बढ़े एक्‍साइज ड्यूटी के राजस्‍व से मोदी सरकार बनायेगी नयी सड़कें

नयी दिल्‍ली :सरकारी सूत्रों के अनुसार इस पैसे का उपयोग नयी सड़कों के निर्माण के लिए किया जायेगा. सरकार ने पहले भी कहा है कि वह इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर पर विशेष ध्‍यान देगी और इसके विकास के लिए योजनाएं बनायी जा रही हैं. इससे लगता है कि नरेंद्र मोदी सरकार यूपीए सरकार की तरह इन टैक्‍स आदि […]

नयी दिल्‍ली :सरकारी सूत्रों के अनुसार इस पैसे का उपयोग नयी सड़कों के निर्माण के लिए किया जायेगा. सरकार ने पहले भी कहा है कि वह इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर पर विशेष ध्‍यान देगी और इसके विकास के लिए योजनाएं बनायी जा रही हैं. इससे लगता है कि नरेंद्र मोदी सरकार यूपीए सरकार की तरह इन टैक्‍स आदि के मोर्चे पर उदारता नहीं दिखाने वाली है.

उल्‍लेखनीय है कि सरकार ने पेट्रोल और डीजल दोनों पर उत्पाद शुल्क दो-दो रुपये प्रति लीटर बढा दिया है लेकिन इसका असर खुदरा कीमतों पर नहीं पडेगा और दाम पूर्ववत बने रहेंगे. दोनों पेट्रोलियम पदार्थों पर नवंबर के बाद की गई यह तीसरी उत्पाद शुल्क वृद्धि है. इससे सरकार को चालू वित्त वर्ष के शेष तीन महीनों में 6,000 करोड रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा.

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम पिछले पांच साल के निम्न स्तर पर आने से सरकार को मुद्रास्फीति पर दबाव बढाये बिना राजस्व बढाने का अवसर मिल रहा. उत्पाद शुल्क वृद्धि को मूल्यों में होने वाली संभावित गिरावट के सापेक्ष समायोजित कर दिया गया है.

एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, ‘चालू वित्त वर्ष के दौरान सरकार के महत्वकांक्षी ढांचागत विकास कार्यक्रम के लिये संसाधन जुटाने और विशेषकर 15,000 किलोमीटर सडक मार्ग के निर्माण के लिये सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर बेसिक उत्पाद शुल्क में दो रुपये लीटर वृद्धि करने का फैसला किया.’

आधिकारिक वक्तव्य में कहा गया है कि जुटाये जाने वाले अतिरिक्त संसाधन का सडक क्षेत्र को आवंटन करने से आर्थिक गतिविधियों को बढावा मिलेगा और सडक निर्माण के क्षेत्र में रोजगार के अवसर पैदा होंगे.

इससे पहले सरकार ने 12 नवंबर को दोनों पेट्रोलियम उत्पादों पर डेढ रुपये लीटर और उसके बाद दो दिसंबर को पेट्रोल पर 2.25 रुपये और डीजल पर एक रुपये लीटर उत्पाद शुल्क बढाया था.इन्हें मिलाकर सरकार उत्पाद शुल्क वृद्धि से चालू वित्त वर्ष में 17,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व जुटा सकेगी.

सभी नये राष्ट्रीय राजमार्ग कंक्रीट के होंगे : गडकरी

परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने भी नये सड़कों के निर्माण की वकालत की है और कहा कि केंद्र की सभी नयी सडक परियोजनाओं में कंक्रीट का इस्तेमाल होगा. उन्‍होंने आज यहां संवाददाताओं से कहा, ‘हम जो भी नयी सडकें बनाएंगे, वे कंक्रीट की होंगी.’

गडकरी ने बताया कि सीमेंट की मौजूदा 350 रुपये प्रति बैग की दर की तुलना में मंत्रालय को मुंबई के पास ऐसा आपूर्तिकर्ता मिला है जो 120 रुपये प्रति बैग की दर पर आपूर्ति के लिए तैयार है. इसमें कर व परिवहन की लागत शामिल नहीं है. उन्‍होंने महाराष्ट्र सरकार और स्थानीय निकायों को इसका लाभ उठाने की सलाह दी है.

उन्‍होंने बताया कि राजमार्ग निर्माण की गति 30 किलोमीटर प्रतिदिन करने का लक्ष्य 18 माह में हासिल कर लिया जाएगा. पहले यह लक्ष्य 24 माह में हासिल होने की उम्मीद है. उन्‍होंने कहा कि 190 सडक परियोजनाएं जो अटकी हुई थीं उनमें से 95 प्रतिशत में काम शुरू हो गया है.

गडकरी ने ऐसी प्रौद्योगिकियों के इस्तेमाल की वकालत की जिसमें तेल के एक उप उत्पाद का इस्तेमाल सडक बिछाने पर किया जाता है. उन्‍होंने बताया कि केंद्र ने हाल में इस बारे में अधिसूचना जारी की है. मंत्री ने कहा कि इसके अलावा मुंबई-गोवा राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-17) को जल्द चार लेन की कंक्रीट की सडक में बदला जाएगा.

राष्ट्रीय राजमार्ग-17 पर कार्य के बारे में पूछे जाने पर गडकरी ने कहा कि सरकार ने 15 पुलों पर प्राथमिकता के आधार पर काम शुरू कर दिया है. लेकिन भूमि अधिग्रहण से संबंधित कुछ समस्या है, जिसके लिए उन्‍होंने महाराष्ट्र सरकार से मदद मांगी है. उन्‍होंने कहा कि भविष्य में कोई भी ऐसा काम शुरू नहीं किया जाएगा, जिसमें 80 प्रतिशत तक भूमि अधिग्रहण नहीं पूरा हो चुका है.

रायगढ जिले में एनएच-17 के साथ करनाला पक्षी अभयारण्य स्ट्रेच के बारे में पूछे जाने पर गडकरी ने कहा कि एक एनजीओ ने पर्यावरण को नुकसान का हवाला देते हुए अदालत से इस पर स्थगन मांगा है. उन्‍होंने कहा कि इसका समाधान जल्द हो जाएगा.

गडकरी ने बताया कि पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने पदभार संभालने के बाद महाराष्ट्र में 71 परियोजनाओं को मंजूरी दी है. उन्‍होंने कहा कि सडक सुरक्षा में सुधार उनके मंत्रालय की प्राथमिकता है. उन्‍होंने कहा कि मंत्रालय का लक्ष्य साल में दुर्घटनाओं में मृतकों की संख्या को मौजूदा के डेढ लाख सालाना से आधे पर लाने का है.

उन्‍होंने कहा कि आटोमेशन, लाइसेंस, परीक्षण और रिकार्डकीपिंग के कंप्यूटरीकरण से आरटीओ को समाप्त करने जैसे उपायों से सडक सुरक्षा में सुधार किया जा रहा है. उन्‍होंने बताया कि हाल में एक जांच में पाया गया कि 30 प्रतिशत ड्राइविंग लाइसेंस बोगस हैं.

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