रहीम दास बोले- आवत काज रहीम कहि…
आवत काज रहीम कहि, गाढ़े बंधु सनेह !!... जीरन होत न पेड़ ज्यों, थामें बरै बरेह !! अर्थात रहीम कहते हैं, संकट की घड़ी में अपने नाते- रिश्तेदार ही काम आते हैं, जैसे वट को कोई वृक्ष गिराने लगता है तो उससे सजातीय वृक्ष उसे सहारा देकर थाम लेते हैं और वह फिर से फलने-फूलने […]
By Prabhat Khabar Digital Desk |
December 29, 2017 8:15 AM
आवत काज रहीम कहि, गाढ़े बंधु सनेह !!
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जीरन होत न पेड़ ज्यों, थामें बरै बरेह !!
अर्थात
रहीम कहते हैं, संकट की घड़ी में अपने नाते- रिश्तेदार ही काम आते हैं, जैसे वट को कोई वृक्ष गिराने लगता है तो उससे सजातीय वृक्ष उसे सहारा देकर थाम लेते हैं और वह फिर से फलने-फूलने लगता है.
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