Sugauli Vidhansabha: तीन बार विधायक, दो बार मंत्री, फिर ऐसे हुई रामचंद्र सहनी की हार

Sugauli Vidhansabha: रामचंद्र सहनी बिहार के वरिष्ठ भाजपा नेता और तीन बार सूगौली से विधायक रह चुके हैं. उन्होंने मंत्री के रूप में भी विभिन्न विभागों में कार्य किया. सादगी, अनुशासन और जनसेवा से जुड़ी उनकी राजनीति आज भी उन्हें जनता से जोड़ती है. वे बिहार की राजनीति में एक प्रेरणास्रोत बने हुए हैं.

Sugauli Vidhansabha: रामचंद्र सहनी बिहार की राजनीति के एक अनुभवी और लोकप्रिय नेता हैं, जिन्होंने सुगौली विधानसभा सीट से तीन बार जीत दर्ज की. वे राज्य सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं. अपनी सादगी, जनसेवा और संगठनात्मक क्षमता के कारण वे भाजपा और जनता के बीच एक विश्वसनीय चेहरा बने रहे.

रामचंद्र सहनी बिहार के पूर्व विधायक और राजनीति के अनुभवी नेता हैं. उन्होंने वर्षों तक सुगौली विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी के रूप में तीन बार (2005, 2010, 2015) जीत दर्ज की है. उनका जन्म बिहार के पूर्वी चंपारण के काइथवालिया में 2 मार्च 1944 को हुआ था.

रामचंद्र सहनी के बारे में जानिए

सहनी ने बिहार सरकार में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं. वे 2005 में पहली बार विधायक बने और इसके बाद उन्हें राज्य सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी दी गई. उन्होंने पर्यावरण एवं वन विभाग तथा खनिज एवं भूविज्ञान विभाग में राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया. अपने कार्यकाल में उन्होंने ग्रामीण विकास, पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग पर विशेष ध्यान दिया.

राजनीति के साथ-साथ रामचंद्र सहनी का सामाजिक क्षेत्र में भी बड़ा योगदान रहा है. राजनीति में आने से पहले वे शिक्षा और कृषि के क्षेत्र से जुड़े रहे. उनका यह अनुभव उन्हें जनता से जोड़ता रहा और वे हमेशा जमीन से जुड़े नेता के रूप में पहचान बनाए रहे हैं.

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2020 में हार गए चुनाव

रामचंद्र सहनी की छवि एक अनुशासित, संगठनात्मक रूप से मजबूत और साफ-सुथरे नेता की रही है. 2020 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने फिर से प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा, हालांकि वे चुनाव जीत नहीं सके. रामचंद्र सहनी आज भी बिहार की राजनीति में एक ऐसा नाम हैं जिनका अनुभव, सादगी और सेवा भाव के लिए जानें जाते हैं.

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Author: Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.