रामगढ़ में नफरत पर भारी भाईचारा: रामनवमी पर हिंदू-मुस्लिम समुदाय ने साथ खेली लाठी और तलवार

Ramgarh Ram Navami 2026: रामगढ़ का गोला प्रखंड 'मोहब्बत की मिसाल' पेश कर रहा है. 100 वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार, रामनवमी के जुलूस में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने न केवल शिरकत की, बल्कि पारंपरिक लाठी-खेल में भी जौहर दिखाये. पढ़ें भाईचारे की इस खूबसूरत विरासत की पूरी रिपोर्ट.

Ramgarh Ram Navami 2026, रामगढ़ (राज कुमार): रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड क्षेत्र में रामनवमी का पर्व शुक्रवार को पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया. इस दौरान कुसुमडीह-हेरमदगा गांव ने अपनी 100 साल पुरानी अनोखी परंपरा से सबका ध्यान अपनी ओर खींचा.

सौहार्द की मिसाल बना कुसुमडीह-हेरमदगा

कुसुमडीह-हेरमदगा गांव में करीब एक सदी से हिंदू-मुस्लिम एकता की जो परंपरा चली आ रही है, वह आज भी उतनी ही मजबूत है. रामनवमी के भव्य जुलूस में मुस्लिम समाज के लोगों ने न केवल सक्रिय भागीदारी निभाई, बल्कि भाईचारे का एक अनुकरणीय उदाहरण पेश किया.

जुलूस में दिखा पारंपरिक कौशल

शोभा यात्रा के दौरान दोनों समुदायों के लोगों ने एक साथ मिलकर लाठी खेल, तलवारबाजी और अन्य पारंपरिक करतबों का प्रदर्शन किया. जुलूस का जगह-जगह पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया, जिससे पूरा माहौल और भी भव्य और उत्साहपूर्ण हो गया.

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सेवा और सद्भाव का संदेश

मुस्लिम समुदाय की ओर से जुलूस में शामिल श्रद्धालुओं के बीच शरबत, पानी और बिस्कुट का वितरण किया गया. इस पहल ने आपसी प्रेम और सहयोग की भावना को और भी मजबूत किया. इस कदम से पूरे क्षेत्र में एक बार फिर भाईचारे और एकता का संदेश गूंजता रहा.

दोनों समुदायों की साझी भागीदारी

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, यहां वर्षों से दोनों समुदाय मिल-जुलकर हर पर्व मनाते हैं. रामनवमी में जहां मुस्लिम समाज बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता है, वहीं मोहर्रम के दौरान हिंदू समाज भी ताजिया उठाने और उसके आयोजन में अपना पूरा सहयोग देता है.

प्रेरणादायक संदेश के साथ संपन्न हुआ पर्व

गोला प्रखंड में इस बार का रामनवमी पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक समरसता और आपसी भाईचारे का एक बेहद मजबूत संदेश भी देकर गया. इस खास अवसर पर दोनों समुदायों के प्रबुद्ध नागरिक और बड़ी संख्या में युवा मौजूद रहे.

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लेखक के बारे में

Published by: Sameer Oraon

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