रहीम दास बोले – ऊगत जाही किरन सों…

ऊगत जाही किरन सों, अथवत ताही कांति । त्यों रहीम सुख-दुख सबै, बढ़त एक ही भांति ।। अर्थात – सूर्य जिस ओज और उत्साह से उदय होता है, उसी चमक और दीप्ति के साथ अस्त होता है. ऐसे ही धीर-गंभीर और विवकी पुरुष भी सुख -दु:ख, लाभ-हानि, मान-अपमान आदि सभी स्थितियों में सदैव सम रहते […]

ऊगत जाही किरन सों, अथवत ताही कांति ।

त्यों रहीम सुख-दुख सबै, बढ़त एक ही भांति ।।

अर्थात – सूर्य जिस ओज और उत्साह से उदय होता है, उसी चमक और दीप्ति के साथ अस्त होता है. ऐसे ही धीर-गंभीर और विवकी पुरुष भी सुख -दु:ख, लाभ-हानि, मान-अपमान आदि सभी स्थितियों में सदैव सम रहते हैं. अर्थात – विचलित नहीं होते.

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