भारत के स्कूटर बाजार में क्या खेल बदल रहा है? कभी लगभग एकतरफा राज करने वाली होंडा एक्टिवा अब पहले जैसी अजेय नहीं दिख रही. बिक्री के आंकड़े बताते हैं कि एक्टिवा आज भी देश की सबसे ज्यादा बिकने वाली स्कूटर है, लेकिन बाजार में उसका दबदबा धीरे-धीरे कम हो रहा है. दूसरी तरफ टीवीएस लगातार मजबूत होती जा रही है और इलेक्ट्रिक स्कूटरों की बढ़ती लोकप्रियता पूरे सेगमेंट की तस्वीर बदल रही है. ऐसे में सवाल उठने लगा है कि क्या भारतीय स्कूटर बाजार एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है?
एक्टिवा अभी नंबर-1, लेकिन बाजार हिस्सेदारी में आई गिरावट
पिछले करीब 25 वर्षों से होंडा एक्टिवा भारतीय ग्राहकों की पहली पसंद बनी हुई है. भरोसेमंद इंजन, बेहतर माइलेज और मजबूत ब्रांड इमेज ने इसे लाखों परिवारों का पसंदीदा स्कूटर बनाया. वित्त वर्ष 2025-26 में भी एक्टिवा की बिक्री लगभग 28.45 लाख यूनिट रही, जिससे यह देश की सबसे ज्यादा बिकने वाली स्कूटर बनी रही.
हालांकि, बड़ी तस्वीर देखें तो होंडा की बाजार हिस्सेदारी लगातार नीचे आई है. एक दशक पहले जहां कंपनी का स्कूटर बाजार में हिस्सा 57 प्रतिशत के आसपास था, वहीं अब यह घटकर करीब 39 प्रतिशत रह गया है. यानी बिक्री मजबूत रहने के बावजूद प्रतिस्पर्धा पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है. यह भी पढ़ें: 25 हजार का इलेक्ट्रिक स्कूटर देगा 50 किलोमीटर की रेंज, देखें देश के सबसे सस्ते इलेक्ट्रिक स्कूटर
टीवीएस ने बढ़ाई टेंशन, जुपिटर और एनटॉर्क बने गेमचेंजर
स्कूटर बाजार में सबसे बड़ा बदलाव टीवीएस मोटर की तेजी से बढ़ती मौजूदगी है. कंपनी के जुपिटर, एनटॉर्क और जेस्ट जैसे मॉडल्स ने अलग-अलग ग्राहक वर्गों को आकर्षित किया है. खासकर जुपिटर ने फैमिली स्कूटर सेगमेंट में एक्टिवा को कड़ी चुनौती दी है.
टीवीएस की बाजार हिस्सेदारी पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ी है. जहां कभी कंपनी का हिस्सा करीब 14 प्रतिशत था, वहीं अब यह बढ़कर लगभग 28 प्रतिशत तक पहुंच चुका है. इससे साफ है कि ग्राहकों के पास अब एक्टिवा के अलावा भी मजबूत विकल्प मौजूद हैं.
इलेक्ट्रिक स्कूटरों ने बदल दिया पूरा समीकरण
भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी तेजी से बढ़ रही है और इसका असर स्कूटर सेगमेंट पर साफ दिखाई दे रहा है. पहले जहां पेट्रोल स्कूटरों का लगभग एकछत्र राज था, वहीं अब ईवी मॉडल्स ग्राहकों का ध्यान खींच रहे हैं.
टीवीएस ने अपने आईक्यूब इलेक्ट्रिक स्कूटर के जरिए इस बदलाव का फायदा उठाया है. इलेक्ट्रिक सेगमेंट में शुरुआती बढ़त मिलने से कंपनी को कुल स्कूटर बाजार में भी मजबूती मिली है. दूसरी ओर होंडा अभी अपने इलेक्ट्रिक पोर्टफोलियो को विस्तार देने की प्रक्रिया में है.
क्यों घट रहा है होंडा और टीवीएस के बीच का अंतर?
कुछ साल पहले तक होंडा और टीवीएस के बीच बिक्री का अंतर बहुत बड़ा था. लेकिन अब यह तेजी से कम हो रहा है. इसके पीछे कई कारण हैं. ग्राहकों की पसंद बदल रही है, फीचर-लोडेड स्कूटरों की मांग बढ़ रही है और इलेक्ट्रिक वाहनों की लोकप्रियता भी बाजार को प्रभावित कर रही है.
युवा खरीदार अब केवल माइलेज नहीं, बल्कि स्मार्ट फीचर्स, कनेक्टिविटी, डिजाइन और वैल्यू फॉर मनी जैसे पहलुओं को भी महत्व दे रहे हैं. इसी बदलाव का फायदा टीवीएस जैसी कंपनियों को मिल रहा है.
क्या एक्टिवा का ताज खतरे में है?
फिलहाल होंडा एक्टिवा का नंबर-1 स्थान सुरक्षित दिखाई देता है। इसकी बिक्री अभी भी किसी भी प्रतिद्वंद्वी मॉडल से काफी आगे है. लेकिन बाजार के बदलते रुझान बताते हैं कि आने वाले वर्षों में मुकाबला और दिलचस्प हो सकता है.
अगर टीवीएस अपनी मौजूदा गति बनाए रखती है और इलेक्ट्रिक स्कूटरों की मांग इसी तरह बढ़ती रहती है, तो स्कूटर बाजार में नेतृत्व की लड़ाई पहले से कहीं ज्यादा रोमांचक हो सकती है. फिलहाल एक्टिवा राजा है, लेकिन चुनौती पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो चुकी है. यह भी पढ़ें: बाजार का सामान, हेलमेट और बैग… सब कुछ रख लेगा यह इलेक्ट्रिक स्कूटर! 55 लीटर स्टोरेज के साथ बना फैमिली यूजर्स की पहली पसंद
