Maruti K10 Alto खरीदने का बना रहे हैं प्लान? शोरूम जाने से पहले जानें 2 फायदे और 2 नुकसान

मारुति ऑल्टो K10 भारत की सबसे किफायती कारों में से एक है. इस आर्टिकल में जानें इसके 2 बड़े फायदे और 2 बड़े नुकसान, जो कार खरीदने से पहले आपके लिए जानना जरूरी है.

मारुति अल्टो के10 भारत की सबसे किफायती कारों में से एक है. इसमें दमदार इंजन और वेल मेंटेनेंस केबिन का जबरदस्त बैलेंस देखने को मिलता है. इसकी कीमत ऐसी है जो पिछले कुछ सालों में हैचबैक कारों की बिक्री में गिरावट के बावजूद ऑल्टो के10 को मार्केट में एक शानदार कार बनाती है. यदि आपने भी यह कार खरीदने का प्लान बनाया है, तो उससे पहले इसके 2 फायदे और 2 नुकसान के बारे में जानना जरूरी है. आइए इसके बारे में हम आपको बताते हैं.

मारुति ऑल्टो के10 खरीदने के 2 फायदे 

दमदार इंजन का ऑप्शन 

मारुति ऑल्टो के10 में 1.0 लीटर का नेचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल इंजन मिलता है, जो 5 स्पीड मैनुअल और 5 स्पीड ऑटोमैटिक मैनुअल ट्रांसमिशन लगा है. हालांकि, यह इंजन सिर्फ 69 हॉर्सपावर और 91 nm टॉर्क जेनरेट करता है, फिर भी अल्टो के10 का इंजन काफी दमदार महसूस होता है. खासकर मैन्युअल ट्रांसमिशन के साथ यह इंजन काफी पावरफुल है, जो इसे तेज रफ्तार पकड़ने में मदद करता है. 

ईजी ऑनरशिप एक्सपिरियंस 

साल 2010 में लॉन्च होने के बाद ऑल्टो के10 बढ़ती लागत और महंगाई के बावजूद भारत की सबसे किफायती कारों में से एक बनी हुई है. इसकी कीमत 3 लाख 70 हजार रुपए से शुरू हो जाती है, जो मिडिल क्लास फैमिली के लिए एक बेस्ट ऑप्शन बनती है. ऑल्टो के10 की कीमत केवल मार्केट में ही कम नहीं है, बल्कि इसकी रखरखाव और लागत भी ज्यादा नहीं है. इसके पीछे की मुख्य वजह बेस्ट फ्यूल एफिशिएंसी है, जिसपर मारुति का दावा है कि यह 24 kmpl की माइलेज दे सकती है. इसके पार्ट्स और सर्विसिंग लागत भी कम है. ऐसे में इसे लंबे समय तक मेंटनेंस में रखा जा सकता है.

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मारुति ऑल्टो के10 खरीदने के 2 नुकसान 

तेज स्पीड पर बैलेंस की कमी 

हालांकि, ऑल्टो के10 में दमदार इंजन मिलता है जो इसे तेज रफ्तार से चलाने में माहिर है, लेकिन स्टीयरिंग का सही एहसास न होने की वजह से इसे 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलाने में कॉन्फिडेंस नहीं मिलता है. हाई स्पीड पर सही डायरेक्शन में बने रहने के लिए स्टीयरिंग को बार बार घुमाना पड़ता है और केबिन के अंदर बॉडी रोल भी काफी फील होता है. तेज गति पर ब्रेक लगाने से ऑल्टो स्थिर नहीं रहती है, बल्कि हिलने लगती है. ऊबड़ खाबड़ रास्तों पर यह समस्या ज्यादा है.

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टॉप वेरिएंट्स की कीमतें ज्यादा 

मारुति सुजुकी ऑल्टो के10 की कीमत 3.70 लाख रुपए से शुरू होकर 5.45 लाख रुपए तक जाती है, जो किफायती नहीं लगती है, खासकर उस कार के लिए जिसकी कीमत किफायती है. इसके AMT वेरिएंट की कीमत 4.95 लाख रुपए से लेकर 5.45 लाख रुपए तक जाती है, जो अधिक है और मैनुअल वेरिएंट की तुलना में काफी ज्यादा एक्सपेंसिव लगती है. इससे खरीददार को मैनुअल वेरिएंट के बजाय AMT चुनने से पहले दो बार सोचना पड़ता है. 


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लेखक के बारे में

By शिवांश शेखर

शॉर्ट बायो 

शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. ऑटो सेक्शन में कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, खासियत, टिप्स, कंपेरिजन और सपेक्स से संबंधित खबरें कवर करते हैं.

विस्तृत बायो 

शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट पत्रकार हैं, जो पिछले 3 वर्षों से डिजिटल मीडिया में ऑटो और खेल जगत से जुड़ी खबरों के बारे में लगातार लिखते हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. ऑटो सेक्शन में उनकी रूचि कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, स्पेसिफिकेशन, टिप्स, ट्रिक्स और कंपेरिजन से जुड़े विषयों में है. इसके अलावा फ्लेक्स फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्रीज के बदलते ट्रेंड्स पर लगातार लिखते हैं. 

उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को सिर्फ लॉन्च, कीमत और फीचर्स के बारे में ही न बताया जाए, बल्कि यह भी जानकारी दी जाए कि वह तकनीक आम लोगों के लिए कितने काम का है, उसे इस्तेमाल करने का अनुभव कैसा रहेगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई  

बिहार राज्य के जहानाबाद जिले में जन्में शिवांश शेखर की शुरुआती शिक्षा (BSEB) से पूरी हुई. इसके बाद उन्होंने साल 2023 में चौधरी चरण सिंह यूनीवर्सिटी, मेरठ (CCSU) के अंतर्गत आने वाली इंसटीच्युट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, नोएडा (IMS) से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की. पढ़ाई के दौरान ही शिवांश की रुचि खेल और ऑटो के विषयों पर लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने खेल और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया. 

काम का सफर 

पत्रकारिता का ककहरा सीखने के बाद शिवांश का सफर एपीएन न्यूज से शुरू हुआ था. उन्होंने पत्रकारिता का समूह जागरण न्यू मीडिया में बतौर सब एडिटर खेल और अन्य खबरों की तकनीकी समझ विकसित की. जेएनएम में करीब डेढ़ साल खेल और अन्य विषयों पर काम करने के बाद उन्होंने एसियानेट न्यूज की तरफ रुख अपनाया. वहां, करीब डेढ़ साल तक ऑटोमोबाइल और स्पोर्ट्स सेक्शन में काम किया और फिर प्रभात खबर का रुख किया, जहां ऑटो बीट पर काम कर रहे हैं. ट्रेंड्स को लगातार फॉलो करते हैं.

विजन 

शिवांश का मानना है कि ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नई गाड़ियों के बारे में जानकारी नहीं देती, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारों के फैसलों और डिजिटल एक्सपिरियंस पर भी असर डालती हैं.

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