US-Iran Tension: यरूशलेम पोस्ट ने इस रिपोर्ट के हवाले से बताया कि इन सैनिकों में पैदल सेना और बख्तरबंद गाड़ियां शामिल हो सकती हैं. ये सैनिक पहले से तैनात 82nd एयरबोर्न डिवीजन के साथ मिलकर काम करेंगे. हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि इन्हें ठीक किस जगह पर तैनात किया जाएगा, लेकिन जानकारों का मानना है कि इनका सीधा निशाना ईरान का मुख्य तेल डिपो ‘खार्ग आइलैंड’ हो सकता है.
ट्रंप ने हमले रोकने की डेडलाइन 10 दिन बढ़ाई
व्हाइट हाउस की डिप्टी प्रेस सेक्रेटरी एना केली ने कहा है कि सैनिकों की तैनाती का फैसला ‘डिपार्टमेंट ऑफ वॉर’ ही करेगा. उन्होंने साफ किया कि राष्ट्रपति ट्रंप के पास सैन्य कार्रवाई के सारे विकल्प खुले हैं.
इस बीच, ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में बताया कि ईरान की गुजारिश पर उन्होंने तेल ठिकानों पर होने वाले हमलों को 10 दिनों के लिए टाल दिया है. अब यह रोक 6 अप्रैल 2026 की रात 8 बजे (अमेरिकी समय) तक रहेगी. ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान के साथ बातचीत काफी अच्छी चल रही है. अब देखना यह है कि इस डेडलाइन का क्या नतीजा निकलता है.
ईरान ने UN को लिखी चिट्ठी
एक तरफ बातचीत की खबरें हैं, तो दूसरी तरफ जंग का मैदान भी गर्म है. प्रेस टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने शुक्रवार तड़के ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4’ के तहत 83वीं लहर का हमला शुरू किया. इसमें मिसाइलों और ड्रोन से अमेरिकी और इजरायली ठिकानों को निशाना बनाया गया.
वहीं, ईरान ने यूनाइटेड नेशंस (UN) को चिट्ठी लिखकर अपनी चिंता जताई है. ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी ने इस रिपोर्ट पर आपत्ति जताई है कि अमेरिका और इजरायल उनके बड़े नेताओं, जैसे स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ और विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची की हत्या की साजिश रच रहे हैं.
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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अमेरिका की नजर
मिडल ईस्ट में इस वक्त करीब 50,000 अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं. रॉयटर्स के एक सोर्स के मुताबिक, अमेरिका का इरादा ईरान के अंदर घुसने का नहीं, बल्कि अपनी ताकत को और मजबूत करने का है.
ट्रंप का मुख्य फोकस ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को फिर से खोलने पर है, जो दुनिया का सबसे जरूरी समुद्री रास्ता है. इसके लिए अमेरिकी सेना ईरान के तटीय इलाकों के पास भी तैनाती की योजना बना रही है. 82nd एयरबोर्न डिवीजन को खास तौर पर पैराशूट से हमला करने और तेज ऑपरेशन के लिए जाना जाता है, जो इस वक्त हाई अलर्ट पर है.
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