3 दिन की तेजी के बाद बदला तेल बाजार का मिजाज, 95 डॉलर के करीब पहुंचा ब्रेंट

कच्चे तेल की कीमतों में 3 दिन की तेजी के बाद ब्रेक लगा है. जानें अमेरिका-ईरान तनाव, होर्मुज सप्लाई और तेल बाजार का पूरा हाल.

कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तीन दिन की तेजी के बाद गुरुवार को थोड़ी स्थिरता देखने को मिली. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बावजूद तेल की सप्लाई पर अभी तक वैसा असर नहीं पड़ा है, जिससे ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कमी का डर कुछ कम हुआ है. ब्रेंट क्रूड करीब 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखा, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI 91 डॉलर से नीचे रहा.

पिछले तीन कारोबारी सत्रों में ब्रेंट क्रूड की कीमत 8% से ज्यादा चढ़ चुकी है. ऐसे में गुरुवार की स्थिरता से बाजार को थोड़ी राहत मिली है. हालांकि, अमेरिका-ईरान तनाव और आगे होने वाली सैन्य कार्रवाई पर निवेशकों की नजर बनी हुई है.

ट्रंप ने क्या कहा और बाजार ने कैसे लिया संकेत?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जब पूछा गया कि ईरान पर अमेरिका की बमबारी कितने समय तक जारी रह सकती है, तो उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि यह ज्यादा लंबे समय तक चलेगी. हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि अमेरिका जरूरत पड़ने पर एक और हमला करने के लिए तैयार है.

अमेरिका के नए हमलों के जवाब में ईरान ने भी मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं. यानी तनाव अभी खत्म नहीं हुआ है और इसी वजह से तेल बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है.

कच्चे तेल की तेजी पर कैसे लगा ब्रेक?

तेल की कीमतों में तेजी पर सबसे बड़ा ब्रेक इस बात से लगा है कि फारस की खाड़ी से कच्चे तेल की सप्लाई अभी जारी है. अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट के मुताबिक, सोमवार को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से करीब 1.7 करोड़ बैरल तेल बाहर निकला. इस रास्ते से तेल का प्रवाह औसतन करीब 80 लाख बैरल रोजाना रहा है.

इसका सीधा मतलब है कि सप्लाई पूरी तरह नहीं रुकी है. यही वजह है कि ग्लोबल बाजार में कच्चे तेल की कमी का दबाव फिलहाल ज्यादा नहीं बढ़ा है.

अमेरिका के तेल भंडार में क्या हुआ?

अमेरिका के कच्चे तेल के भंडार में भी पिछले सप्ताह गिरावट आई है. एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिकी क्रूड स्टॉकपाइल 45 लाख बैरल घटा.

यह जुलाई के अंत के बाद पहली साप्ताहिक गिरावट है. वहीं, ओक्लाहोमा के कुशिंग में तेल भंडार मामूली बढ़कर 2.25 करोड़ बैरल हो गया. गैसोलीन के भंडार में गिरावट दर्ज की गई.

आगे तेल की कीमतों पर किसकी नजर रहेगी?

तेल बाजार में अब दो चीजें सबसे अहम हैं. पहली, अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव आगे कितना बढ़ता है और दूसरी, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल की सप्लाई कितनी सामान्य रहती है.

शेवरॉन के CEO माइक विर्थ के मुताबिक, फारस की खाड़ी से तेल की सप्लाई जारी रहने के कारण बाजार संतुलन के करीब पहुंच रहा है. हालांकि, उन्होंने अमेरिका-ईरान तनाव को अब भी चिंता की वजह बताया. इस साल कच्चे तेल की कीमतें करीब 60% ऊपर जा चुकी हैं. डीजल जैसे रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स में तेजी इससे भी ज्यादा रही है. इसकी वजह मिडिल ईस्ट के साथ रूस-यूक्रेन संघर्ष से जुड़ी सप्लाई में रुकावटें भी हैं.

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By सौम्या शाहदेव

सौम्या शाहदेव प्रभात खबर डिजिटल में बिजनेस कंटेंट राइटर हैं. वह शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, टैक्स, सरकारी योजनाओं, बैंकिंग और रोजमर्रा की आर्थिक खबरों को सरल और सटीक भाषा में पाठकों तक पहुंचाती हैं. उनका फोकस ऐसी खबरें लिखने पर रहता है जो सीधे आम लोगों की जिंदगी और जेब पर असर डालती हैं.

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