ईरान: खामेनेई की मौत के बाद कौन लेगा उनकी जगह? 5 नजदीकी या उनका बेटा बनेगा सुप्रीम लीडर

Who after Khamenei: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद देश एक गहरे और अभूतपूर्व राजनीतिक-सैन्य संकट में फंस गया है. इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स नए सर्वोच्च नेता की नियुक्ति को लेकर जल्दबाजी में फैसला लेना चाहता है. ऐसे में किन नामों की चर्चा है, आइए जानते हैं.

Who after Khamenei: इजरायली एयरफोर्स ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातोल्लाह अली खामेनेई को एयरस्ट्राइक में मार दिया. शनिवार को तेहरान में खामेनेई के आधिकारिक आवास और कार्यालय पर हमला किया गया, जहां उनके साथ उनकी बेटी दामाद और अन्य लोगों की मौत हो गई. ईरान का पावर स्ट्रक्चर ऐसा है, जिसमें सभी नीतिगत या शासन वाले फैसले सुप्रीम लीडर ही लेते हैं. उनकी मौत के बाद, ईरान में सत्ता संकट उत्पन्न हो गया है, ऐसे में अब देश की कमान किसके हाथ में होगी? इस प्रश्न का जवाब शायद खामेनेई ही तय करके गए थे, लेकिन इसका खुला ऐलान नहीं हुआ था.  

खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने 40 दिनों के शोक और 7 दिनों की सार्वजनिक छुट्टी की घोषणा की है. 1989 से ईरान का नेतृत्व कर रहे अयातुल्ला अली खामेनेई मध्य पूर्व के सबसे लंबे समय तक सत्ता में रहने वाले राष्ट्राध्यक्ष थे. 1979 की इस्लामी क्रांति के रूहोल्लाह खुमैनी के बाद खामेनेई ने शासन संभाला, राष्ट्रपति बने, आईआरजीसी बनाई, ईरान पर कठोरता से शासन किया, लेकिन इजरायल के हमले में 86 वर्षीय नेता की मौत हो गई.  अब इस्लामिक रिपबल्कि नए सर्वोच्च नेता के चयन की तैयारी कर रहा है. हालांकि इसका चयन कैसे होता है, इसे संक्षिप्त तरीके से समझ लेते हैं. 

सर्वोच्च नेता का चयन कैसे होता है?

ईरान के संविधान के अनुसार, विशेषज्ञों की सभा (मजलिस-ए-खोबरेगान-ए-रहबरी) सर्वोच्च नेता की नियुक्ति और निगरानी करता है. यह व्यवस्था ‘विलायत-ए-फकीह’ के सिद्धांत पर आधारित है, जिसके अनुसार केवल कोई प्रमुख इस्लामी धर्मगुरु ही इस पद पर आसीन हो सकता है. 88 सदस्यों वाली यह संस्था इस्लामिक स्कॉलर्स से बनी होती है, जिन्हें जनता सीधे मतदान के जरिये आठ साल के कार्यकाल के लिए चुना जाता है. इसके संवैधानिक दायित्वों में सर्वोच्च नेता की नियुक्ति, निगरानी और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें पद से हटाना शामिल है. हालाँकि सुप्रीम लीडर को हटाना आसान नहीं होता. असेंबली के उम्मीदवारों की छँटनी गार्जियन काउंसिल करता है. खुद गार्जियन काउंसिल के सदस्य प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सर्वोच्च नेता द्वारा चुने जाते हैं. हालांकि, यह सत्ता संरचना में एक तरह का क्लोज्ड सर्कल जैसा ही है. 

खामेनेई की जगह लेने की दौड़ में प्रमुख नाम

अमेरिका स्थित थिंक टैंक काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस की हालिया रिपोर्ट में संभावित उत्तराधिकारियों की चर्चा की गई थी. इसमें कई नामों का उल्लेख किया गया था. देखें- 

होज्जत-उल-इस्लाम मोहसिन कोमी– खामेनेई के करीबी सलाहकार; समर्थकों का मानना है कि वह संक्रमण काल में निरंतरता और स्थिरता बनाए रख सकते हैं.

आयतुल्लाह अलीरेजा आराफी– वरिष्ठ मौलवी; गार्जियन काउंसिल और असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स दोनों के सदस्य; ईरान की मदरसा व्यवस्था के प्रमुख.

आयतुल्लाह मोहसिन अराकी– असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के वरिष्ठ सदस्य; मज़बूत धार्मिक पृष्ठभूमि.

आयतुल्लाह गुलाम हुसैन मोहसेनी एजई– वर्तमान में ईरान की न्यायपालिका के प्रमुख; सुरक्षा और प्रशासनिक अनुभव.

आयतुल्लाह हाशेम होसैनी बुशेहरी– कोम के जुमे की नमाज के इमाम और असेंबली के सदस्य.

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बेटे को भी बनाया जा सकता है सुप्रीम लीडर

हालांकि, खामेनेई ने अपने जीवनकाल में किसी उत्तराधिकारी का औपचारिक ऐलान नहीं किया था, लेकिन खामेनेई के बेटे का नाम भी ईरान के सुप्रीम लीडर बनने के लिए आगे आ सकता है. ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) नए सर्वोच्च नेता की नियुक्ति को लेकर जल्दबाजी में फैसला लेना चाहता है. इसके लिए संवैधानिक प्रक्रिया को किनारे करने की कोशिश भी की जा सकती है. रिपोर्ट के अनुसार, IRGC के शीर्ष नेतृत्व यह प्रयास कर रहा है कि रविवार, 1 मार्च की सुबह तक खामेनेई के उत्तराधिकारी के नाम पर सहमति बना ली जाए. ऐसे में दिवंगत नेता अली खामनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता घोषित किया जा सकता है.

इन सभी के अलावा फिलहाल ईरान में राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान भी शासन कर रहे हैं. उनके नाम पर सहमति भी बन सकती है, क्योंकि अगर ईरान लोकतंत्र के रास्ते पर चलना चाहता है, तो उन्हें चुन सकता है. इसके साथ ही खामेनेई की अनुपस्थिति में ईरान की सिक्योरिटी काउंसिल के अध्यक्ष अली लाजीरानी भी ईरान के धार्मिक शासन को अपने हाथ में ले सकते हैं. फिलहाल ईरान इसकी घोषणा करने में देरी भी कर सकता है, क्योंकि इजरायल और अमेरिकी के हमले अभी रुके हुए हैं, पूरी तरह बंद नहीं. आने वाले समय में स्थिति और साफ हो सकती है.

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By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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