आज का दर्शन : आस्था का महाकेंद्र बना संकट मोचन मंदिर, 42 साल पुराना है इतिहास

Nawada News: शहर के मोचन हनुमान मंदिर जिले की आस्था का प्रमुख केंद्र है. पिछले कई दशकों से लाखों लोग इस दरबार से जुड़े हैं.

Nawada News: (नवादा मुख्यालय से मनोज मिश्रा की रिपोर्ट). नवादा कार्यालय. संकट मोचन हनुमान मंदिर जिले की आस्था का प्रमुख केंद्र है. पिछले कई दशकों से लाखों लोग इस दरबार से जुड़े हैं. शुभ कार्य हो, नयी गाड़ी की खरीदारी हो या चुनाव में नामांकन, श्रद्धालु सबसे पहले यहां माथा टेककर ही अपने काम की शुरुआत करते हैं. मंगलवार और शनिवार को यहां मेले जैसा नजारा होता है, जबकि रामनवमी के दिन श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ता है. संकट मोचन मंदिर में मौजूद हनुमान जी की प्रतिमा करीब 42 साल पहले स्थापित की गयी थी. उस समय यह स्थान सुनसान था और सड़क से नीचे खाईनुमा जगह पर प्रतिमा स्थापित की गयी थी. काफी समय तक प्रतिमा खुले में ही विराजमान रही. इसके बाद महाबली हनुमान के भक्तों का कारवां बढ़ता गया और यह शहर का सबसे बड़ा आस्था केंद्र बन गया.

बनारस से लायी गयी थी पांच फुट ऊंची प्रतिमा

मंदिर से जुड़े लोगों के अनुसार, इसकी स्थापना 1979 में बाबा निरंकार दास जी ने की थी. उन्होंने ही लंबे समय तक पूजा-अर्चना की थी. तब बनारस की प्रसिद्ध नाटी इमली से हनुमान जी की 5 फुट ऊंची प्रतिमा लायी गयी थी. आज भी उसी स्वरूप में विराजमान हनुमान जी का दर्शन करने के लिए हजारों की भीड़ उमड़ती है.

महंत व पुजारी की अगुवाई में होती है पूजा

महंत नकुल दास उदासीन और पुजारी नारायण देव उदासीन की अगुवाई में हर दिन हजारों लोग पूजा-अर्चना करते हैं. हर सप्ताह 10,000 से अधिक लोग मंदिर पहुंचते हैं. वहीं मंगलवार और शनिवार को तकरीबन ढाई हजार श्रद्धालु दर्शन करते हैं. दो माह पहले ही मंदिर से सटा लक्ष्मी नारायण मंदिर भी बनकर तैयार हुआ है.

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Published by: PANCHDEV KUMAR

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