मुख्य बातें:
E-Tricycle Distribution: बिहार के सीमांचल क्षेत्र अंतर्गत कटिहार जिले के बारसोई अनुमंडल में दिव्यांगजनों को सामाजिक और शारीरिक संबल प्रदान करने के उद्देश्य से संचालित ‘बुनियाद केंद्र’ की खोखली व्यवस्था मंगलवार को सरेआम उजागर हो गई. केंद्र परिसर में आयोजित इलेक्ट्रॉनिक ट्राइसाइकिल (E-Tricycle) वितरण कार्यक्रम के दौरान बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव दिखा. भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप के बीच दूर-दराज के गांवों से पहुंचे दिव्यांग लाभार्थी घंटों खुले आसमान के नीचे तड़पने को मजबूर रहे, जिससे मौके पर मौजूद ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का गुस्सा प्रशासनिक संवेदनहीनता के खिलाफ फूट पड़ा.
पहले चरण में 10 दिव्यांगों को मिली ई-ट्राइसाइकिल
- कुल निर्धारित लक्ष्य: समाज कल्याण विभाग के निर्देशानुसार, इस विशेष शिविर में कुल 18 योग्य दिव्यांग लाभार्थियों के बीच इलेक्ट्रॉनिक ट्राइसाइकिल का वितरण किया जाना सुनिश्चित किया गया है.
- प्रथम चरण का वितरण: मंगलवार को आयोजित पहले चरण के कार्यक्रम में 10 दिव्यांग लाभुकों को मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित विधायक प्रतिनिधि सागर साह, विधायक के निज सहायक रोहन महतो एवं अब्दुल वदूद द्वारा संयुक्त रूप से ई-ट्राइसाइकिल की चाबियां सौंपी गईं.
यद्यपि अपनी नई तिपहिया गाड़ी पाकर दिव्यांगों के चेहरों पर आंशिक खुशी जरूर दिखी, लेकिन केंद्र की बदइंतजामी से उपजे दर्द ने उस खुशी को भी फीका कर दिया.
न छाया की व्यवस्था, न पानी की बूंद; गर्मी से बेहाल दिखे दिव्यांग
शिविर की बदहाली की मुख्य कड़ियां इतनी दयनीय थीं कि मौके पर पहुंचे वीआईपी (VIP) अतिथि भी भड़क उठे. सुबह से ही कड़कड़ाती धूप के बावजूद दिव्यांगों के बैठने के लिए कोई टेंट या शेड नहीं लगाया गया था.
शारीरिक रूप से अक्षम लोग बैसाखियों के सहारे जमीन पर बैठकर पसीना बहाते रहे. इसके साथ ही परिसर में शुद्ध पेयजल (पीने के पानी) का कोई मटका या डिस्पेंसर तक उपलब्ध नहीं था, जिससे कई दिव्यांगों की तबीयत बिगड़ने जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई.
डॉक्टरों की अनुपस्थिति और दोहरी ड्यूटी का खेल
“बुनियाद केंद्र के कुप्रबंधन पर कड़ा ऐतराज जताते हुए विधायक प्रतिनिधि सागर साह और स्थानीय ग्रामीणों ने केंद्र की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा किया है. लोगों का सीधा आरोप है कि इस महत्वपूर्ण केंद्र में डॉक्टरों की नियमित उपलब्धता केवल कागजों तक सीमित है. यहां तैनात चिकित्सक दो अलग-अलग जगहों पर प्रतिनियुक्ति (Duty) होने का हवाला देकर अक्सर गायब रहते हैं, जिसके कारण सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों से इलाज, फिजियोथेरेपी और परामर्श के लिए आने वाले दिव्यांगों को बैरंग वापस लौटना पड़ता है. सरकार द्वारा दिव्यांगों के कल्याण पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन स्थानीय अधिकारी इस राशि को खानापूर्ति में उड़ा रहे हैं.”
E-Tricycle Distribution: बमुश्किल हरकत में आया प्रबंधन, जल्द सुधार का आश्वासन
मामले के तूल पकड़ने और जनप्रतिनिधियों की तीखी नाराजगी के बाद मौके पर मौजूद बुनियाद केंद्र के मुख्य चिकित्सक डॉ. देवराज ने सार्वजनिक रूप से स्वीकारा कि व्यवस्थागत स्तर पर कुछ बड़ी कमियां और त्रुटियां रह गई हैं.
पटना: NEET Re-Exam में सॉल्वर गैंग को लेकर पुलिस ने बड़ा खुलासा किया.
उन्होंने सफाई देते हुए आश्वस्त किया कि केंद्र में उपलब्ध संसाधनों को दुरुस्त करने की दिशा में आंतरिक कार्ययोजना बनाई जा रही है और बहुत जल्द दिव्यांगों के लिए स्थाई शेड, शुद्ध पेयजल और बैठने के लिए सुविधायुक्त बेंच की मुकम्मल व्यवस्था सुनिश्चित कर दी जाएगी. बहरहाल, स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से इस पूरे मामले की जांच करने की पुरजोर मांग की है.
