गाड़ी का पॉल्यूशन इतने दिनों में कराएं रिन्यू, वरना घर पर भेजा जा सकता है चलान, जान लें नियम और फाइन

लंबा समय हो गया है अपनी कार या बाइक का पॉल्यूशन सर्टिफिकेट (PUC) रिन्यू कराए? अब बिना रोके घर बैठे ₹10,000 का चालान आ सकता है. जानिए कैसे AI कैमरे आपकी नंबर प्लेट स्कैन कर रहे हैं और आप इस भारी जुर्माने से कैसे बच सकते हैं.

अगर आपके पास कार या दोपहिया वाहन है और आपने लंबे समय से अपनी गाड़ी का पॉल्यूशन सर्टिफिकेट (PUC) रिन्यू नहीं कराया है, तो अब आपको अलर्ट होने की जरुरत है. पहले लोग ट्रैफिक पुलिस को देखकर रास्ता बदल लेते थे, लेकिन अब तकनीक इतनी एडवांस हो गई है कि पुलिस आपको रास्ते में रोकेगी भी नहीं और आपके मोबाइल पर भारी-भरकम फाइन का मैसेज आ जाएगा. जी हां, अब एक्सपायर्ड पॉल्यूशन सर्टिफिकेट वाले वाहनों का ई-चालान ऑटोमैटिक तरीके से सीधे घर भेजा जा रहा है. आइए जानते हैं पॉल्यूशन को कितने दिनों में रिन्यू करना चाहिए.

कैसे कट रहा है घर बैठे चालान?

परिवहन विभाग ने अब सुपरविजन सिस्टम को पूरी तरह से डिजिटल कर दिया है और इसे 'VAHAN' डेटाबेस से जोड दिया है. दिल्ली-NCR समेत देश के कई बडे शहरों में चौराहों, सडकों और यहां तक कि पेट्रोल पंपों पर एडवांस AI (Artificial Intelligence) कैमरे लगा दिए गए हैं.

जब आपकी गाड़ी इन कैमरों के सामने से गुजरती है, तो ये कैमरे तुरंत आपकी नंबर प्लेट को स्कैन कर लेते हैं. नंबर स्कैन होते ही सिस्टम सेकंडों में यह चेक कर लेता है कि आपकी गाड़ी का PUC वैध है या एक्सपायर हो चुका है. अगर सर्टिफिकेट एक्सपायर मिलता है, तो सिस्टम बिना किसी ह्यूमन इंटरफेयर के ऑटोमैटिक ई-चालान जनरेट कर देता है और आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर SMS आ जाता है.

नियम और जुर्माने से जुड़े मुख्य फैक्ट 

जुर्माना: मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 190(2) के तहत, बिना वैध मानवीय सर्टिफिकेट के गाडी चलाना एक गंभीर यातायात अपराध है. इसके लिए ₹10,000 तक का भारी जुर्माना लगाया जा सकता है.

सजा का प्रावधान: चालान न भरने या बार-बार नियम तोड़ने पर 6 महीने तक की जेल या गाड़ी का रजिस्ट्रेशन (RC) सस्पेंड भी किया जा सकता है.

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बीमा क्लेम में परेशानी: अगर बिना वैध PUC के गाडी का एक्सीडेंट हो जाता है, तो बीमा कंपनियां मोटर इंश्योरेंस क्लेम देने से भी साफ इनकार कर सकती हैं.

इसे एक उदाहरण से समझें (Example)

मान लीजिए, दिल्ली में रहने वाले रमेश की कार का सर्टिफिकेट पिछले महीने ही एक्सपायर हो गया था. रमेश ने सोचा कि जब तक रास्ते में कोई ट्रैफिक पुलिस वाला रोककर कागज नहीं मांगता, तब तक चालान से बचे रहेंगे. एक दिन रमेश ऑफिस जाते समय पेट्रोल पंप पर तेल भरवाने रुके.

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पेट्रोल पंप पर लगे AI कैमरे ने रमेश की गाड़ी का नंबर ऑटोमैटिक स्कैन कर लिया. VAHAN डेटाबेस में PUC एक्सपायर्ड मिला. रमेश अभी पेट्रोल के पैसे ही दे रहे थे कि उनके फोन पर परिवहन विभाग का मैसेज आ गया— "बिना वैध PUC के वाहन चलाने पर ₹10,000 का ई-चालान काटा गया है." रमेश को किसी ने नहीं रोका, फिर भी उन्हें घर बैठे यह भारी जुर्माना भरना पड़ा.

चालान से कैसे बचें?

अपनी गाड़ी के PUC की वैलिडिटी समय-समय पर 'Parivahan' वेबसाइट या 'mParivahan' ऐप पर चेक करते रहें. नियम के अनुसार, नई गाड़ियों के लिए पहला PUC 1 साल के लिए वैध होता है. इसके बाद पुरानी गाड़ियों के लिए इसे हर 6 महीने में रिन्यू कराना अनिवार्य है. मात्र ₹80 से ₹150 रुपये खर्च करके पेट्रोल पंप या ऑथराइज्ड सेंटर से पॉल्यूशन सर्टिफिकेट बनवाया जा सकता है. ₹10,000 के भारी जुर्माने से बचने का यही सबसे आसान और समझदारी भरा तरीका है.

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लेखक के बारे में

By शिवांश शेखर

शॉर्ट बायो 

शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. ऑटो सेक्शन में कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, खासियत, टिप्स, कंपेरिजन और सपेक्स से संबंधित खबरें कवर करते हैं.

विस्तृत बायो 

शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट पत्रकार हैं, जो पिछले 3 वर्षों से डिजिटल मीडिया में ऑटो और खेल जगत से जुड़ी खबरों के बारे में लगातार लिखते हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. ऑटो सेक्शन में उनकी रूचि कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, स्पेसिफिकेशन, टिप्स, ट्रिक्स और कंपेरिजन से जुड़े विषयों में है. इसके अलावा फ्लेक्स फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्रीज के बदलते ट्रेंड्स पर लगातार लिखते हैं. 

उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को सिर्फ लॉन्च, कीमत और फीचर्स के बारे में ही न बताया जाए, बल्कि यह भी जानकारी दी जाए कि वह तकनीक आम लोगों के लिए कितने काम का है, उसे इस्तेमाल करने का अनुभव कैसा रहेगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई  

बिहार राज्य के जहानाबाद जिले में जन्में शिवांश शेखर की शुरुआती शिक्षा (BSEB) से पूरी हुई. इसके बाद उन्होंने साल 2023 में चौधरी चरण सिंह यूनीवर्सिटी, मेरठ (CCSU) के अंतर्गत आने वाली इंसटीच्युट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, नोएडा (IMS) से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की. पढ़ाई के दौरान ही शिवांश की रुचि खेल और ऑटो के विषयों पर लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने खेल और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया. 

काम का सफर 

पत्रकारिता का ककहरा सीखने के बाद शिवांश का सफर एपीएन न्यूज से शुरू हुआ था. उन्होंने पत्रकारिता का समूह जागरण न्यू मीडिया में बतौर सब एडिटर खेल और अन्य खबरों की तकनीकी समझ विकसित की. जेएनएम में करीब डेढ़ साल खेल और अन्य विषयों पर काम करने के बाद उन्होंने एसियानेट न्यूज की तरफ रुख अपनाया. वहां, करीब डेढ़ साल तक ऑटोमोबाइल और स्पोर्ट्स सेक्शन में काम किया और फिर प्रभात खबर का रुख किया, जहां ऑटो बीट पर काम कर रहे हैं. ट्रेंड्स को लगातार फॉलो करते हैं.

विजन 

शिवांश का मानना है कि ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नई गाड़ियों के बारे में जानकारी नहीं देती, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारों के फैसलों और डिजिटल एक्सपिरियंस पर भी असर डालती हैं.

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