Air India Board Meeting: टाटा ग्रुप की एयर इंडिया इस समय एक मुश्किल दौर से गुजर रही है. भारी घाटे और वैश्विक तनाव के बीच, कंपनी के भविष्य को लेकर 7 मई को मुंबई में एक बड़ी बैठक होने जा रही है. टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन की अध्यक्षता में होने वाली इस मीटिंग में एयरलाइन को बचाने के लिए कई कड़े फैसलों पर मुहर लग सकती है.
क्या अब खाने और लाउंज के लिए अलग से पैसे देने होंगे?
एयर इंडिया अपने खर्चों में कटौती करने के लिए ‘अनबंडलिंग’ (Unbundling) मॉडल पर विचार कर रही है. इसका सीधा मतलब है कि अब आपको टिकट के साथ मिलने वाली सुविधाओं के लिए अलग से चुनाव करना पड़ सकता है. एयरलाइन ऐसी योजना बना रही है जिसमें अगर यात्री खाना नहीं लेना चाहता, तो उसे सस्ता टिकट मिल सके. इसी तरह, बिजनेस क्लास के यात्रियों के लिए लाउंज एक्सेस को भी वैकल्पिक बनाया जा सकता है. हालांकि, कंपनी ने साफ किया है कि अभी इन पर सिर्फ विचार चल रहा है, अंतिम फैसला बैठक में होगा.
आखिर क्यों बढ़ी मुश्किलें?
मार्च 2026 को खत्म हुए वित्त वर्ष में एयर इंडिया को 22,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का घाटा होने का अनुमान है. इस बर्बादी की सबसे बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में चल रहा संघर्ष है. युद्ध के कारण एयरस्पेस बंद हैं, जिससे विमानों को लंबे रास्तों से उड़ान भरनी पड़ रही है. इससे जेट फ्यूल की खपत बढ़ गई है और ऊपर से तेल की कीमतों में भी भारी उछाल आया है. स्थिति इतनी गंभीर है कि एयरलाइन को जून और जुलाई की कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में कटौती करनी पड़ रही है.
कौन होगा एयर इंडिया का अगला बॉस?
एयरलाइन के मौजूदा सीईओ कैंपबेल विल्सन इस साल के अंत में अपना पद छोड़ रहे हैं. ऐसे में बोर्ड के सामने सबसे बड़ी चुनौती एक नया और काबिल नेतृत्व खोजने की है. चर्चा है कि सिंगापुर एयरलाइंस (जिसकी एयर इंडिया में 25.1% हिस्सेदारी है), यूरोप या खुद टाटा ग्रुप के किसी अनुभवी अधिकारी को यह जिम्मेदारी दी जा सकती है. खबर यह भी है कि कंपनी मैनेजमेंट को मजबूत करने के लिए एक जॉइंट एमडी या सीईओ की नियुक्ति भी कर सकती है.
क्या टिकटों के दाम और बढ़ेंगे?
फ्यूल की बढ़ती कीमतों की भरपाई के लिए एयरलाइन ने पहले ही किराए बढ़ाए हैं और फ्यूल सरचार्ज लगाया है. लेकिन सीईओ विल्सन का मानना है कि किराए एक हद तक ही बढ़ाए जा सकते हैं, क्योंकि ज्यादा महंगे टिकट देखकर लोग सफर करना बंद कर देंगे. घरेलू उड़ानों पर राहत सिर्फ इतनी है कि सरकार ने फ्यूल प्राइस बढ़ोतरी को 25% तक सीमित रखा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय रूट पर बढ़ते खर्च ने एयर इंडिया की कमर तोड़ दी है.
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