रहीम दास बोले: अनुचित उचित रही लुध…

अनुचित उचित रही लुध, करहि बड़ेन के जोर !... ज्यों ससि के संयोग ते, पचवत आगि चकोर !! अर्थात महान् लोगों का सहयोग और समर्थन पाकर कभी-कभी छोटे लोग भी बड़े-बड़े काम कर जाते हैं. जैसे चंद्रमा के प्रेम में स्वंय को भूलकर चकोर अंगारे खाकर पचा लेता है.

By Prabhat Khabar Digital Desk | December 21, 2017 8:23 AM

अनुचित उचित रही लुध, करहि बड़ेन के जोर !

ज्यों ससि के संयोग ते, पचवत आगि चकोर !!

अर्थात

महान् लोगों का सहयोग और समर्थन पाकर कभी-कभी छोटे लोग भी बड़े-बड़े काम कर जाते हैं. जैसे चंद्रमा के प्रेम में स्वंय को भूलकर चकोर अंगारे खाकर पचा लेता है.