कॉल सेंटर हेल्पलाइन (022-68276827) भी जारी की है, जहां दावेदार अतिरिक्त सहायता प्राप्त कर सकते हैं.

बजाज आलियांज ने भी बनाई विशेष डेस्क

एलआईसी के अलावा, बजाज आलियांज लाइफ इंश्योरेंस ने भी इस विमान हादसे को देखते हुए दावा निपटान की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए एक विशेष डेस्क की स्थापना की है. कंपनी ने कहा है कि वह अपने प्रभावित ग्राहकों के लिए मृत्यु और विकलांगता से संबंधित दावों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाएगी.

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न्यूनतम दस्तावेजों में मिलेगा लाभ

बजाज आलियांज ने इस प्रक्रिया को सरल बनाते हुए न्यूनतम दस्तावेजों की आवश्यकता निर्धारित की है, ताकि पीड़ित परिवारों को अनावश्यक कागजी कार्रवाई से राहत मिल सके. कंपनी का उद्देश्य है कि पीड़ित परिवारों को जल्द से जल्द वित्तीय सहायता मिल सके और वे इस कठिन समय में थोड़ा राहत पा सकें.

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By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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