मिडिल ईस्ट में तैनात हैं 200+ यूक्रेन के मिलिट्री एक्सपर्ट, जेलेंस्की ने बताया- रूस का मोर्चा छोड़कर यहां क्या कर रहे?

Ukraine Military Expert in Middle East: यूक्रेन के 200 से ज्यादा मिलिट्री एक्सपर्ट मिडिल ईस्ट में तैनात हैं. यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने यूके की संसद में इस बात की जानकारी दी. लेकिन रूस के खिलाफ घर में चल रही लड़ाई को छोड़कर ये सभी यहां क्या कर रहे हैं?

Ukraine Military Expert in Middle East: 28 फरवरी से शुरू हुआ ईरान युद्ध खबर लिखे जाने तक जारी है. यह युद्ध का 19वां दिन है. युद्ध की वजह से तबाही के आंकड़े 2000 से ज्यादा मौत, आम जीवन में आई परेशानी और दुनिया में आए तेल संकट से कहीं ज्यादा है. इसमें इजरायल के साथ अमेरिका तो तन कर खड़ा है ही, अब एक खबर सामने आई है कि यूक्रेन भी इस युद्ध ईरान के खिलाफ है. यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि 200 से ज्यादा यूक्रेनी सैन्य विशेषज्ञ खाड़ी क्षेत्र और पूरे मिडिल ईस्ट में मौजूद हैं. ये एक्सपर्ट ईरान के ड्रोन हमलों से बचाव में वहां की सरकारों की मदद कर रहे हैं.

मंगलवार को जेलेंस्की यूके की पार्लियामेंट पहुंचे. उन्होंने वहां पर लंबा चौड़ा भाषण दिया. लंदन में  संसद के दर्जनों सदस्यों को संबोधित करते हुए यूक्रेनी नेता ने बताया कि 201 एंटी-ड्रोन विशेषज्ञ पहले से ही क्षेत्र में तैनात हैं और 34 अन्य ‘तैनाती के लिए तैयार’ हैं. ज़ेलेंस्की ने अपने भाषण में कहा, ‘ये सैन्य विशेषज्ञ हैं, जो जानते हैं कि कैसे मदद करनी है और शाहेद ड्रोन से कैसे बचाव करना है.’ 

ईरान अपने लो कॉस्ट ड्रोन की मदद से मिडिल ईस्ट के देशों में अमेरिकी हितों को निशाना बना रहा है. यह लोइटरिंग म्यूनिशन कामिकाजे ड्रोन (एक ही जगह चक्कर लगाकर, आत्मघाती हमला करने वाले) काफी घातक सिद्ध हो रहे हैं. यूक्रेनी प्रेसिडेंट ने इसी का जिक्र यूके की संसद में किया. उन्होंने कहा कि  इन्हें रूस 2022 से यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में इस्तेमाल कर रहा है. यूक्रेनी राष्ट्रपति ने कहा, ‘रूस और ईरान के शासन नफरत में भाई हैं, और इसलिए हथियारों में भी साझेदार हैं. हम चाहते हैं कि नफरत पर आधारित शासन किसी भी रूप में जीत न सकें.’

जेलेंस्की ने कहा, ‘हमारी टीमें पहले से ही यूएई, कतर, सऊदी अरब में मौजूद हैं और अब कुवैत की ओर जा रही हैं. हम कई अन्य देशों के साथ भी काम कर रहे हैं, समझौते पहले ही हो चुके हैं. हम नहीं चाहते कि ईरानी शासन का यह आतंक अपने पड़ोसियों के खिलाफ सफल हो.’ पिछले हफ्ते भी यूक्रेनी नेता ने कहा था कि सैन्य टीमें कई खाड़ी देशों और जॉर्डन में भेजी गई हैं.

जेलेंस्की ने और क्या-क्या कहा?

जेलेंस्की ने मंगलवार को कीर स्टार्मर और नाटो के महासचिव मार्क रूटे से मुलाकात की. मुलाकात के बाद उन्होंने कहा कि रूस को ईरान से शाहेद-136 ड्रोन मिले हैं और ईरान ने ‘रूस को इन्हें लॉन्च करना सिखाया और इनके उत्पादन की तकनीक भी दी. रूस ने बाद में इन्हें और उन्नत किया. अब हमारे पास साफ सबूत हैं कि इस क्षेत्र में इस्तेमाल हो रहे ईरानी शाहेद ड्रोन में रूसी कंपोनेंट्स भी शामिल हैं.’ उन्होंने कहा, ‘आज ईरान के आसपास जो हो रहा है, वह हमारे लिए दूर की जंग नहीं है, क्योंकि रूस और ईरान के बीच सहयोग है.’

उन्होंने ड्रोन युद्ध और निर्माण में यूक्रेन की क्षमता पर प्रकाश डालते हुए दावा किया कि यूक्रेन में मोर्चे पर रूस को होने वाले 90% नुकसान ‘हमारे ड्रोन की वजह से’ हो रहे हैं. उन्होंने बताया कि यूक्रेन अब समुद्री और हवाई ड्रोन से आगे बढ़कर ऐसे इंटरसेप्टर बना रहा है जो दुश्मन के ड्रोन को मार गिरा सकते हैं. उनके अनुसार, यूक्रेन रोजाना कम से कम 2,000 इंटरसेप्टर बना सकता है, जिसमें से आधे उसकी अपनी सुरक्षा के लिए और बाकी सहयोगी देशों के लिए उपलब्ध हो सकते हैं.

जेलेंस्की ने कहा, ‘हमने साधारण आत्मघाती समुद्री ड्रोनों से शुरुआत की. फिर हमने ऐसे ड्रोन बनाए जिनमें बुर्ज लगे हैं और जो हेलीकॉप्टरों को मार गिरा सकते हैं. अब हमारे पास ऐसे ड्रोन हैं जो समुद्र से रूसी लड़ाकू विमानों को मार गिरा सकते हैं. हमने ऐसे जहाज विकसित किए हैं जो अन्य ड्रोनों को ले जा सकते हैं.’

उन्होंने आगे कहा, ‘काला सागर में खतरों का सामना करते हुए, हम सही सुरक्षा समाधान खोज रहे हैं. इन समाधानों का उपयोग आपके मामलों में भी किया जा सकता है, जिसमें आज होर्मुज जलडमरूमध्य जैसी जटिल परिस्थितियाँ भी शामिल हैं. ड्रोन उन समस्याओं को हल कर सकते हैं जिन्हें कभी-कभी एक बेड़ा भी हल नहीं कर पाता.’ 

जेंलेंस्की ने कहा, ‘अगर अमीरात में किसी शाहेद ड्रोन को रोकना हो, तो हम कर सकते हैं. अगर इसे यूरोप या यूनाइटेड किंगडम में रोकना हो, तो भी हम कर सकते हैं. यह तकनीक, निवेश और सहयोग का सवाल है.’ हालांकि, यूक्रेन दुनिया के अग्रणी ड्रोन इंटरसेप्टर उत्पादकों में से एक बन चुका है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्हें मध्य पूर्व में ईरान के ड्रोन हमलों से निपटने के लिए यूक्रेन की मदद की जरूरत नहीं है.

ट्रंप ने कहा- नहीं चाहिए यूक्रेन की मदद

ईरान के शाहेद ड्रोन से मुकाबला करने के लिए अमेरिका ने अपने लुकास ड्रोन को इस्तेमाल करना शुरू किया है. लुकास- लो कॉस्ट अनक्रूड कांबैट अटैक सिस्टम है. यह ईरान के शाहेद ड्रोन को ही कॉपी करके बनाया गया है. ईरान ने अपने शाहेद ड्रोन को सऊदी अरब, यूएई, कतर, इराक और कुवैत में इस्तेमाल किया है. ऐसे में अमेरिका ने लुकास से मुकाबला करना शुरू किया. वहीं खाड़ी के देशों ने यूक्रेन की मदद से शाहेद को ठिकाने लगाने का प्रयास किया है. 

यूक्रेन ने अपने देश में कैसे शाहेद को मात दिया?

यूक्रेन ने ईरान निर्मित शाहेद ड्रोन का मुकाबला करने के लिए मल्टी लेयर रक्षा रणनीति अपनाई. इसमें रडार और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम से ड्रोन की पहचान और सिग्नल जाम करना, एंटी-एयरक्राफ्ट गन और मिसाइल सिस्टम से उन्हें मार गिराना और सबसे अहम कम लागत वाले अपने ‘ड्रोन इंटरसेप्टर’ विकसित करना शामिल है, जो हवा में ही दुश्मन ड्रोन को नष्ट कर देते हैं.

यूक्रेन ने शाहेद के खतरे से लड़ने के लिए महंगे मिसाइल सिस्टम पर निर्भर रहने के बजाय सस्ती और तेज़ ‘FPV इंटरसेप्टर ड्रोन’ विकसित किए, जैसे ‘स्टिंग’, जो सीधे दुश्मन ड्रोन से टकराकर उन्हें हवा में ही नष्ट कर देते हैं. इसके साथ ही, मोबाइल फायर ग्रुप्स (छोटे-छोटे सैनिक दल)  रात के समय मशीन गन और सर्चलाइट की मदद से कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन को मार गिराते हैं. यह रणनीति न सिर्फ असरदार साबित हुई, बल्कि कम लागत में बड़े पैमाने पर सुरक्षा देने में भी सफल रही.

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इसके अलावा, यूक्रेन ने इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और रडार तकनीक का चतुराई से इस्तेमाल किया. नकली ड्रोन और गुब्बारों के जरिए दुश्मन के रडार को भ्रमित किया गया, जिससे असली हमलों को ट्रैक करना मुश्किल हो गया. यूक्रेनी सेना अब ड्रोन के उड़ान मार्ग (ट्रैजेक्टरी) का पहले ही पता लगाकर उन्हें रास्ते में ही खत्म करने लगी है. 

यू्क्रेन ने महंगे मिसाइल सिस्टम के बजाय छोटे इंटरसेप्टर ड्रोन का उपयोग किया, जो आर्थिक रूप से टिकाऊ है. ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका की लड़ाई इसी वजह से महंगी पड़ रही थी. जहां एक शाहेद ड्रोन 20,000 से 35,000 डॉलर का पड़ रहा था, वहीं अमेरिकी डिफेंस मिसाइलें 3 लाख डॉलर से ज्यादा पड़ रही थीं.  

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इन सभी उपायों ने मिलकर ऐसी मजबूत रक्षा प्रणाली बनाई, जिसने 90% से अधिक ड्रोन हमलों को विफल किया और रूस की बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले की रणनीति को गंभीर चुनौती दी.

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लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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