बाइक के हैंडल पर टांगते हैं सामान? बंद करें ये आदत, वरना होंगे भारी नुकसान और कट सकता है चालान

क्या आप भी बाइक या स्कूटर के हैंडल पर सामान टांगकर चलते हैं? यह आदत न केवल आपकी सेफ्टी के लिए गंभीर खतरा पैदा करती है, बल्कि इससे आपका भारी चालान भी कट सकता है. जानें इसके पीछे के कारण और सुरक्षित ऑप्शन.

अक्सर लोग बाइक या स्कूटर के हैंडल पर भारी सामान या राशन के थैले टांगकर गाड़ी चलाने लगते हैं. देखने में यह एक बहुत ही आसान तरीका लगता है, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से यह बेहद खतरनाक आदत है. हैंडल पर लटका हुआ सामान न केवल बाइक का संतुलन पूरी तरह से बिगाड़ देता है, बल्कि अचानक होने वाली सड़क दुर्घटनाओं और भारी ट्रैफिक चालान का मुख्य कारण भी बनता है. आइए विस्तार से समझते हैं कि हैंडल पर सामान टांगकर गाड़ी चलाने से आपकी सुरक्षा, बाइक और जेब पर क्या-क्या गंभीर असर पड़ते हैं.

बैलेंस बिगड़ना और दुर्घटना का डर

हैंडल पर सामान टांगने से गाड़ी का सेंटर ऑफ ग्रेविटी यानी संतुलन पूरी तरह बिगड़ जाता है. जब आप अचानक ब्रेक लगाते हैं या बाइक को किसी मोड़ पर मोड़ते हैं, तो लटका हुआ थैला तेजी से झूलने लगता है जिससे हैंडल पर से आपका बैलेंस पूरी तरह छूट सकता है.

कई बार थैला या उसकी डोरी सीधे फ्रंट व्हील या ब्रेक लीवर में फंस जाती है, जिससे तेज रफ्तार बाइक अचानक लॉक होकर सीधे सड़क पर पलट सकती है और आपको या राहगीरों को गंभीर चोट आ सकती है.

चालान और ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन

भारतीय मोटर वाहन अधिनियम के कड़े नियमों के अनुसार दोपहिया वाहन के स्टीयरिंग या हैंडल बार पर ऐसा कोई भी भारी सामान लटकाना पूरी तरह गैर-कानूनी है जिससे राइडर का कंट्रोल प्रभावित हो.

ट्रैफिक पुलिस इसे जानबूझकर की गई खतरनाक ड्राइविंग और ओवरलोडिंग के तहत मानकर मौके पर ही 1000 रुपये से लेकर 5000 रुपये तक का भारी चालान काट सकती है.

इसके अलावा लगातार हैंडल पर वजन लटकाकर चलाने से बाइक के महंगे सस्पेंशन, हैंडल बार और स्टीयरिंग कॉलम के जॉइंट्स पर भी बुरा असर पड़ता है.

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सुरक्षित ड्राइविंग के लिए सही विकल्प

सफर के दौरान सामान ले जाने के लिए हैंडल पर लटकाने के बजाय हमेशा सुरक्षित तरीकों का इस्तेमाल करना चाहिए. आप सामान को पीछे की सीट पर कैरियर की मदद से बंजी कॉर्ड या रबर बेल्ट से मजबूती से बांध सकते हैं.

इसके अलावा बाइक में साइड बॉक्स, टैंक बैग या फिर स्कूटर के फुटबोर्ड और अंडर-सीट स्टोरेज का उपयोग करना ही आपकी सुरक्षा और जेब दोनों के लिए बेहतर रहता है.

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लेखक के बारे में

By शिवांश शेखर

शॉर्ट बायो 

शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. ऑटो सेक्शन में कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, खासियत, टिप्स, कंपेरिजन और सपेक्स से संबंधित खबरें कवर करते हैं.

विस्तृत बायो 

शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट पत्रकार हैं, जो पिछले 3 वर्षों से डिजिटल मीडिया में ऑटो और खेल जगत से जुड़ी खबरों के बारे में लगातार लिखते हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. ऑटो सेक्शन में उनकी रूचि कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, स्पेसिफिकेशन, टिप्स, ट्रिक्स और कंपेरिजन से जुड़े विषयों में है. इसके अलावा फ्लेक्स फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्रीज के बदलते ट्रेंड्स पर लगातार लिखते हैं. 

उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को सिर्फ लॉन्च, कीमत और फीचर्स के बारे में ही न बताया जाए, बल्कि यह भी जानकारी दी जाए कि वह तकनीक आम लोगों के लिए कितने काम का है, उसे इस्तेमाल करने का अनुभव कैसा रहेगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई  

बिहार राज्य के जहानाबाद जिले में जन्में शिवांश शेखर की शुरुआती शिक्षा (BSEB) से पूरी हुई. इसके बाद उन्होंने साल 2023 में चौधरी चरण सिंह यूनीवर्सिटी, मेरठ (CCSU) के अंतर्गत आने वाली इंसटीच्युट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, नोएडा (IMS) से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की. पढ़ाई के दौरान ही शिवांश की रुचि खेल और ऑटो के विषयों पर लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने खेल और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया. 

काम का सफर 

पत्रकारिता का ककहरा सीखने के बाद शिवांश का सफर एपीएन न्यूज से शुरू हुआ था. उन्होंने पत्रकारिता का समूह जागरण न्यू मीडिया में बतौर सब एडिटर खेल और अन्य खबरों की तकनीकी समझ विकसित की. जेएनएम में करीब डेढ़ साल खेल और अन्य विषयों पर काम करने के बाद उन्होंने एसियानेट न्यूज की तरफ रुख अपनाया. वहां, करीब डेढ़ साल तक ऑटोमोबाइल और स्पोर्ट्स सेक्शन में काम किया और फिर प्रभात खबर का रुख किया, जहां ऑटो बीट पर काम कर रहे हैं. ट्रेंड्स को लगातार फॉलो करते हैं.

विजन 

शिवांश का मानना है कि ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नई गाड़ियों के बारे में जानकारी नहीं देती, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारों के फैसलों और डिजिटल एक्सपिरियंस पर भी असर डालती हैं.

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