100cc कम्यूटर vs 160cc प्रीमियम Bike: डेली यूज के लिए कौन है बेहतर? जानें 5 साल में फ्यूल, मेंटेनेंस और रीसेल वैल्यू का पूरा गणित

रोज के सफर के लिए 100cc कम्यूटर या 160cc प्रीमियम बाइक? दोनों के 5 साल के खर्च और फायदे का गणित समझें. माइलेज, मेंटेनेंस और रीसेल वैल्यू में कौन बेहतर है, यह जानकर अपनी अगली बाइक चुनें.

रोज के काम या ऑफिस जाने के लिए बाइक चुनना एक बड़ा फैसला होता है. भारतीय बाजार में 100cc कम्यूटर और 160cc प्रीमियम सेगमेंट की डिमांड सबसे ज्यादा है. 100cc बाइक्स अपनी जबरदस्त माइलेज और कम कीमत के लिए जानी जाती हैं, वहीं 160cc बाइक्स बेहतर पावर, लुक और राइडिंग कम्फर्ट देती हैं. लेकिन 5 साल के इस्तेमाल में कौन-सी बाइक आपकी जेब पर भारी पड़ेगी? आइए फ्यूल, मेंटेनेंस और रीसेल वैल्यू के गणित से समझते हैं.

माइलेज और फ्यूल का खर्च

फ्यूल के मामले में 100cc बाइक्स माइलेज की रानी मानी जाती हैं. यह सेगमेंट असल रास्तों पर 60 से 70 किमी प्रति लीटर का माइलेज आसानी से दे देता है. अगर आप रोज 30 किमी बाइक चलाते हैं, तो 5 साल में करीब 55,000 किमी का सफर तय होगा, जिसके लिए लगभग 850 लीटर पेट्रोल लगेगा. दूसरी ओर 160cc बाइक्स ज्यादा पावरफुल होती हैं, इसलिए इनका माइलेज 40 से 45 किमी प्रति लीटर के आसपास ही रहता है. इतने ही सफर के लिए आपको लगभग 1300 लीटर पेट्रोल भरवाना पड़ेगा. यानी 5 साल में 100cc बाइक पेट्रोल के खर्च में आपके 40,000 से 50,000 रुपये तक आसानी से बचा सकती है.

मेंटेनेंस और स्पेयर पार्ट्स की लागत

सर्विसिंग और रखरखाव के मामले में भी दोनों में बड़ा अंतर देखने को मिलता है. 100cc बाइक की बनावट सिम्पल होती है, इसलिए इसकी सर्विस आसान और सस्ती होती है. इसके इंजन ऑयल, चेन सेट और ब्रेक शू जैसे स्पेयर पार्ट्स काफी सस्ते आते हैं. 5 साल में इसका कुल मेंटेनेंस खर्च 15,000 से 20,000 रुपये के बीच रहता है. वहीं 160cc प्रीमियम बाइक्स में चौड़े टायर, डिस्क ब्रेक, ABS और एडवांस इलेक्ट्रॉनिक्स होते हैं. इसके पार्ट्स महंगे होते हैं और लेबर चार्ज भी ज्यादा लगता है, जिससे 5 साल में मेंटेनेंस का खर्च 30,000 से 40,000 रुपये तक पहुंच जाता है.

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रीसेल वैल्यू और सेकंड हैंड मार्केट

इस्तेमाल के बाद जब बाइक बेचने की बात आती है, तो 100cc बाइक्स बाजी मार लेती हैं. भारतीय सेकंड हैंड मार्केट में सस्ती और टिकाऊ कम्यूटर बाइक्स की मांग हमेशा बनी रहती है. 5 साल चलाने के बाद भी आपको 100cc बाइक की मूल कीमत का 40% से 50% हिस्सा आसानी से वापस मिल जाता है. इसके विपरीत 160cc प्रीमियम बाइक्स की वैल्यू समय के साथ तेजी से गिरती है. 5 साल बाद इनकी रीसेल वैल्यू मूल कीमत की सिर्फ 30 से 40 प्रतिशत ही रह जाती है, जिससे ओनर को रीसेल पर भी नुकसान उठाना पड़ता है.

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आपके लिए कौन-सी बाइक सही ऑप्शन है?

अगर आपकी पहली प्राथमिकता भारी बचत, कम मेंटेनेंस, आसान राइडिंग और रोज का ट्रैफिक निपटना है, तो 100cc कम्यूटर बाइक आपके लिए एकदम सही फैसला है. यह आपकी जेब पर बिल्कुल बोझ नहीं डालती. हालांकि, अगर आप हाईवे पर भी लंबी राइड करते हैं, आपको तेज पिकअप, स्पोर्टी लुक, बेहतर ग्रिप और ज्यादा सेफ्टी फीचर्स की जरूरत महसूस होती है, तो 160cc प्रीमियम बाइक पर थोड़ा ज्यादा पैसा खर्च करना आपके लिए ज्यादा फायदेमंद और आरामदायक रहेगा.

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लेखक के बारे में

By शिवांश शेखर

शॉर्ट बायो 

शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. ऑटो सेक्शन में कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, खासियत, टिप्स, कंपेरिजन और सपेक्स से संबंधित खबरें कवर करते हैं.

विस्तृत बायो 

शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट पत्रकार हैं, जो पिछले 3 वर्षों से डिजिटल मीडिया में ऑटो और खेल जगत से जुड़ी खबरों के बारे में लगातार लिखते हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. ऑटो सेक्शन में उनकी रूचि कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, स्पेसिफिकेशन, टिप्स, ट्रिक्स और कंपेरिजन से जुड़े विषयों में है. इसके अलावा फ्लेक्स फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्रीज के बदलते ट्रेंड्स पर लगातार लिखते हैं. 

उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को सिर्फ लॉन्च, कीमत और फीचर्स के बारे में ही न बताया जाए, बल्कि यह भी जानकारी दी जाए कि वह तकनीक आम लोगों के लिए कितने काम का है, उसे इस्तेमाल करने का अनुभव कैसा रहेगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई  

बिहार राज्य के जहानाबाद जिले में जन्में शिवांश शेखर की शुरुआती शिक्षा (BSEB) से पूरी हुई. इसके बाद उन्होंने साल 2023 में चौधरी चरण सिंह यूनीवर्सिटी, मेरठ (CCSU) के अंतर्गत आने वाली इंसटीच्युट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, नोएडा (IMS) से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की. पढ़ाई के दौरान ही शिवांश की रुचि खेल और ऑटो के विषयों पर लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने खेल और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया. 

काम का सफर 

पत्रकारिता का ककहरा सीखने के बाद शिवांश का सफर एपीएन न्यूज से शुरू हुआ था. उन्होंने पत्रकारिता का समूह जागरण न्यू मीडिया में बतौर सब एडिटर खेल और अन्य खबरों की तकनीकी समझ विकसित की. जेएनएम में करीब डेढ़ साल खेल और अन्य विषयों पर काम करने के बाद उन्होंने एसियानेट न्यूज की तरफ रुख अपनाया. वहां, करीब डेढ़ साल तक ऑटोमोबाइल और स्पोर्ट्स सेक्शन में काम किया और फिर प्रभात खबर का रुख किया, जहां ऑटो बीट पर काम कर रहे हैं. ट्रेंड्स को लगातार फॉलो करते हैं.

विजन 

शिवांश का मानना है कि ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नई गाड़ियों के बारे में जानकारी नहीं देती, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारों के फैसलों और डिजिटल एक्सपिरियंस पर भी असर डालती हैं.

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