रॉयल एनफील्ड हिमालयन 440 vs हिमालयन 450: किसे खरीदने पर मंथली EMI सबसे कम देनी पड़ेगी?

क्या आप Royal Enfield Himalayan 440 या 450 खरीदने की सोच रहे हैं? जानिए दोनों बाइक्स की मासिक EMI की तुलना. यह जानकारी आपको सही फैसला लेने में मदद करेगी.

रॉयल एनफील्ड ने हाल ही में भारत में हिमालयन 440 (Himalayan 440) को लॉन्च किया है. यह कंपनी की मशहूर ADV रेंज में नया मॉडल है, जिसमें पहले से हिमालयन 450 शामिल है. 2.29 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) की शुरुआती कीमत पर आई नई रॉयल एनफील्ड हिमालयन 440 तीन कलर ऑप्शन में उपलब्ध है जिसमें मस्टैंग ब्राउन, सेला ब्लैक और नेलोंग व्हाइट शामिल हैं. कंपनी ने इस बाइक की बुकिंग पूरे देश में अपनी डीलरशिप और ऑनलाइन माध्यम से शुरू कर दी है.

हिमालयन 440 vs 450: इंजन ट्रांसमिशन

रॉयल एनफील्ड हिमालयन 440 में वही 443 cc का LS440 इंजन दिया गया है जो स्क्रैम 440 में मिलता है. इसका 6-स्पीड ट्रांसमिशन भी स्क्रैम से ही लिया गया है. कंपनी इस बाइक के जरिए उन ग्राहकों को साधना चाहती है जो हिमालयन 450 की कॉम्पलिकैंट्स में पड़े बिना एक किफायती ADV खरीदना चाहते हैं.

हिमालयन 440 vs 450: EMI तुलना

अगर आप रॉयल एनफील्ड की हिमालयन बाइक खरीदने की योजना बना रहे हैं और 440 व 450 के बीच कंफ्यूजन में हैं, तो यहां दोनों की मासिक EMI की तुलना दी गई है.

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हिमालयन 440 vs 450: कितनी बनेगी महीने की EMI

रॉयल एनफील्ड हिमालयन 440 और हिमालयन 450 की EMI निकालने के लिए हमने बाइक की एक्स-शोरूम कीमत का 100% लोन माना है. इस पर ब्याज दर 9.5% रखी गई है और लोन चुकाने की अवधि 24 महीने तय की गई है.

वेरिएंट और कीमत जानकारी

EMI कैलकुलेट करने के लिए हिमालयन 440 के सिंगल वेरिएंट को लिया गया है, क्योंकि इसके तीनों कलर ऑप्शन की कीमत एक ही है. दूसरी तरफ हिमालयन 450 की कीमत 3,08,029 रुपये से 3,39,564 रुपये (एक्स-शोरूम) के बीच है. इस तुलना के लिए हमने हिमालयन 450 की शुरुआती (बेस) कीमत को शामिल किया है.

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हिमालयन 440 vs 450: EMI का हिसाब

कैलकुलेशन के मुताबिक हिमालयन 440 की हर महीने की EMI 10,514 रुपये बनती है, जबकि हिमालयन 450 की हर महीने की EMI 14,143 रुपये बनती है.

इन बातों का रखें ध्यान

खरीदारों को यह ध्यान रखना चाहिए कि महीने की EMI कई बातों पर निर्भर करती है. जैसे कि चुना गया वेरिएंट, मिलने वाला ऑफर और डिस्काउंट, लिया गया लोन अमाउंट, डाउन पेमेंट की रकम, ब्याज दर और चुना गया समय आदि.

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लेखक के बारे में

By शिवांश शेखर

शॉर्ट बायो 

शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. ऑटो सेक्शन में कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, खासियत, टिप्स, कंपेरिजन और सपेक्स से संबंधित खबरें कवर करते हैं.

विस्तृत बायो 

शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट पत्रकार हैं, जो पिछले 3 वर्षों से डिजिटल मीडिया में ऑटो और खेल जगत से जुड़ी खबरों के बारे में लगातार लिखते हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. ऑटो सेक्शन में उनकी रूचि कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, स्पेसिफिकेशन, टिप्स, ट्रिक्स और कंपेरिजन से जुड़े विषयों में है. इसके अलावा फ्लेक्स फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्रीज के बदलते ट्रेंड्स पर लगातार लिखते हैं. 

उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को सिर्फ लॉन्च, कीमत और फीचर्स के बारे में ही न बताया जाए, बल्कि यह भी जानकारी दी जाए कि वह तकनीक आम लोगों के लिए कितने काम का है, उसे इस्तेमाल करने का अनुभव कैसा रहेगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई  

बिहार राज्य के जहानाबाद जिले में जन्में शिवांश शेखर की शुरुआती शिक्षा (BSEB) से पूरी हुई. इसके बाद उन्होंने साल 2023 में चौधरी चरण सिंह यूनीवर्सिटी, मेरठ (CCSU) के अंतर्गत आने वाली इंसटीच्युट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, नोएडा (IMS) से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की. पढ़ाई के दौरान ही शिवांश की रुचि खेल और ऑटो के विषयों पर लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने खेल और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया. 

काम का सफर 

पत्रकारिता का ककहरा सीखने के बाद शिवांश का सफर एपीएन न्यूज से शुरू हुआ था. उन्होंने पत्रकारिता का समूह जागरण न्यू मीडिया में बतौर सब एडिटर खेल और अन्य खबरों की तकनीकी समझ विकसित की. जेएनएम में करीब डेढ़ साल खेल और अन्य विषयों पर काम करने के बाद उन्होंने एसियानेट न्यूज की तरफ रुख अपनाया. वहां, करीब डेढ़ साल तक ऑटोमोबाइल और स्पोर्ट्स सेक्शन में काम किया और फिर प्रभात खबर का रुख किया, जहां ऑटो बीट पर काम कर रहे हैं. ट्रेंड्स को लगातार फॉलो करते हैं.

विजन 

शिवांश का मानना है कि ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नई गाड़ियों के बारे में जानकारी नहीं देती, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारों के फैसलों और डिजिटल एक्सपिरियंस पर भी असर डालती हैं.

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