USS Abraham Lincoln: अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, अरब सागर में ईरान के खिलाफ बड़ी सैन्य कार्रवाई शुरू हो गई है. अमेरिका ने ईरान के तटों और बंदरगाहों की ‘नाकाबंदी’ कर दी है. 16 अप्रैल को जारी जानकारी में बताया गया कि इस पूरे ऑपरेशन की कमान एयरक्राफ्ट कैरियर ‘यूएसएस अब्राहम लिंकन’ (CVN 72) संभाल रहा है. CENTCOM ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि इस घेराबंदी का मकसद राष्ट्रपति के आदेश का पालन करना है ताकि कोई भी जहाज ईरानी सीमा में न तो घुस सके और न ही वहां से बाहर निकल सके.
10 हजार सैनिक और 100 विमान तैनात
CENTCOM की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मिशन में अमेरिका ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. इस घेराबंदी को सफल बनाने के लिए 10,000 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक, 12 से अधिक जंगी जहाज और 100 से ज्यादा एयरक्राफ्ट तैनात किए गए हैं. सेंटकॉम, यह अमेरिकी रक्षा विभाग का एक प्रमुख सैन्य कमांड है, जो मिडिल ईस्ट, मध्य एशिया और दक्षिण एशिया के 21 देशों में अमेरिकी सैन्य अभियानों और सुरक्षा हितों की जिम्मेदारी संभालता है.
एयरक्राफ्ट कैरियर अब्राहम लिंकन पर F-35C स्टील्थ फाइटर, F/A-18 फाइटर जेट्स, और ई-2डी कमांड कंट्रोल प्लेन जैसे हाई-टेक हथियार मौजूद हैं. इसके अलावा, गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर ‘यूएसएस डेलबर्ट डी ब्लैक’ (DDG 119) को भी ईरानी पानी के पास संदिग्ध जहाजों को रोकने की जिम्मेदारी दी गई है.
होर्मुज जलडमरूमध्य पर रोक नहीं
अमेरिकी रक्षा विभाग की ओर से जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन, एयर फोर्स जनरल डैन केन ने साफ किया है कि यह घेराबंदी सिर्फ ईरान के बंदरगाहों और उसके तटों तक सीमित है. उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) को ब्लॉक नहीं कर रहा है.
जनरल केन के अनुसार, यह नियम हर देश के जहाज पर लागू होता है, चाहे वह किसी भी देश का क्यों न हो. अमेरिका का कहना है कि उनकी नौसेना पूरी तरह सतर्क है और किसी भी जहाज को ईरानी बंदरगाहों तक जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है.
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राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया रूटीन ऑपरेशन
इस पूरे सैन्य कदम पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भी अपनी बात रखी है. राष्ट्रपति के अनुसार, यह घेराबंदी बहुत अच्छे से चल रही है और अमेरिकी नौसेना के सामने कोई भी जहाज वहां से गुजरने की हिम्मत नहीं कर रहा है. उन्होंने इसे नौसेना के लिए एक ‘रूटीन’ काम बताया है. फिलहाल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण पूरे अरब सागर क्षेत्र में सुरक्षा काफी सख्त कर दी गई है और अमेरिकी बल हर गतिविधि पर पैनी नजर रख रहे हैं.
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