Vehicle Scrappage Policy: क्या बिहार-झारखंड के गाड़ी मालिकों को मिल रहा पुरानी कार का सही दाम?

क्या 15 साल पुरानी कार या बाइक पर आपको मिल रही है सही स्क्रैप वैल्यू और रोड टैक्स में छूट? जानिए बिहार और झारखंड में व्हीकल स्क्रैपेज नीति की असली जमीनी हकीकत.

भारत में सड़कों से पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को हटाने के उद्देश्य से लागू की गई 'व्हीकल स्क्रैपेज पॉलिसी' (Vehicle Scrappage Policy) को लेकर केंद्र सरकार लगातार कड़े कदम उठा रही है. 6 सितंबर 2026 तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो दिल्ली-एनसीआर जैसे महानगरीय क्षेत्रों में केंद्रीय पहलों का असर तेजी से देखने को मिल रहा है, लेकिन बिहार और झारखंड जैसे पूर्वी राज्यों में तस्वीर कुछ अलग है. क्या 15 साल पुरानी कार या बाइक चला रहे बिहार और झारखंड के आम वाहन मालिकों को इस नीति का वास्तविक लाभ मिल पा रहा है? स्क्रैपिंग सेंटरों की कमी, जागरूकता का अभाव और फिटनेस जांच की जटिल प्रक्रिया के कारण जमीनी स्तर पर वाहन चालकों को राहत कम और परेशानियां ज्यादा झेलनी पड़ रही हैं.

दिल्ली-एनसीआर की तर्ज पर बिहार-झारखंड में क्यों नहीं दिख रहा असर?

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा 'वाहन पोर्टल' पर उपलब्ध कराए गए डेटा के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में पुरानी गाड़ियों को स्क्रैप करने और इलेक्ट्रिक या नए वाहनों में अपग्रेड करने की प्रक्रिया बहुत तेज हुई है. वहां स्क्रैपिंग इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होने से चालकों को समय पर लाभ मिल रहा है. इसके विपरीत, बिहार और झारखंड में पंजीकृत अधिकृत वाहन स्क्रैपिंग सेंटरों (RVSF) की संख्या अभी भी काफी सीमित है. पटना, मुजफ्फरपुर, रांची और जमशेदपुर जैसे बड़े शहरों को छोड़ दें, तो छोटे जिलों में आम वाहन मालिक को अपनी पुरानी गाड़ी स्क्रैप कराने के लिए सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है, जिससे पॉलिसी का मुख्य उद्देश्य ही प्रभावित हो रहा है.

फिटनेस टेस्ट, स्क्रैपिंग सर्टिफिकेट और नए वाहन पर छूट का पूरा गणित

व्हीकल स्क्रैपेज नीति के तहत 15 साल से पुराने निजी वाहनों को अनिवार्य रूप से ऑटोमेटेड फिटनेस टेस्ट पास करना होता है. यदि गाड़ी टेस्ट में फेल हो जाती है, तो उसे स्क्रैप करना अनिवार्य है. गाड़ी स्क्रैप कराने पर मालिक को एक 'स्क्रैपिंग सर्टिफिकेट' (Certificate of Deposit) मिलता है. इस सर्टिफिकेट को दिखाने पर नई गाड़ी की खरीद पर रोड टैक्स में भारी छूट (निजी वाहनों पर 25% तक) और रजिस्ट्रेशन फीस में माफी का प्रावधान है. साथ ही ऑटोमोबाइल कंपनियां स्क्रैपेज सर्टिफिकेट पर नए वाहन के एक्स-शोरूम प्राइस पर करीब 1.5% से 3% तक का डिस्काउंट भी देती हैं. हालांकि, बिहार और झारखंड में अधिकांश वाहन मालिकों को इस कागजी प्रक्रिया और रोड टैक्स डिस्काउंट का लाभ लेने के सही तरीके की जानकारी ही नहीं है.

जमीनी हकीकत: कागजी औपचारिकताओं और इंफ्रास्ट्रक्चर की चुनौतियां

बिहार और झारखंड में पॉलिसी के सुचारू कार्यान्वयन के बीच सबसे बड़ा रोड़ा ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशनों (ATS) की कमी है. जब तक फिटनेस टेस्टिंग निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से नहीं होगी, तब तक अनधिकृत कबाड़ मंडियों का बोलबाला बना रहेगा. कबाड़ मंडियों में वाहन मालिकों को न तो सही स्क्रैप वैल्यू मिलती है और न ही आधिकारिक 'सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट', जिसके कारण वे नए वाहन पर मिलने वाली सरकारी छूट से वंचित रह जाते हैं. राज्य सरकारों को स्थानीय स्तर पर अधिकृत स्क्रैपिंग सेंटर स्थापित करने और डीलरों के साथ समन्वय बिठाने की गति को तेज करने की सख्त आवश्यकता है.

वाहन चालकों के लिए क्या है आगे का रास्ता?

यदि आपकी गाड़ी 15 साल पुरानी हो चुकी है या फिटनेस रिन्यूअल की सीमा पार कर चुकी है, तो सड़क पर चालान से बचने के लिए इसे अधिकृत चैनल के जरिए ही स्क्रैप कराएं. मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट की आधिकारिक 'वाहन पोर्टल' सर्विस पर जाकर अपने नजदीकी RVSF केंद्र की जानकारी प्राप्त की जा सकती है. बिहार और झारखंड के परिवहन विभागों द्वारा आने वाले महीनों में नए स्क्रैपिंग सेंटरों को मंजूरी दिए जाने की उम्मीद है, जिससे प्रक्रिया और अधिक सुलभ हो सकेगी.

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By राजीव कुमार

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