8th Pay Commission: 65% तक सैलरी बढ़ाने की मांग, ₹9000 ट्रांसपोर्ट अलाउंस का भी प्रस्ताव

8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों की उम्मीदें एक बार फिर बढ़ गई हैं. इस बीच कर्मचारी संगठन ने सैलरी, HRA और ट्रांसपोर्ट अलाउंस बढ़ाने समेत कई बड़े प्रस्ताव आयोग के सामने रखे हैं.

8th Pay Commission: ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AINPSEF) ने 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के सामने कई अहम सुझाव रखे हैं. इनमें फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने, HRA की नई दरें तय करने और लेवल-1 कर्मचारियों के लिए हर महीने कम से कम 9,000 रुपये ट्रांसपोर्ट अलाउंस देने की मांग शामिल है.

ध्यान देने वाली बात यह है कि ये सिर्फ फेडरेशन के सुझाव हैं. सरकार ने अभी इनमें से किसी भी प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी है.

कर्मचारी आखिर क्या मांग रहे हैं?

फेडरेशन का कहना है कि महंगाई और बढ़ते खर्चों को देखते हुए मौजूदा वेतन ढांचे में बदलाव जरूरी है. इसी वजह से उसने वेतन आयोग के सामने ये प्रमुख मांगें रखी हैं.

प्रस्तावफेडरेशन की मांग
फिटमेंट फैक्टर2.05 से बढ़ाकर 2.10 किया जाए
HRAX शहरों में 36%, Y शहरों में 24% और Z शहरों में 12%
ट्रांसपोर्ट अलाउंसलेवल-1 कर्मचारियों को कम से कम ₹9,000 प्रति माह
परिवार का आकार3 की जगह 4.4 सदस्य माना जाए, जिसमें आश्रित माता-पिता भी शामिल हों

फेडरेशन का मानना है कि परिवार का वास्तविक खर्च पहले की तुलना में काफी बढ़ चुका है. इसलिए वेतन तय करते समय आश्रित माता-पिता को भी परिवार का हिस्सा माना जाना चाहिए.

सैलरी कितनी बढ़ सकती है?

अगर फेडरेशन के सभी प्रस्ताव स्वीकार कर लिए जाते हैं, तो उसके अनुसार लेवल-1 कर्मचारियों की मासिक सैलरी करीब 65% तक बढ़ सकती है.

  • मौजूदा मासिक वेतन: ₹37,080
  • संभावित नया वेतन: करीब ₹61,344

फेडरेशन का कहना है कि फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने और परिवार की नई गणना लागू होने से बेसिक पे बढ़ेगी, जिसका सीधा असर कुल सैलरी पर पड़ेगा. हालांकि, यह सिर्फ एक प्रस्तावित अनुमान है. अंतिम फैसला 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों और सरकार की मंजूरी के बाद ही होगा.

HRA और ट्रांसपोर्ट अलाउंस में क्या बदलाव मांगे गए हैं?

फेडरेशन ने HRA की दरों में भी बदलाव का सुझाव दिया है.

  • X श्रेणी के शहर: 36% HRA
  • Y श्रेणी के शहर: 24% HRA
  • Z श्रेणी के शहर: 12% HRA

इसके अलावा फेडरेशन की मांग है कि जब भी सरकार महंगाई भत्ता (DA) बढ़ाए, उसी समय HRA में भी बढ़ोतरी की जाए, ताकि कर्मचारियों को बढ़ती महंगाई का बेहतर फायदा मिल सके. साथ ही, लेवल-1 कर्मचारियों के लिए कम से कम 9,000 रुपये प्रति माह ट्रांसपोर्ट अलाउंस तय करने का भी प्रस्ताव दिया गया है.

अब 8वां वेतन आयोग क्या कर रहा है?

8वां वेतन आयोग फिलहाल कर्मचारी संगठनों, यूनियनों और दूसरे संबंधित पक्षों से सुझाव ले रहा है. इन सभी सुझावों पर विचार करने के बाद आयोग अपनी अंतिम सिफारिशें सरकार को सौंपेगा. आयोग की अध्यक्ष पूर्व सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई हैं. पूर्व IAS अधिकारी पंकज जैन सदस्य-सचिव हैं, जबकि प्रोफेसर पुलक घोष, जो प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य भी हैं, आयोग के सदस्य हैं. सरकार ने आयोग की Terms of Reference पिछले साल जारी की थी.

नई सैलरी कब से मिल सकती है?

आयोग को काम शुरू किए करीब आठ महीने हो चुके हैं. अगर पहले की तरह प्रक्रिया चलती है, तो इसकी रिपोर्ट फरवरी से मई 2027 के बीच सरकार को सौंपी जा सकती है. हालांकि, पिछले वेतन आयोगों का रिकॉर्ड बताता है कि रिपोर्ट आने और उसे पूरी तरह लागू होने के बीच 2 से 3 साल का अंतर रहा है. यानी अगर इस बार भी वही प्रक्रिया अपनाई जाती है, तो नई वेतन व्यवस्था 2029 या 2030 तक लागू हो सकती है.

फिलहाल कर्मचारियों की मांगें आयोग के सामने हैं, लेकिन इन पर अंतिम फैसला सरकार की मंजूरी के बाद ही होगा. इसलिए अभी सैलरी बढ़ने या नए भत्ते मिलने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है.

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By Soumya Shahdeo

सौम्या शाहदेव प्रभात खबर डिजिटल में बिजनेस कंटेंट राइटर हैं. वह शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, टैक्स, सरकारी योजनाओं, बैंकिंग और रोजमर्रा की आर्थिक खबरों को सरल और सटीक भाषा में पाठकों तक पहुंचाती हैं. उनका फोकस ऐसी खबरें लिखने पर रहता है जो सीधे आम लोगों की जिंदगी और जेब पर असर डालती हैं.

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