US बोला: चीन के पास 2030 तक होंगे 1000 परमाणु हथियार, बीजिंग को इस संधि में लाना चाहते हैं ट्रंप

China Nuclear Weapon: सोमवार को हथियार कंट्रोल पर फोकस करने वाले एक अमेरिकी अधिकारी ने लगभग छह साल पहले चीन ने अंडरग्राउंड न्यूक्लियर टेस्ट किया था. उन्होंने डीक्लासिफाइड डिटेल्स साझा कीं. उन्होंने कहा कि चीन के पास 2030 तक 1000 न्यूक्लियर हथियार बनाने लायक मैटेरियल है. उन्होंने कहा कि इसमें रूस बीजिंग की मदद कर रहा है.

China Nuclear Weapon: संयुक्त राज्य अमेरिका ने सोमवार को चीन पर अपने परमाणु शस्त्रागार का तेजी से विस्तार करने का आरोप लगाया. अमेरिका ने यह भी दोहराया कि बीजिंग ने गुप्त रूप से परमाणु परीक्षण किए हैं. वॉशिंगटन का कहना है कि भविष्य में होने वाली किसी भी हथियार नियंत्रण संधि में चीन को शामिल किया जाना चाहिए. अमेरिका के अनुसार, इस महीने की शुरुआत में न्यू स्टार्ट संधि के खत्म होने से एक नया मौका पैदा हुआ है. न्यू स्टार्ट अमेरिका और रूस के बीच आखिरी परमाणु हथियार नियंत्रण समझौता था. अब अमेरिका का कहना है कि इससे एक बेहतर समझौता किया जा सकता है, जिसमें चीन भी शामिल हो.

न्यू स्टार्ट संधि 5 फरवरी को समाप्त हो गई. यह संधि अमेरिका और रूस को 1,550 तैनात परमाणु वारहेड्स तक सीमित करती थी. नोबेल शांति पुरस्कार विजेता अभियान समूह आईकैन (ICAN) के अनुसार अमेरिका और रूस के पास 5,000 से अधिक परमाणु हथियार हैं. अमेरिका का आरोप है कि रूस संधि की सीमा से आगे निकल चुका है. अमेरिका का कहना है कि चीन भी तेजी से उसी दिशा में बढ़ रहा है.

‘2030 तक चीन के पास हो सकते हैं 1000 परमाणु हथियार’

हथियार नियंत्रण और अप्रसार मामलों के लिए अमेरिका के सहायक विदेश मंत्री क्रिस्टोफर येव ने जिनेवा में निरस्त्रीकरण सम्मेलन को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने कहा कि न्यू स्टार्ट एक कमजोर संधि थी. उनके मुताबिक, इसमें चीन द्वारा किए जा रहे तेज, योजनाबद्ध और गोपनीय परमाणु विस्तार को नजरअंदाज किया गया था. द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक, येव ने कहा कि चीन ने बिना किसी पारदर्शिता के और अपने इरादों को साफ किए बिना अपने परमाणु हथियारों की संख्या में बड़ा इजाफा किया है. 

उनका दावा है कि अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि चीन अगले चार या पांच साल में परमाणु ताकत के मामले में बराबरी की स्थिति में पहुंच सकता है, हालांकि उन्होंने यह साफ नहीं किया कि बराबरी से उनका क्या मतलब है. येव ने कहा, ‘बीजिंग 2030 तक 1,000 से अधिक परमाणु वारहेड्स के लिए आवश्यक विखंडनीय पदार्थ (फिसाइल मटीरियल) रखने की राह पर है.’  स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट्स के मुताबिक फिलहाल चीन के पास 600 परमाणु हथियार हैं, जो अमेरिका और रूस के बाद तीसरा सबसे बड़ा हथियार जखीरा है.

चीन परमाणु हथियारों की दौड़ में शामिल नहीं- शेन जियान

चीन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है. निरस्त्रीकरण सम्मेलन में चीन के राजदूत शेन जियान ने कहा कि कुछ देश चीन की परमाणु नीति को जानबूझकर गलत तरीके से पेश कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि चीन किसी भी देश के साथ परमाणु हथियारों की दौड़ में शामिल नहीं होगा. शेन ने यह भी कहा कि चीन का परमाणु शस्त्रागार अमेरिका और रूस जैसे देशों के स्तर का नहीं है. उनके मुताबिक, चीन से त्रिपक्षीय परमाणु वार्ता में शामिल होने की उम्मीद करना न तो उचित है और न ही व्यावहारिक.

न्यू स्टार्ट के खत्म होने का मतलब यह है कि दशकों में पहली बार ऐसा हुआ है जब दुनिया के सबसे घातक हथियारों को सीमित करने वाली कोई संधि मौजूद नहीं है. इससे एक नई वैश्विक हथियारों की दौड़ की आशंका भी बढ़ गई है. येव ने संधि के समाप्त होने का स्वागत करते हुए कहा कि वारहेड्स और लॉन्चर्स पर उसकी संख्यात्मक सीमाएं अब प्रासंगिक नहीं रहीं, क्योंकि रूस द्वारा कथित उल्लंघन किए गए हैं. उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि मॉस्को, बीजिंग की हथियार क्षमता को बढ़ाने में मदद कर रहा है.

हालांकि, अमेरिका का कहना है कि बातचीत पूरी तरह बंद नहीं हुई है. एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, न्यू स्टार्ट के खत्म होने के अगले ही दिन वॉशिंगटन में चीनी प्रतिनिधिमंडल के साथ एक शुरुआती बैठक हुई थी. इसके बाद जिनेवा में एक और अहम बैठक तय की गई है.

येव ने पिछले सप्ताह संकेत दिया था कि ट्रंप समान आधार पर परीक्षण बहाल करने को लेकर गंभीर हैं. उन्होंने सोमवार को चीन द्वारा गुप्त परमाणु परीक्षण किए जाने के अमेरिकी आरोपों को और दोहराया. उन्होंने उस कम-शक्ति वाले परीक्षण पर अधिक विवरण दिए, जिसे वॉशिंगटन के अनुसार बीजिंग ने 2020 में किया था, और चीन पर बड़े विस्फोटों की तैयारी का आरोप लगाया.

अमेरिका ने दिया चीनी परीक्षण का सबूत

येव ने सम्मेलन को बताया कि पास के कजाकिस्तान में एकत्र किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि चीन ने 22 जून, 2020 को 09:18 GMT पर भूमिगत 2.75 तीव्रता का विस्फोट किया. उन्होंने कहा, ‘इस घटना की अनुमानित शक्ति 10 टन परमाणु विस्फोट (या पाँच टन पारंपरिक विस्फोट के समकक्ष) थी. यह मानते हुए कि विस्फोट पानी की सतह के नीचे कठोर चट्टान में पूरी तरह युग्मित (जब एक प्रतिक्रिया दूसरी ऊर्जा मुक्त करने वाली प्रतिक्रिया के साथ हो या जब दो क्रियाएं एक साथ हों) था.’ उन्होंने कहा कि ऐसी और घटनाएं भी हुई हैं. वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा, यह आरोप लगाते हुए कि चीन सैकड़ों टन तक की निर्धारित शक्ति वाले परीक्षण करने की योजना बना रहा है.

अमेरिका अपने हथियार बढ़ाने का बहाना खोज रहा: चीन

चीन ने इन सभी आरोपों को निराधार बताया है. शेन ने चीन द्वारा परमाणु परीक्षण किए जाने के निराधार (अमेरिकी) आरोपों की कड़ी निंदा की. उन्होंने वॉशिंगटन पर आरोप लगाया कि वह इन दावों का इस्तेमाल खुद परमाणु परीक्षण फिर से शुरू करने के बहाने के रूप में कर रहा है. वहीं, सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) ने भी अपनी हालिया रिपोर्ट में किसी विस्फोट का निर्णायक सबूत नहीं पाया. रिपोर्ट में कहा गया कि उपग्रह चित्रों में चीन के पश्चिमी क्षेत्र शिनजियांग में स्थित उसके ऐतिहासिक परीक्षण स्थल लोप नूर में कोई असामान्य गतिविधि नहीं दिखी.

ट्रंप ने न्यूक्लियर टेस्टिंग शुरू करने की दी है चेतावनी

अमेरिका का कहना है कि वह हथियार नियंत्रण से पीछे नहीं हट रहा है. येव ने साफ कहा कि लक्ष्य अब भी कम परमाणु हथियारों वाली दुनिया है. हालांकि, पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले यह कह चुके हैं कि अगर चीन और रूस ने गुप्त परीक्षण किए हैं, तो अमेरिका भी बराबरी के आधार पर परमाणु परीक्षण दोबारा शुरू कर सकता है.

क्या है न्यू स्टार्ट संधि?

न्यू स्टार्ट संधि पर 8 अप्रैल 2010 को प्राग में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा और रूस के तत्कालीन राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने हस्ताक्षर किए थे. यह समझौता 2002 की उस पुरानी संधि की जगह लाया गया था, जिसके तहत दोनों देशों को 2012 के अंत तक अपने रणनीतिक परमाणु हथियारों की संख्या 1,700 से 2,200 के बीच सीमित करनी थी. न्यू स्टार्ट के जरिए अमेरिका और रूस ने लंबी दूरी के परमाणु हथियारों में और कटौती पर सहमति बनाई. 

क्या नियम बनाए गए थे?

इसमें साफ-साफ नियम तय किए गए कि कितनी मिसाइलें, कितने बमवर्षक और कितने परमाणु वारहेड्स तैनात किए जा सकते हैं. इसके तहत अधिकतम 700 अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलें, पनडुब्बी से दागी जाने वाली मिसाइलें और परमाणु हथियारों से लैस भारी बॉम्बर तैनात किए जा सकते थे. इन सभी प्लेटफॉर्म्स पर कुल मिलाकर 1,550 से ज्यादा परमाणु वारहेड्स रखने की अनुमति नहीं थी. इसके अलावा, तैनात और गैर-तैनात लॉन्चरों और परमाणु सक्षम बॉम्बरों की कुल सीमा 800 तय की गई थी.

न्यू स्टार्ट केवल हथियारों की संख्या सीमित करने तक ही नहीं थी, बल्कि इसमें पारदर्शिता बनाए रखने की भी व्यवस्था थी. दोनों देश साल में दो बार एक-दूसरे के साथ डेटा साझा करते थे. इसके अलावा, रणनीतिक परमाणु बलों की तैनाती और आवाजाही की जानकारी दी जाती थी और कम समय की सूचना पर ऑन-साइट निरीक्षण की अनुमति भी होती थी. इससे दोनों पक्षों को एक-दूसरे की परमाणु क्षमताओं की वास्तविक स्थिति का अंदाजा मिलता था.

कब तक के लिए थी यह संधि?

इस संधि के लागू होने के सात साल के भीतर, यानी 5 फरवरी 2018 तक, अमेरिका और रूस दोनों ने इन लक्ष्यों को हासिल कर लिया था. इसके बाद संधि की अवधि समाप्त होने तक, यानी 5 फरवरी 2026 तक, इन तय सीमाओं का पालन किया जाता रहा.

फिर समस्या क्या हुई? 

यह संधि पहले 10 साल के लिए थी. 2021 में इसे आखिरी बार 5 साल के लिए बढ़ाया गया, लेकिन यूक्रेन संकट के कारण रूस ने फरवरी 2023 में सत्यापन प्रक्रिया से खुद को अलग कर लिया. ऑन-साइट निरीक्षण और डेटा साझा करना रोक दिया.इससे संधि का निगरानी तंत्र लगभग खत्म हो गया

इसके बाद क्या हुआ? 

रूस ने कहा कि वह तय संख्यात्मक सीमाओं का पालन करता रहेगा. पहले SALT और फिर New START Treaty के जरिए दुनिया में परमाणु हथियारों की संख्या 1986 में करीब 70,400 से घटकर आज लगभग 12,500 रह गई

अब खतरा क्या है? 

अब ये कानूनी प्रतिबंध मौजूद नहीं हैं. इसका मतलब है कि रूस अपने तैनात परमाणु वारहेड्स करीब 60% तक और अमेरिका करीब 110% तक कुछ ही महीनों में बढ़ा सकते हैं.

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By Anant narayan shukla

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